इस दौरान उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से शिकायतें से उन्हें इलाके में अवैध खनन धड़ल्ले से होने की शिकायत मिल रही थी। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया।
बाद में पूर्व मंत्री ने कहा कि इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध खनन बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस, वन विभाग और खनन विभाग के कुछ अधिकारी खनन माफियाओं के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां सरकार यह दावा कर रही है इस क्षेत्र के लगभग 40 खान बंद हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं क्षेत्रों में दिन-रात अवैध खनन किया जा रहा है। यह एक बहुत बड़ा विरोधाभास है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तत्काल अवैध खनन पर रोक नहीं लगी, तो वे इस मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय वन मंत्री और केंद्रीय खनन मंत्री से मिलकर इस विषय को रखेंगे। इसके बाद मामला अदालत तक भी जाएगा, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
गागराई ने कहा कि फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
