हाई कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिए हैं कि वे उन अधिकारियों की जानकारी दें, जो अतिक्रमण के समय तैनात थे, लेकिन उन्होंने न तो अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी और न ही कोई कार्रवाई की।
शांता कुमार ने शनिवार काे एक बयान में कहा कि अब केवल अवैध कब्जा करने वालों पर ही नहीं, बल्कि अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। यही असली परिवर्तन है।
उन्होंने कहा कि देश भर में सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे होते हैं। इन पर बहुमूल्य भवन खड़े हो जाते हैं और जब वर्षों बाद मामला अदालत में आता है तो करोड़ों की लागत से बने भवनों को गिराने के आदेश दिए जाते हैं। दुर्भाग्य से आज तक इस समस्या के मूल कारणों की ओर किसी सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं की।
शांता कुमार ने कहा कि जब कोई सरकारी भूमि पर कब्जा करता है, उस समय यदि तैनात अधिकारी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाएं, तो कोई निर्माण हो ही नहीं सकता। करोड़ों की इमारतें तब ही बनती हैं जब जिम्मेदार अफसर या तो चुप रहते हैं या भ्रष्टाचार में संलिप्त होते हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलडोजर कार्रवाई से अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तो की, लेकिन संबंधित अधिकारियों पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
