प्राचार्य एन.के. देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि, राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 1969 में महात्मा गांधी की शताब्दी वर्षगांठ पर हुई थी, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है। इसका आदर्श वाक्य मैं नहीं, आप हमें निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। एनएसएस केवल संगठन नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सशक्त माध्यम है, जिसकी संभावनाएँ स्वच्छता, ग्राम सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में हैं।
उन्होंने बताया कि, एक पेड़ माँ के नाम अभियान माँ के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। यदि हर विद्यार्थी प्रतिवर्ष एक पेड़ माँ के नाम से लगाये और उसकी देखभाल करे तो आने वाली पीढ़ियों को हरियाली और स्वच्छ वातावरण का अमूल्य उपहार मिलेगा। कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों नृत्य, गीत एवं नाटक के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं स्वयंसेवकों ने मिलकर वृक्षारोपण किया। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत प्रत्येक प्रतिभागी ने अपनी माँ को समर्पित कर पौधारोपण करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
