समीक्षा में पाया गया कि 40 जनपदों ने रैन बसेरों के 278 स्थल चिन्हित कर लिए हैं। जबकि शेष 35 जनपदों में चिन्हांकन और जिओ-टैगिंग कार्य लम्बित है। अलाव के लिए 42 जनपदों में 1517 स्थल चिन्हित किए गए हैं, लेकिन 33 जनपदों में कार्य अधूरा है। राहत आयुक्त ने 24 घंटे के भीतर सभी स्थल चिन्हित कर पोर्टल पर फीडिंग करने का निर्देश दिया। उन्होंने रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए विशेष एप का उपयोग सुनिश्चित करने और डेटा अपलोड में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने पर जोर दिया।
राहत आयुक्त ने रैन बसेरों में पर्याप्त रोशनी, पेयजल, अलाव, कम्बल, साफ-सफाई और पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिए। महिलाओं की सुरक्षा और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ नियमित निरीक्षण करने का आदेश दिया गया।
फसल क्षति की राहत राशि वितरण में देरी करने वाले जनपदों गाज़ीपुर, महोबा, मिर्जापुर, उन्नाव, झांसी, बलिया, मथुरा, मुजफ्फरनगर, चंदौली, हरदोई, जालौन, आगरा और अमरोहा के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई। बहराइच, हरदोई, सोनभद्र, प्रयागराज, उन्नाव, कासगंज, अमेठी, लखीमपुरखीरी, कानपुर नगर और कुशीनगर के अधिकारियों को भी तत्काल राहत राशि वितरित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में रिक्त पद भरने, बाढ़ और भूकम्प संवेदनशील जिलों में मॉक एक्सरसाइज के लिए धनराशि का उपयोग प्रमाणित करने तथा आपदा मित्र परियोजना के क्रियान्वयन हेतु पोर्टल पर वालेंटियर की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, आपदा विशेष और आपदा प्रबंधन के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
