गुरुरुग्राम जिले में हफ्ता नहीं देने पर वसूली गैंग द्वारा ऑटो ड्राइवरों पर हमला किया जा रहा है। इफ्को चौक मेट्रो स्टेशन और बस स्टैंड पर लोहे की राड से हमला किया गया। जिसमें दो ऑटो ड्राइवर घायल हो गए हैं। इनमें से एक ऑटो ड्राइवर की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद से शहर के ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों में इस संगठित वसूली गैंग का खौफ फैल गया है। यह गैंग रोजाना 50 रुपए के हिसाब से ऑटो ड्राइवरों से हफ्ता वसूल रहा है और न देने पर मारपीट की जा रही है। इस संबंध में सेक्टर 29 और सेक्टर 14 थाने में पीड़ित ऑटो ड्राइवरों द्वारा शिकायत दी गई है। ऑटो स्टैंड पर आकर वसूली करते हैं ताजा मामला इफको चौक मेट्रो स्टेशन के निकट का है, जहां बुधवार शाम को एक ऑटो ड्राइवर को हफ्ता न चुकाने पर लोहे की रॉड से बुरी तरह घायल कर दिया गया। पीड़ित ड्राइवर रिंकू मूल रूप से रेवाड़ी जिले का निवासी है और वर्तमान में सेक्टर 12 की राजीव कॉलोनी में रहता है। उसने बताया कि गैंग के सदस्य नियमित रूप से उनके स्टैंड पर आकर पैसे मांगते हैं। विरोध करने पर मारपीट रिंकू ने अस्पताल से बातचीत में बताया कि हर दिन 50 रुपये देने पड़ते हैं, नहीं तो मारपीट शुरू हो जाती है। मैंने विरोध किया, तो उन्होंने लोहे की रॉड से हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई। डर के मारे चुप रहते हैं ड्राइवर यह घटना अकेली नहीं है। बस स्टैंड के पास भी गैंग ने कुछ ऑटो ड्राइवरों और एक पुराने प्रधान के साथ मारपीट की। ड्राइवरों का आरोप है कि गैंग स्थानीय स्तर पर संगठित होकर ऑटो स्टैंड्स पर कब्जा जमाए हुए है और बिना हफ्ता दिए काम नहीं करने देते। कई ड्राइवर डर के मारे चुप रहते हैं, लेकिन अब कुछ ने आवाज उठाई है। रोजाना हो रही मारपीट की घटनाएं ऑटो ड्राइवरों का कहना है कि ऐसी घटनाएं रोजमर्रा की हो गई हैं। एक ड्राइवर ने बताया कि हम गरीब लोग हैं, रोज कमाकर परिवार चलाते हैं। 50 रुपए रोज मतलब महीने में 1500 रुपए अतिरिक्त खर्च। पुलिस अगर सख्ती नहीं दिखाएगी, तो हमारा जीना मुहाल हो जाएगा। ऑटो ड्राइवरों से हफ्ता वसूलने के लिए संगठित सिंडिकेट………… प्रमुख ऑटो स्टैंड पर कब्जा: गैंग के सदस्य इफको चौक मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, इफ्को चौक, हुडा सिटी सेंटर, सेक्टर 12, 14 और 29 जैसे व्यस्त इलाकों में ऑटो स्टैंड पर नियमित रूप से पहुंचते हैं। वे चालकों को प्रोटेक्शन मनी के नाम पर रोज 50 रुपये मांगते हैं। विरोध करने पर लोहे की रॉड, लाठी-डंडों से हमला कर डराते हैं। इससे चालक मजबूर होकर पैसे देते हैं और उनकी कमाई का हिस्सा छिन लिया जाता है। पुराने प्रधानों से भी मारपीट: वसूली गैंग में लीडर, फील्ड में काम करने वाले गुंडे और लोकल जानकारी देने वाले शामिल होते हैं। वे ऑटो स्टैंड को जोन में बांटकर कंट्रोल करते हैं। एक इलाके में विरोध हुआ तो पूरे सिंडिकेट की ताकत दिखाते हैं। पूर्व यूनियन लीडर या पुराने प्रधान को भी निशाना बनाया जाता है, ताकि कोई संगठित विरोध न हो सके। रोजाना वसूली का सिस्टम: इन्होंने 50 रुपये प्रतिदिन का फिक्स्ड रेट रखा गया है, जो महीने में 1,500 रुपये बनता है। यह रकम छोटी लगती है, लेकिन 35 से 40 हजार ऑटो हैं, इनमें से अगर 10 हजार से भी वसूली की जाती है तो यह रकम रोजाना पांच लाख बनती है। मिलीभगत से चल रहा गिरोह: ऑटो ड्राइवरों का आरोप है कि गैंग इतने खुले आम काम करता है कि उन्हें पुलिस का भी खौफ नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोकल स्तर पर इन्हें संरक्षण मिला हुआ है। शिकायतें थानों में दर्ज होती हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। जिससे गैंग का हौसला बढ़ता है। गुरुग्राम में ई-रिक्शा और ऑटो से जुड़े एक्सटॉर्शन के कई मामले पहले भी सामने आए हैं। ड्राइवरों की मजबूरी: ज्यादातर चालक गरीब, प्रवासी हैं। वे रोज कमाकर परिवार चलाते हैं। पुलिस में शिकायत करने पर बदले की आशंका रहती है, इसलिए कई चुप रहते हैं। गैंग इसी कमजोरी का फायदा उठाता है। मामले की जांच में जुटी पुलिस रिंकू की शिकायत पर सेक्टर 29 थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि बस स्टैंड इलाके के अन्य प्रभावित ड्राइवरों ने सेक्टर 14 थाने में शिकायत दर्ज कराई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है। यह वसूली का संगठित रैकेट लगता है, जिसे जल्द समाप्त किया जाएगा।
गुरुग्राम में ऑटो ड्राइवरों पर वसूली गैंग का हमला:हफ्ता नहीं देने पर मारी लोहे की रॉड, दो घायल, एक की हालत गंभीर
