एमपी में आरटीई लॉटरी खुलेगी कल:1.78 लाख में से 1 लाख 22 हजार बच्चों को निजी स्कूलों में मिलेगा प्रवेश

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शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत प्रदेश में निजी स्कूलों में बिना शुल्क प्रवेश के लिए 2 अप्रैल को दोपहर 2 बजे ऑनलाइन लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया में इस बार करीब 1 लाख 78 हजार 714 पात्र बच्चों को शामिल किया है। जिन्हें प्रदेश के लगभग 22 हजार निजी स्कूलों की 1 लाख 22 हजार 551 सीटों पर प्रवेश मिलेगा। लॉटरी का सीधा प्रसारण राज्य शिक्षा केंद्र के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। लॉटरी के बाद अभिभावक आरटीई पोर्टल पर अपने बच्चे को आवंटित स्कूल की जानकारी देख सकेंगे और प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगे। ऑनलाइन लॉटरी का होगा सीधा प्रसारण राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा गुरुवार को दोपहर 2 बजे आरटीई के तहत ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। इसका लाइव प्रसारण यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा, जिससे अभिभावक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से देख सकेंगे। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर 2:15 बजे के बाद अभिभावक आरटीई पोर्टल पर लॉगिन कर अपने बच्चे को आवंटित स्कूल की जानकारी ले सकेंगे। साथ ही आवंटन पत्र डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। एसएमएस से भी मिलेगी जानकारी राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से अभिभावकों को सुविधा देने के लिए आवंटित स्कूल की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इससे अभिभावकों को तुरंत जानकारी मिल सकेगी और उन्हें बार-बार पोर्टल चेक करने की आवश्यकता नहीं होगी। आरटीई अधिनियम के तहत गैर-अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं। इन सीटों पर बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। प्रदेश में यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है, जिसमें आवेदन से लेकर स्कूल आवंटन तक सभी चरण डिजिटल माध्यम से पूरे किए जाते हैं। 3 से 15 अप्रैल तक चलेगी एडमिशन प्रक्रिया लॉटरी में चयनित बच्चों के अभिभावकों को 3 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच संबंधित स्कूल में जाकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस दौरान अभिभावकों को आवश्यक दस्तावेज लेकर स्कूल में उपस्थित होना होगा, ताकि समय सीमा के भीतर बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होती है और पात्र बच्चों को निष्पक्ष तरीके से स्कूल आवंटन सुनिश्चित किया जाता है।