करनाल के कुंजपुरा स्थित गेहूं भंडारण केंद्र में हुए करोड़ों रुपए के स्टॉक घोटाले की जांच एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला केवल गेहूं की चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभाग की जांच प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता को जांच से दूर रखना और संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारियों को ही जांच टीम में शामिल करना चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ता की एफसीआई गोदाम में एंट्री बैन कर दी गई है। इससे निष्पक्ष जांच को लेकर शंका और गहरी हो गई है। घोटाले की शिकायत और शुरुआती कार्रवाई
कुंजपुरा गेहूं गोदाम में स्टॉक में गड़बड़ी को लेकर गांव खराजपुर विकास शर्मा ने विभाग को शिकायत दी थी। जांच के दौरान गोदाम में बाहर लगे चट्टों में करीब 68 लाख रुपए मूल्य का गेहूं कम पाया गया था। इस मामले में कुंजपुरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। शुरुआती जांच के बाद इंस्पेक्टर अशोक शर्मा और सब इंस्पेक्टर संदीप को सस्पेंड कर दिया गया था। पहली कमेटी और दोबारा गठन की कहानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यालय की ओर से 08 जुलाई 2025 को एक कमेटी गठित की गई थी, जिसे पूरे स्टॉक की जांच के आदेश दिए गए थे। इस कमेटी में शिकायतकर्ता को भी जांच के दौरान मौके पर शामिल किया गया था। बाद में कुछ सदस्यों के ट्रांसफर और कुछ के निलंबन के चलते इस कमेटी का पुनर्गठन जरूरी बताया गया। इसी कड़ी में पत्र क्रमांक 254 के जरिए 12 जनवरी 2026 को नई जांच कमेटी गठित की गई। नई जांच कमेटी में कौन-कौन शामिल
जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक, करनाल ने चार सदस्यीय नई कमेटी बनाई है। इसमें एएफएसओ मुकेश गुप्ता करनाल, इंस्पेक्टर नवीन असंध, इंस्पेक्टर रणधीर इंद्री और सब इंस्पेक्टर अमजद को सदस्य बनाया गया है। इस कमेटी को कुंजपुरा केंद्र पर भंडारित गेहूं (2025-26) के उचित प्रबंधन, सेग्रिगेशन और फ्यूमिगेशन कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही खराब स्थिति में पाए गए गेहूं का प्राथमिकता के आधार पर भारतीय खाद्य निगम को सफल प्रेषण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। जांच कमेटी के सदस्य पर ही उठे सवाल
शिकायतकर्ता विकास शर्मा का आरोप है कि जिस एएफएसओ मुकेश गुप्ता को नई कमेटी में शामिल किया गया है, उनकी भूमिका पहले से ही संदेह के घेरे में रही है। विकास शर्मा का कहना है कि गेहूं स्टॉक में गड़बड़ी के समय इंस्पेक्टर अशोक शर्मा, सब इंस्पेक्टर संदीप और एएफएसओ मुकेश गुप्ता की ड्यूटी लगी हुई थी। अशोक शर्मा और संदीप को सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन मुकेश गुप्ता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि मुकेश गुप्ता 20 प्रतिशत रिकवरी भरने के हकदार बताए गए, इसी वजह से न तो उन्हें नोटिस दिया गया और न ही सस्पेंड किया गया। हर 15 दिन की रिपोर्ट और मंडी बिक्री का सवाल
विकास शर्मा का कहना है कि नई जांच कमेटी में मुकेश गुप्ता को ही हेड बनाया गया है, जिनके अंडर में स्टॉक की रिपोर्ट हर 15 दिन में उच्चाधिकारियों को भेजी जानी है। उनका आरोप है कि अगर रिपोर्ट नियमित भेजी गई और कागजों में स्टॉक पूरा दिखाया गया, जबकि हकीकत में गेहूं मंडी में बेचा गया, तो यह गंभीर अनियमितता है। सवाल यह भी है कि अगर गेहूं मंडी में बिका है, तो गोदाम के रिकॉर्ड में स्टॉक पूरा कैसे दिखाया गया। विकास शर्मा ने इसे ‘दूध की रखवाली के लिए बिल्ली को बैठाने’ जैसा बताया। शिकायतकर्ता को जांच से बाहर रखने पर नाराजगी
विकास शर्मा ने डीएफएससी को पत्र लिखकर मांग की थी कि एएफएसओ मुकेश गुप्ता को जांच कमेटी से हटाया जाए और उन्हें भी जांच में शामिल किया जाए। इसके उलट विभाग ने शिकायतकर्ता की ही एफसीआई गोदाम में एंट्री बैन कर दी और निर्देश दिए कि वे गोदाम के अंदर नहीं जाएंगे और जांच से दूरी बनाए रखेंगे। विकास शर्मा का आरोप है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अंदर लगे चट्टों में गेहूं की कमी दोबारा सामने न आ सके और मामला मीडिया की सुर्खियों में न आए। पुलिस जांच में क्या सामने आया
विकास शर्मा के मुताबिक, पुलिस जांच में यह खुलासा हो चुका है कि मंडी से खरीदा गया गेहूं गोदाम तक पहुंचने से पहले ही बेच दिया गया था। इस स्टॉक के वेरिफिकेशन और खरीद के समय रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एएफएसओ मुकेश कुमार की थी। ऐसे में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी पर पहले से सवाल खड़े हैं, इसके बावजूद उन्हें जांच कमेटी में शामिल किया गया है। हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
विकास शर्मा ने साफ कहा है कि यदि उन्हें जांच में शामिल नहीं किया गया और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच के दौरान चट्टों और बोरियों में गेहूं कम न मिले, तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। मामले ने एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली और जांच की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
करनाल के कुंजपुरा गेहूं घोटाले की जांच पर उठे सवाल:गोदाम में शिकायतकर्ता की एंट्री बैन; विवादों में रहे AFSO जांच कमेटी में शामिल
