मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में कलेक्टर ऋजु बाफना और जिला आबकारी अधिकारी (DEO) विनय रंगशाही के बीच चला आ रहा विवाद अब प्रदेश के प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मामला केवल काम में लापरवाही का नहीं, बल्कि पद के दुरुपयोग और नियमों को ताक पर रखकर की गई कार्रवाई तक जा पहुंचा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर की ‘मंशा’ पर सवाल उठाते हुए रंगशाही के निलंबन पर रोक लगा दी है। आखिर जिले के दो बड़े अफसरों के बीच क्यों टकराव के हालात बने? मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा? और क्या अब हाईकोर्ट के फैसले से जिला आबकारी अधिकारी के सामने कोई चुनौती नहीं है? इस रिपोर्ट में विस्तार से बताते हैं… विवाद की जड़- आखिर कहां से शुरू हुआ टकराव इस विवाद की शुरुआत होती है सितंबर-अक्टूबर 2025 से। शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना और आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के बीच तालमेल की कमी तब उजागर हुई जब कलेक्टर ने रंगशाही का 5 दिन का वेतन काट दिया। आरोप था कि कलेक्टर के बुलाने पर वे देरी से पहुंचे। इसके बाद से ही दोनों के बीच शिकायतों और नोटिसों का दौर शुरू हो गया। अगस्त 2025 में आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही ने जॉइन किया था। अगले महीने से कलेक्टर ने सख्ती शुरू कर दी थी। कलेक्टर की ‘चार्जशीट’ : रंगशाही पर लगे ये 6 गंभीर आरोप कलेक्टर ऋजु बाफना ने 13 फरवरी 2025 को जारी नोटिस में रंगशाही के कामकाज पर कई सवाल खड़े किए थे। उनके मुख्य आरोप ये थे- 1. महत्वपूर्ण आयोजनों से गायब रहना: मध्य प्रदेश स्थापना दिवस (1 नवंबर), अंतरराष्ट्रीय गीता दिवस (1 दिसंबर), जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक (13 दिसंबर), अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (12 जनवरी) और गणतंत्र दिवस जैसे बड़े कार्यक्रमों में रंगशाही अनुपस्थित रहे। 2. बैठकों में लापरवाही: हर सोमवार को होने वाली टीएल (Time Limit) बैठक और मंगलवार की जनसुनवाई में रंगशाही लगातार नदारद रहे, जिससे विभागीय कार्यों की समीक्षा नहीं हो सकी। 3. मोबाइल ‘स्विच ऑफ’ की समस्या: कलेक्टर का आरोप था कि रंगशाही का फोन अक्सर बंद रहता है। उनके स्टेनो अर्पित जैन को फोन मिलाने के निर्देश दिए जाते थे, लेकिन संपर्क नहीं हो पाता था। 4. मुख्यालय छोड़ना: बिना अनुमति जिला मुख्यालय से बाहर रहने और बुलाने पर घंटों देरी से आने का आरोप। 5. अवैध शराब पर ढीली कार्रवाई: अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक केवल 2 केस पेश किए गए। 2 अक्टूबर (ड्राय डे) को शराब बिक्री की अनियमितता पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। 6. निरीक्षण में शून्य रिपोर्ट: रोस्टर के अनुसार सितंबर से जनवरी तक किसी भी शराब दुकान का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश नहीं की गई। रंगशाही का पलटवार : ‘सूचना नहीं थी, मोबाइल तो चालू था’ विनय रंगशाही ने 16 फरवरी को कलेक्टर के हर आरोप का बिंदुवार जवाब दिया, जिसे हाईकोर्ट में भी आधार बनाया गया। हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : ‘कलेक्टर की मंशा संदिग्ध’ जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तो जस्टिस ने कलेक्टर ऋजु बाफना के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर आपत्ति जताई? 1. नियम विरुद्ध प्रभार : कलेक्टर ने 20 जनवरी को ही रंगशाही का प्रभार एक उपनिरीक्षक स्तर की अधिकारी निमिषा परमार को दे दिया था। कोर्ट ने कहा कि निलंबन से पहले ही प्रभार छीनना यह दर्शाता है कि निर्णय पहले ही लिया जा चुका था। 2. जल्दबाजी में निलंबन : 16 फरवरी को रंगशाही ने जवाब दिया और उसी दिन संभागायुक्त आशीष सिंह ने बिना जवाब का सही परीक्षण किए निलंबन आदेश निकाल दिया। सार्थक ऐप और ‘फर्जी’ हाजिरी का विवाद कलेक्टर की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि विनय रंगशाही ने ‘सार्थक ऐप’ पर फर्जी तरीके से हाजिरी दर्ज की। जांच दल के मुताबिक, 34 दिनों में से 7 दिन हाजिरी नहीं लगी, जबकि 15 दिन पुरानी फोटो या वीडियो के जरिए ‘चेक-इन’ किया गया। हालांकि, रंगशाही ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सैलरी रोकने के आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और राहत मांगी। हाईकोर्ट के आदेश से कलेक्टर ऋजु बाफना की कार्रवाई को झटका लगा है। फिलहाल, विनय रंगशाही शाजापुर में जिला आबकारी अधिकारी के पद पर बने रहेंगे। हालांकि, शासन और संभागायुक्त इस मामले में दोबारा अपना पक्ष रख सकते हैं। कलेक्टर के लिए अब बड़ी चुनौती ‘नियम विरुद्ध प्रभार’ सौंपने का मुद्दा अब कलेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह पूरा विवाद प्रशासनिक सख्ती और नियम-प्रक्रिया के बीच टकराव के रूप में सामने आया है। एक ओर कलेक्टर अनुशासन और जवाबदेही की बात कर रही हैं, वहीं अधिकारी इसे व्यक्तिगत रंजिश और नियमों के उल्लंघन का मामला बता रहे हैं। संभागायुक्त के आदेश पर आगे कार्रवाई करेंगे शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना ने भास्कर से बातचीत में कहा कि विनय रंगशाही इंदौर में ही रहते हैं। शाजापुर में आते ही नहीं हैं। लगातार अनुपस्थित रहते हैं। पुरानी हिस्ट्री इनकी इसी तरह की है। स्टेनो वाली बात भी झूठी है। फोन आते ही स्वीच ऑफ कर लेते हैं। कोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं। संभागायुक्त को अवगत कराया है। उनके निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शाजापुर कलेक्टर v/s आबकारी अधिकारी:नोटिस, निलंबन और फिर हाईकोर्ट का ‘हस्तक्षेप’; आपसी टकराव की पूरी इनसाइड स्टोरी
