उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि जनता मूर्ख नहीं है। जब पूरे प्रदेश में बेरोज़गारी बढ़ी, महंगाई चरम पर गई, भ्रष्टाचार के मामले सामने आए, और प्रशासनिक अव्यवस्था ने विकास को पंगु कर दिया तब सरकार चुप थी। लेकिन जैसे ही जनता सवाल पूछने लगी, सरकार ने जश्न, विजन और जनसंकल्प जैसे नाम गढ़कर अपनी असफलताओं को ढकने का प्रयास शुरू कर दिया। दोष छुपाने के लिए कार्यक्रमों के नाम बदलने से सच नहीं बदलता।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को पहले अपने तीन साल का हिसाब देना चाहिए—कौन सा वादा पूरा हुआ? किस क्षेत्र में सुधार हुआ? कौन सी नई योजना लागू हुई? कौन सा बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हुआ? सरकार के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है, इसलिए अब रैलियों के नाम बदलकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। राकेश जमवाल ने स्पष्ट कहा कि जनता सब जानती है, सब समझती है और अब इस सरकार की दिखावटी नौटंकियों का कोई असर नहीं होने वाला। हिमाचल की जनता तीन साल की बरबादी को भूलने वाली नहीं—विजन और संकल्प की नौटंकी से कांग्रेस को अब बचना नहीं है।
