यूपी में 2 दिन बारिश का अलर्ट, मौसम बिगड़ेगा:40 की स्पीड में हवाएं चलेंगी, बांदा सबसे गर्म, 31°C पहुंचा पारा

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यूपी में ठंड विदा होने की तरफ बढ़ रही है। सिर्फ सुबह और रात में ही ठंड पड़ रही है। दिन में कड़ी धूप निकल रही है। लेकिन, प्रदेश में फिर से मौसम बिगड़ने वाला है। मौसम विभाग ने प्रदेश में 2 दिन बारिश का अलर्ट जारी किया है। यही नहीं, पहाड़ों में हो रही बर्फबारी से भी पारा गिरने का अनुमान है। लखनऊ मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया- पश्चिमी विक्षोभ फिर से सक्रिय हो रहा है। इससे 17 और 18 फरवरी को प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलेंगी। रविवार की बात करें तो बांदा सबसे गर्म शहर रहा। अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। 30 डिग्री के साथ झांसी दूसरे नंबर पर रहा। मौसम विभाग का कहना है कि 18 फरवरी के बाद अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होगी। फरवरी के अंत तक यूपी से ठंड पूरी तरह विदा हो जाएगी। बारिश हुई तो फसलों को होगा नुकसान
अगर तेज हवा के साथ बारिश हुई तो गेहूं और सरसों की फसल गिर सकती है। इससे दाने कमजोर हो जाएंगे और पैदावार पर असर पड़ेगा। इसलिए मौसम विभाग ने किसानों को अलर्ट रहने को कहा है और खुले स्थानों पर कटी हुई फसलों को रखने से मना किया है। अब तक कैसा रहा मौसम
नोएडा स्थित स्काईमेट वेदर के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत बताते हैं- यूपी में 2 साल के मुकाबले इस बार कम ठंड रही। दिसंबर-जनवरी में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहे। 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच 36 फीसदी की कमी देखी गई। इस बार एक्सट्रीम ठंड देखने को नहीं मिली। ला-नीना एक्टिव न होने की वजह से ठंड ज्यादा नहीं पड़ सकी। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश भी यही बताते हैं कि इस बार प्रदेश में सर्दियों के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की सक्रियता भी कम रही। इससे ठंड के सीजन में बारिश भी सामान्य से कम हुई। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव बताते हैं- अब ठंड अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। अभी वसंत का मौसम चल रहा है। अगले 2-3 हफ्तों तक मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान सुबह और रात में हल्की ठंड रहेगी, जबकि दोपहर में धूप थोड़ी तेज महसूस होगी। वेदर एक्सपर्ट महेश पलावत के अनुसार, 18 फरवरी के आसपास यूपी के कई जिलों में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। इसमें हाथरस, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, ललितपुर और झांसी जैसे इलाके शामिल हैं। अब पढ़िए कब से भीषण गर्मी पड़ेगी और कितना पहुंचेगा पारा 1- मार्च के पहले हफ्ते से गर्मी की शुरुआत
बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव कहते हैं- मार्च के पहले हफ्ते से मौसम पूरी तरह बदलने लगेगा और गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा। दिन और रात, दोनों के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। मार्च के आखिरी हफ्ते तक यूपी के कई जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 2- मई-जून में 42 से 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा
मनोज श्रीवास्तव कहते हैं- अप्रैल में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मई-जून में कई जिलों में अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह है कि केवल दिन ही नहीं, रात के समय भी गर्मी से राहत कम मिलेगी और उमस बनी रहेगी। हालांकि, यह काफी हद तक अल नीनो की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर अल नीनो की स्थिति बनी रहती है या मजबूत होती है, तो गर्मी की हालत और ज्यादा गंभीर हो सकती है। 3- हीट वेव ज्यादा दिनों तक चलेगी
यूपी समेत देशभर में मार्च से मई के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। इसमें सिर्फ मार्च महीने में पूरे देश में अधिकतम और न्यूनतम, दोनों तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। साथ ही, हीट वेव के दिनों की संख्या भी सामान्य से ज्यादा रहेगी। सिर्फ पूर्वोत्तर भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में आने वाले महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हीट वेव के दिन सामान्य रहेंगे। 4- गर्मी से फसलों को होगा नुकसान
