हिसार के गांव भैणी बादशाहपुर में फर्जी NIA (नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी) अधिकारी बनकर रेड का मामला 4 महीने बाद उजागर हुआ है। हालांकि इस संबंध में पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की मगर मामले को छिपाए रखा। इस बीच आरोपी लगातार कोर्ट से अग्रिम बेल के लिए प्रयास करते रहे। अब आरोपियों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से भी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। भैणी बादशाहपुर के सुबे सिंह ने दैनिक भास्कर एप को बताया कि 6 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे एक सफेद रंग की ब्रेजा गाड़ी (HR 06AN-7827), जिस पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगा था, उनके घर आई। गाड़ी से तीन युवक उतरे, जिनमें से दीपक कुमार (निवासी बधावड़) ने पासपोर्ट ऑफिस का फर्जी आई-कार्ड दिखाया और खुद को दिल्ली NIA का स्टाफ बताया। आरोपियों ने सुबे सिंह के बेटे रोहित पर ऑनलाइन सट्टा खेलने का झूठा आरोप लगाया और उसे दिल्ली ले जाकर मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी। मुकदमा न दर्ज करने के नाम पर आरोपियों ने पहले 2 लाख रुपये मांगे, लेकिन अंत में डरे हुए किसान से 80 हजार रुपये वसूल कर फरार हो गए। इस मामले में उकलाना थाना प्रभारी एसआई कुलदीप का कहना है कि पुलिस फरार दोनों आरोपियों की तलाश कर रही है। हम लगातार रेड कर रहे हैं। इस तरह आरोपियों ने रेड की… पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान
इस हाई-प्रोफाइल मामले में उकलाना पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदेह के घेरे में रही है। पुलिस ने केवल एक आरोपी दीपक को गिरफ्तार किया है, जबकि रवि और जयवीर जैसे नामजद आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। आरोपी रवि कुमार खुद को होमगार्ड बताता था, जिससे यह अंदेशा और गहरा जाता है कि कहीं उसे विभाग के ही किसी व्यक्ति का संरक्षण तो प्राप्त नहीं था। किसान से सरेआम दिन-दहाड़े ठगी होने और गाड़ी का नंबर होने के बावजूद पुलिस महीनों तक मुख्य साजिशकर्ताओं को दबोचने में नाकाम रही, जिसके कारण आरोपियों को हाईकोर्ट जाने तक का समय मिल गया। विस्तार से पढ़िए कैसे घटना को अंजाम दिया… पीड़ित ने पुलिस पर सवाल उठाए, कहा- हिरासत में लेकर छोड़ा मेरे बेटे ने एक आरोपी को पहचाना तब पता चला : पीड़ित सूबे सिंह ने बतया कि जब हमारे घर एनआईए की रेड पड़ी तो पत्नी घबरा गई। आरोपियों ने इसी का फायदा उठाया। आरोपियों ने 2 लाख रुपए की डिमांड की मगर हमारे पास इतने रुपए घर में नहीं थे। मैंने पत्नी की टूम व दूसरे गहने गिरवी रखकर बाकि रुपए का इंतजाम किया। इसी दौरान मेरे बेटे ने एक आरोपी को पहचान लिया और मुझे बताया कि यह बधावड़ गांव का दीपक है। दूसरा होमगार्ड बरवाला थाने का है। इस पर शक हुआ और हमने थाने में शिकायत दी। पुलिस ने तीनों को पकड़ा, दो को छोड़ दिया : पुलिस ने उसी दिन रात को तीनों को हिरासत में ले लिया और मुझे थाने में निशानदेही के लिए बुलाया। मैंने थाने जाकर तीनों की पहचान कर ली। उनकी गाड़ी से एक लाख 15 हजार रुपए बरामद हुए थे। पुलिस ने कहा कि आपके इसके बाद पुलिस ने कहा आप सुबह आ जाना एफआईआर दर्ज कर लेंगे। जब मैं सुबह गया तो उनमें से दो युवक गायब थे। पुलिस ने साठ-गांठ करके रात को होमगार्ड को निकाल दिया और हसनगढ़ गांव के जसवीर को निकाल दिया। मैंने कहा आपने दो आरोपी छोड़ दिए तो पुलिस ने कहा कि वो तेरा काम नहीं है। तेरे साढ़े 74 हजार ले जाओ मैंने कहा कि साढ़े पांच हजार रुपए इसमें कम है। मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मैंने डीएसपी-एसपी से गुहार लगाई : इसके बाद मैं बरवाला डीएसपी के पेश हुआ मगर उन्होंने भी मेरी सुनवाई नहीं की। इसके बाद मैं हिसार एसपी से मिला तो उन्होंने शिकायत उकलाना थाने में मार्क कर दी, मगर आज तक आरोपी पकड़े नहीं गए हैं। अब आरोपी जमानत के लिए प्रयास कर रहे हैं। मुझे डर है कि वह परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। घटना के बाद से ही मेरी पत्नी सदमे में है और उसका हिसार से इलाज चल रहा है।
हिसार में फर्जी NIA अधिकारियों की रेड:4 महीने बाद मामला उजागर, पीड़ित का दावा- पुलिस ने दो आरोपियों को छोड़ा, इसमें एक होमगार्ड
