मामले से जुड़े अधिवक्ता पीसी भंडारी व टीएन शर्मा ने बताया कि प्रदेश की पांच बिजली कंपनियोंं ने जेईएन की भर्ती की थी। लेकिन बाद में इन इंजीनियरों को यूडीएच विभाग में भेज दिया। जबकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। वहीं ये नियुक्तियां राजस्थान सेवा नियम व आरएपीएसएआर एक्ट का उल्लंघन है। केवल सरप्लस होने पर ही एक निगम से दूसरे निगम में नियुक्ति का नियम है। लेकिन ऐसा कोई प्रावधान,नियम या एक्ट नहीं है जिसमें किसी निगम या बोर्ड से सीधे ही सरकार में नियुक्ति दी जा सके। वहीं नगरीय विकास विभाग में इनकी नियुक्ति में जिन नियमों का उल्लेख किया है उनके अनुसार इनको यूडीएच में समाहित नहीं कर सकते। ऐसे में ये नियुक्तियां पिछले दरवाजे से दी हैं और इनमें नियमों का पालन नहीं किया है। अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षकारों से जवाब मांगा और राज्य सरकार से पूछा है कि इन अफसरों को किन नियमों से बिजली कंपनी से यूडीएच में समाहित किया गया है।
बिजली कंपनी के इंजीनियरों को नगरीय विकास विभाग में नियुक्ति देने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
