पानीपत जिले में आबकारी विभाग के अधिकारियों और एक शराब ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन की हेराफेरी और गंभीर धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मतलौडा तहसील के गांव नारा निवासी व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक (SP) पानीपत को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी और उनके भतीजे के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग कर करोड़ों रुपए के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने एक नामजद आरोपी समेत आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। साथ ही मामले की आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। जमाबंदी निकलवाने पर खुला धोखाधड़ी का राज पीड़ित चांद सिंह(47) के अनुसार, उन्हें इस बड़े घोटाले का पता तब चला जब वे वर्ष 2024 में अपनी जमीन की जमाबंदी निकलवाने तहसील कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि उनकी जमीन की जमाबंदी पर ‘लाल स्याही’ का नोट लगा हुआ है। जांच करने पर पता चला कि दोषी कुलबीर (निवासी गांव जोशी) ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर वर्ष 2020-2021 के लिए शराब के ठेके की सिक्योरिटी से संबंधित फर्जी फॉर्म-75 तैयार किए थे। पुराने दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल और फर्जी हस्ताक्षर शिकायत में बताया गया है कि दोषी कुलबीर ने वर्ष 2017 में अपने ठेके के लिए विभाग में जमा करवाई गई वर्ष 2014-2015 की पुरानी जमाबंदी का दुरुपयोग किया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित चांद सिंह और उनके भतीजे सतेन्द्र के जाली हस्ताक्षर किए गए। चांद सिंह का दावा है कि विभाग के अधिकारियों ने कुलबीर को नाजायज फायदा पहुंचाने के लिए उनके नाम से फर्जी डिमांड नोटिस जारी किए, जो उन्हें कभी भेजे ही नहीं गए। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट ने की पुष्टि धोखाधड़ी का पुख्ता सबूत जुटाने के लिए पीड़ित ने निजी तौर पर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट श्री एसके वर्मा से अपने हस्ताक्षरों का मिलान करवाया। एक्सपर्ट की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि फर्जी फॉर्म-75 पर किए गए हस्ताक्षर, चांद सिंह और उनके भतीजे के असली हस्ताक्षरों से बिल्कुल मेल नहीं खाते हैं। भ्रष्टाचार और सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप पीड़ित ने एसपी को दी शिकायत में स्पष्ट कहा है कि यह करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने दोषी कुलबीर और संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और जालसाजी की धाराओं के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रशासनिक हलचल इस शिकायत के बाद आबकारी विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कार्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
पानीपत में आबकारी विभाग में करोड़ों का घोटाला:फर्जी हस्ताक्षरों से बनाए फॉर्म-75, रिटायर्ड कर्मी की जमीन पर लगा ‘लाल स्याही’ का नोट, FIR दर्ज
