कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन, भारत माता पूजन एवं विधा की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की वंदना से हुई। कार्यक्रम की संयोजिका एवं अध्यक्ष सरिता देवी ने आगत अतिथियों का स्वागत चंदन, फूलमाला एवं अंगवस्त्रम से किया तत्पश्चात कार्यक्रम के बारे में विस्तृत रूप से बताया। कार्यक्रम में अतिथि परिचय एवं स्वागत अर्चना श्रीवास्तव, प्रस्तावना मेनका वर्मा, प्रश्नोत्तरी सुधा मिश्रा एवं मंच संचालन ममता कुमारी चौबे ने किया।
कार्यक्रम में बालिकाओं ने लोक संस्कृति पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित मधु शर्मा ने कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण, समाज में बढ़ रही अपसंस्कृति एवं नारी सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारी में असीम संभावनाएं हैं जिन्हें महिला सशक्तिकरण के इस दौर में पहचानने और संवारने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश और विश्व की वर्तमान परिस्थितियों और चुनौतियों के समाधान एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत एवं समर्थ भारत की अवधारणा को धरातल प्रदान करने हेतु मातृ शक्ति की सप्तशक्ति जाग्रत कर ही समाज परिवर्तन का संकल्प पूर्ण हो सकता है।
कुटुम्ब प्रबोधन के बारे में बताया कि कुटुम्ब प्रबोधन जिसका शाब्दिक अर्थ है कि परिवार के सभी सदस्यों को साथ लेकर भारतीय संस्कृति, परम्परा और मूल्यों को पुनर्जीवित करना, जिससे एक सशक्त और बेहतर समाज का निर्माण की दिशा में अग्रसर हो सके। वहीं मधु ने कहा कि सप्तशक्ति संगम जैसे कार्यक्रम महिलाओं को नेतृत्व और संगठन शक्ति के विकास का मंच प्रदान करता है।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन सरिता देवी ने किया। इस मौके पर विधा मंदिर के चम्पारण विभाग निरीक्षक ललित कुमार यादव, शिशु मंदिर रक्सौल के संरक्षक डॉ . प्रो. राजकिशोर सिंह, विधालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष प्रो. जगदीश प्रसाद,उपाध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी, सचिव अवधेश सिंह, कोषाध्यक्ष गिरधारी लाल श्रीवास्तव, शिशु मंदिर रक्सौल के प्रधानाचार्य राजू कुशवाहा, आचार्य रमेश कुमार पाण्डेय, गगनदेव पाठक, आचार्य सुमित कुमार, चकिया शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य रंजन कुमार, अनिल कुमार चौधरी, घोड़ासहन शिशु मंदिर प्राचार्य प्रकाश ठाकुर एवं युगल किशोर पाण्डेय समेत कई अभिभावक एवं सैकड़ो महिलाएं उपस्थित रहीं।
