उन्होंने यह भी कहा कि वो एनडीए के विरोध में होते हुए भी उपराष्ट्रपति के चुनाव में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए धनखड़ में साथ खड़ा रहे और उन्हें वोट किया। मगर उन्होंने पद पाने के पश्चात अपने अंदर की महत्वाकांक्षाओं को कई बार उजागर भी किया।
सांसद ने कहा कि निश्चित तौर पर उन्हें सार्वजनिक रूप से अपने ऊपर बने भारतीय जनता पार्टी के दबाव को लेकर दिए गए इस्तीफे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए । अन्यथा छह महीने बाद दिए गए स्पष्टीकरण को जनता सस्ती लोकप्रियता का नाम दे देगी।
