ज्ञापन में कहा गया कि कभी पत्रकारों पर हमले किए जाते हैं तो कभी बिना जांच के झूठे प्रकरण दर्ज कर उन्हें परेशान किया जाता है, जिससे लोकतंत्र की नींव कमजोर होती है। पत्रकार संगठनों ने सिवनी कोतवाली में दर्ज अपराध क्रमांक 899/2025 का उल्लेख करते हुए बताया कि उक्त प्रकरण में स्थानीय समाचार संपादक अजय ठाकरे को भी आरोपी बनाया गया है, जबकि वे घटना स्थल पर केवल समाचार कवरेज के उद्देश्य से मौजूद थे। ज्ञापन में मांग की गई कि ठाकरे के विरुद्ध दर्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जांच पूर्ण होने से पूर्व उनके परिवार को परेशान न किया जाए तथा पुलिस बल द्वारा भय प्रदर्शित करने जैसी कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। पत्रकारों ने प्रदेश में कार्यरत सभी पत्रकारों, संपादक, संवाददाता, ब्यूरो प्रभारी, स्ट्रिंगर एवं प्रेस फोटोग्राफरों की सुरक्षा हेतु विशेष कानून बनाए जाने, शिकायत मिलने पर राजपत्रित अधिकारी से जांच के बाद ही कार्रवाई किए जाने, तथा बिना जांच एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश, पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर एवं उप पुलिस महानिरीक्षक छिंदवाड़ा को भी प्रेषित की गई है।मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना को पत्र लिखकर पत्रकार अजय ठाकरे का नाम FIR से हटाने का आग्रह किया है। पत्रकारों की आवाज़ दबाने के इस प्रयास की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए, सत्य लिखने पर दमन नहीं — सम्मान होना चाहिए।
