रेलवे टिकट क्लर्क ने किया 17 लाख का गबन:हिसार में तैनात, जेब में डालता रहा जुर्माने-किराए की राशि, ऑडिट में पर्दाफाश

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हिसार में तैनात रेलवे का टिकट क्लर्क ने 17 लाख रुपए का गबन किया है। उसने यात्रियों से वसूला किराया और जुर्माना रेलवे में जमा करवाने के बजाय खुद की जेब में डालता रहा। जब रेलवे की तरफ ऑडिट हुई, तब पूरा प्रकरण पकड़ में आया। रेलवे जीआरपी पुलिस ने हिसार जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक प्रेमचंद की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच भिवानी जीआरपी चौकी इंचार्ज ASI सुरेंद्र कुमार को सौंपी गई है। रेल अधिकारियों के अनुसार हिसार रेलवे स्टेशन पर एक वरिष्ठ रेलवे कर्मचारी द्वारा लाखों रुपए के सरकारी राजस्व के गबन का यह पहला बड़ा मामला है। राजकीय रेलवे पुलिस ने सीनियर सीसीटीसी के पद पर कार्यरत बिहार के मधेपुरा के क्लर्क हरिकिशन के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। रेलवे के खाते में जमा होनी थी राशि आरोपी हरिकिशन फ्री रोस्टर में टिकट चेकिंग के कार्य पर तैनात था। जांच में सामने आया कि 1 जून 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच उसने यात्रियों से जुर्माने और किराए के रूप में कुल ₹17 लाख 610 रूपए की राशि एकत्रित की। नियम के अनुसार यह पैसा रेलवे के खाते में जमा होना था, लेकिन आरोपी ने 61 ईएफटी (EFT) रिटर्न की यह भारी-भरकम राशि न तो सीटीआई कार्यालय हिसार में जमा कराई और न ही यातायात लेखा कार्यालय, जोधपुर भेजी। उसने इस सरकारी धन का व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग किया। कैसे पकड़ में आया मामला इस वित्तीय अनियमितता का खुलासा तब हुआ, जब संबंधित शाखा के सीनियर अधिकारी द्वारा ईएफटी रिटर्न के संबंध में डेबिट मेमो जारी किए गए। सीटीआई हिसार की रिपोर्ट और आंतरिक लेखा परीक्षा (ऑडिट) के दौरान पाया गया कि रिकॉर्ड में दर्ज राशि और वास्तविक जमा राशि में बड़ा अंतर है। जब आरोपी द्वारा बार-बार राशि जमा नहीं कराई गई, तो विभाग ने इसे आपराधिक गबन मानते हुए पुलिस को लिखित शिकायत दी, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत केस दर्ज किया गया। फाइल तैयार कर पुलिस की जांच शुरू ASI सुरेंद्र कुमार मामले की फाइल तैयार कर तफ्तीश शुरू कर चुके हैं। वे रेलवे स्टेशन हिसार जाकर घटना से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेंगे। पुलिस उन 61 ईएफटी (EFT) रिटर्न, डेबिट मेमो और सीजर मेमो को आधिकारिक तौर पर साक्ष्य के रूप में जब्त करेगी, जिनका उल्लेख शिकायत में किया गया है। स्टेशन अधीक्षक प्रेमचंद और ऑडिट करने वाले अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे, ताकि गबन की पुष्टि हो सके। चूंकि एफआईआर में आरोपी हरिकिशन का नाम दर्ज है, पुलिस उसे पूछताछ के लिए हिरासत में ले सकती है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि गबन की गई ₹17 लाख 610 रूपए की राशि कहां है और क्या इसे रिकवर किया जा सकता है।