दरअसल बांबे उच्च न्यायालय ने कहा था कि ये मसला लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है और सभी उम्र के लोगों के लिए गंभीर और संभावित स्वास्थ्य के खतरे से जुड़ा हुआ है। उच्च न्यायालय ने पहले बीएमसी को बांबे में किसी भी पुराने विरासत वाले कबूतरखाने को गिराने से रोक दिया था। साथ ही कबूतरों को दाना डालने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया था।
याचिका पल्लवी पटेल, स्नेहा विसारिया और सविता महाजन ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि बीएमसी ने कबूतरों को खाना खिलाने वाले स्थानों को गैर-कानूनी तरीके से गिराना शुरु कर दिया था। याचिका में कहा गया था कि बीएमसी का ये काम पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उल्लंघन है।