बीएचयू के कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च महीना किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर रबी की फसल पर पड़ेगा। खासतौर गेहूं पर। गर्मी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। इससे पैदावार कम होगी।। पीके सिंह के अनुसार, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है। फसलों पर तनाव पड़ता है। 5- समय से पहले बढ़ती गर्मी, हालात और बिगड़ेंगे
लखनऊ यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष ध्रुवसेन सिंह के अनुसार, साल 2026 में समय से पहले गर्मी बढ़ गई है। हीट वेव की घटनाएं ज्यादा बार और लंबे समय तक हो सकती हैं। शहरी इलाकों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं। ये सभी कारण मिलकर तापमान को लगातार ऊपर की ओर धकेल रहे हैं। 2025 में फरवरी में टूटा था 125 साल का रिकॉर्ड
1901 के बाद यह पहली बार था, जब फरवरी-2025 में औसत न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा था। साल 1901 वही समय है, जब से भारत समेत दुनिया भर में तापमान का लेखा-जोखा रखा जाता है। दूसरी ओर, 1901 के बाद से तीसरी बार जनवरी-2025 सबसे गर्म महीना रहा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा। पृथ्वी का औसत तापमान उस साल 1.55 डिग्री सेल्सियस बढ़ा था। दुनियाभर में भी पड़ेगी भीषण गर्मी एनवायरनमेंट और क्लाइमेट डाटा यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 दुनिया के अब तक के 4 सबसे गर्म सालों में शामिल हो सकता है। अनुमान है कि दुनिया का औसत तापमान पुराने समय की तुलना में 1.4 से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकता है। इससे साफ पता चलता है कि क्लाइमेट चेंज की रफ्तार अभी भी कम नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों का लगातार बढ़ना और अल नीनो जैसी प्राकृतिक वजहें धरती का तापमान बढ़ा रही हैं। इसका सीधा असर लोगों की सेहत, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। अब ला-नीना और अलनीनो के बारे में जानिए ला-नीना: ला-नीना ऐसा जलवायु पैटर्न है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। इसमें समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा ठंडा हो जाता है। जब यह पानी भाप बनकर ऊपर उठता है, तो बादल बनते हैं। कई जगहों पर बारिश होती है। भारत में बारिश कम होगी या ज्यादा, ठंड पड़ेगी या गर्मी बढ़ेगी, यह काफी हद तक ला-नीना पर ही निर्भर करता है। साल- 2025 में ठंड शुरू होने से पहले मौसम विभाग ने अंदाजा लगाया था कि ला-नीना एक्टिव हो सकता है। इससे उत्तर भारत में ठंड ज्यादा पड़ने की उम्मीद थी। लेकिन, प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति बनी ही नहीं। इसलिए ठंड में खास बढ़ोतरी नहीं हुई। ठंड के मौसम की शुरुआत में अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA ने भी कहा था कि सर्दियों में करीब 60 प्रतिशत संभावना है कि ला-नीना एक्टिव होगा। मार्च तक इसका असर भी दिखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अलनीनो- अल नीनो हो या ला नीनो, ये दोनों ही भौगोलिक घटनाएं दुनिया के सबसे बड़े महासागर प्रशांत महासागर में होती हैं। जब-जब अल नीनो आता है, तब-तब भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है। इसकी वजह से देश के कई राज्यों में सूखा पड़ जाता है। हालांकि, अल नीनो को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने फिलहाल सिर्फ आशंका जताई है। उनका कहना है कि अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो देश में भयंकर गर्मी पड़ सकती है। —————————- ये खबर भी पढ़िए- ‘क्रिकेटर का 15 साल का रिश्ता जाति के चलते टूटा’: भाई बोला- लड़की के घरवाले धमकाते थे; नोएडा में प्रेमिका की हत्या करके जान दी थी
सुमित से रेखा शादी नहीं करना चाहती थी। करीब 1 साल पहले दोनों अलग हो गए थे। रेखा ने इस बारे में घरवालों को भी बता दिया था। इसके बावजूद सुमित उसे बार-बार फोन करता था। परेशान होकर रेखा ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया था। यह कहना है नोएडा की रेखा के पिता देव चंद्र कांत का, जिनकी बेटी की लाश कार में प्रेमी के साथ मिली थी। उन्होंने कहा- 13 फरवरी को रेखा ने अपनी मां को फोन पर बताया था कि वह 15 मिनट में घर पहुंच रही है और उसके लिए खाना ना बनाना। लेकिन वह घर नहीं लौटी। अगले दिन दोपहर में उसकी डेड बॉडी मिली। अब पढ़िए पिता से बातचीत…