यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 20 फरवरी, 2025 को वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया था। 8,08,736 करोड़ के बजट में 28,478.34 करोड़ रुपए का बजट नई योजनाओं के लिए रखा गया था। बड़े-बड़े ऐलान हुए, विकास को रफ्तार देने के वादे किए गए। अब 11 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश होना है। लेकिन, प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से बीते वर्ष में की गई महत्वपूर्ण घोषणाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतरी हैं। आज पढ़िए बजट की घोषणाएं जो पूरी नहीं हुईं…
आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय नहीं बढ़ा प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाकर 16 से 18 हजार करने की घोषणा की थी। इससे प्रदेश के करीब 1.99 लाख संविदा कर्मचारी लाभान्वित होने का दावा किया गया था। सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए एक निगम के गठन की भी घोषणा की थी। इसका प्रस्ताव कैबिनेट से पारित कर दिया है। निगम का गठन भी हो चुका है। अमृता सोनी को निगम का एमडी (मैनेजिंग डायरेक्टर) बनाया गया है। लेकिन निगम ने अभी कामकाज शुरू नहीं किया है। लिहाजा आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय भी नही बढ़ाया गया है। बेटियों को नहीं मिली स्कूटी वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट में मेधावी बेटियों को स्कूटी देने की घोषणा की थी। इसके लिए सरकार ने बजट में 400 करोड़ का प्रावधान किया था। बीते वर्ष बजट के बाद घोषित इंटरमीडिएट बोर्ड के परिणाम में जिला और प्रदेश स्तर पर टॉप 10 स्थान प्राप्त करने वाली करीब 500 से अधिक मेधावी बेटियों को स्कूटी मिलने का इंतजार है। लेकिन अभी तक स्कूटी नहीं मिली है। 10 जिलों में वस्त्रोद्योग और लेदर पार्क नहीं बने राज्य सरकार ने 10 जिलों में संत कबीर वस्त्रोद्योग पार्क और संत रविदास के नाम पर लेदर पार्क स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक न तो सभी जिलों में वस्त्रोद्योग पार्क बने हैं और न ही लेदर पार्क की स्थापना पूरी हो पाई है। केंद्र सरकार के सहयोग से कानपुर और आगरा में पहले से ही लेदर फुटवियर पार्क स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, बनारस के रमना क्षेत्र में 75 एकड़ भूमि पर संत कबीर टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क का निर्माण किया जा रहा है। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान के अनुसार मऊ, खेमई (अलीगढ़), चुनार (मिर्जापुर) और रायबरेली में टेक्सटाइल पार्क के लिए कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जबकि शेष जिलों में अभी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है। AI सिटी भी नहीं बनी प्रदेश सरकार ने प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI के क्षेत्र में एक हब के रूप में विकसित करने की पहल की थी। इसके लिए लखनऊ में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिटी की स्थापना करने की घोषणा हुई थी। साइबर सिक्योरिटी में टेक्नोलॉजी रिसर्च ट्रांसलेशन पार्क की नई योजना बजट में शामिल की थी। AI सिटी और साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी रिसर्च ट्रांसलेशन पार्क की योजना भी कागजों में ही चल रही है। एक्सप्रेस-वे के लिए प्लान तैयार नहीं सरकार ने चार नए एक्सप्रेस-वे बनाने का वादा किया था। पहला एक्सप्रेस-वे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को गंगा एक्सप्रेस-वे से जोड़ते हुए हरदोई और फर्रुखाबाद तक जाना था। दूसरा गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी और चंदौली होते हुए सोनभद्र से जोड़ने का प्रस्ताव था। तीसरा मेरठ से हरिद्वार तक एक्सप्रेस-वे विस्तार का था। चौथा बुंदेलखंड से रीवा तक एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना थी। यूपीडा के एसीईओ हरि प्रताप शाही ने बताया, रीवा वाला प्रस्ताव रद्द हो गया है। हरदोई से फर्रखाबाद के लिए टेंडर जारी करने की कार्रवाई चल रही है। जमीन अधिग्रहण चल रहा है। मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेस-वे विस्तार के लिए का एलाइमेंट पर काम चल रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे को मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली होते हुए सोनभद्र तक ले जाने के लिए एलाइमेंटन के स्तर पर कार्रवाई चल रही है। चारों प्रोजेक्ट में धरातल पर काम शुरू होने से एक साल से अधिक समय लग सकता है। होमगार्ड्स और ग्राम चौकीदार को नहीं मिला बीमा प्रदेश सरकार ने बजट में होमगार्ड्स, PRD जवानों, ग्राम चौकीदारों, शिक्षामित्रों, बेसिक शिक्षा विभाग के अनुदेशकों और मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज देने की घोषणा की थी।
हाल ही में सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए कैशलेस बीमा योजना को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है, लेकिन होमगार्ड्स, ग्राम चौकीदार और पीआरडी जवानों के लिए अब तक बीमा सुविधा लागू नहीं हो सकी है। कामगार श्रमिक अड्डे भी नहीं बने सरकार ने बजट में सभी जिलों में कामगार श्रमिक अड्डे बनाने की घोषणा की थी। इनमें कैंटीन, पेयजल, स्नानघर और शौचालय सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जानी हैं। अभी तक जिलों में श्रमिक अड्डे बनना शुरू नहीं हुए हैं। सरदार पटेल जनपदीय आर्थिक क्षेत्र नहीं बना सरकार ने प्रत्येक जिले में विशेषताओं और सम्भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अखंड भारत के शिल्पी लौहपुरुष सरदार पटेल जनपदीय आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की थी। इसमें अलग-अलग जिलों में अलग-अलग सेक्टर से जुड़े क्षेत्रों को विकसित किया जाना है। हाल ही में सरकार ने इसके लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन अभी किसी भी जिले में पार्क स्थापित नहीं हुआ है। ———————- ये खबर भी पढ़ें…
UP सरकार पिछले बजट का आधा ही खर्च कर पाई:पेंशन-भत्तों के लिए 100% रकम दी, हेल्थ-इंफ्रा में कटौती, पढ़िए लेखा-जोखा वित्तमंत्री सुरेश खन्ना 11 फरवरी को यूपी विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। चुनावी साल में सरकार क्या सौगात देगी, यह तो बजट वाले दिन ही पता चलेगा। लेकिन, पिछले बजट का भी लेखा-जोखा जरूरी है। पिछला बजट पेश हुए 11 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। प्रदेश सरकार ने स्वीकृत बजट 865079.46 करोड़ में से महज 470835.97 करोड़ (54.42 फीसदी) ही विभागों को जारी किया है। पढ़ें पूरी खबर
यूपी में स्कूटी मिली न आउटसोर्स कर्मियों को राहत:AI सिटी से एक्सप्रेस-वे तक के लिए भी इंतजार, बजट के बड़े वादे अधूरे
