शांता कुमार ने एक बयान में कहा कि अमेरिका को भारत से सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि भारत ने अमेरिका को भारत-पाक युद्ध समाप्त करवाने का श्रेय नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंधूर के बाद पाकिस्तान खुद युद्धविराम के लिए गिड़गिड़ाया था।
उन्होंने ट्रंप की नोबेल पुरस्कार को लेकर लालसा पर भी तीखा तंज कसा। शांता कुमार ने कहा, “ट्रंप कई बार युद्ध समाप्त करवाने का श्रेय लेकर नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर चुके हैं। यह इतिहास में शायद पहली बार है जब किसी देश का राष्ट्रपति खुलेआम पुरस्कार के लिए इस हद तक लालायित दिखाई दिया हो।”
उन्होंने कहा कि ट्रंप ने पाकिस्तान जैसे देश से भी अपने लिए नोबेल की सिफारिश करवाने की कोशिश की, जो अमेरिका के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है।
भारत की नीतियों की सराहना करते हुए शांता कुमार ने कहा कि भारत ने भले ही अमेरिका के टैरिफ से आर्थिक कठिनाई झेली हो, लेकिन अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं किया। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में एक स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में व्यवहार किया है।
अमेरिकी नेतृत्व की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “विश्व इतिहास में यह पहला अवसर है जब अमेरिका जैसा बड़ा देश बचकाने नेतृत्व के कारण उपहास का पात्र बन रहा है। मुझे लगता है कि अमेरिका के बहुत से मतदाता ट्रंप को चुनने के लिए आज शर्मिंदा होंगे।”
