हरियाणा की तहसीलों में म्यूटेशन का अंबार:1.45 लाख इंतकाल पेंडिंग; पटवारी-तहसीलदार सब सुस्त, सरकार ने डेढ़ महीने का समय दिया

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हरियाणा सरकार ने प्रदेश में संपत्तियों की रजिस्ट्री को ‘पेपरलेस’ बनाकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश की है, लेकिन ‘ऑटो-म्यूटेशन’ (स्वतः इंतकाल) का सपना अभी भी फाइलों में अटका हुआ है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में करीब 1.45 लाख म्यूटेशन के मामले लंबित हैं। हैरानी की बात यह है कि इस देरी की वजह तकनीकी नहीं, बल्कि पटवारी, कानूनगो और तहसीलदारों के स्तर पर हो रही सुस्ती है। हालात को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को निर्देश दिए हैं कि पेंडिंग मामलों को जल्द से जल्द निपटाएं। इसके लिए डेढ़ महीने का समय तय किया गया है। ताकि आने वाले समय में म्यूटेशन की प्लानिंग पर काम हो सके। 65 हजार मामले पटवारी-कानूनगो लेवल पर पेंडिंग सूबे के 22 जिलों में 143 तहसील-उप तहसील और 7104 गांव हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के ब्योरे के अनुसार, पिछले सप्ताह तक करीब 80,182 मामलों में ऑनलाइन ब्योरा ही दर्ज नहीं हो सका है। पटवारियों और कानूनगो के स्तर पर स्वीकृति के इंतजार में अभी करीब 65,221 मामले लंबित हैं।
जनवरी तक 2.43 मामले थे पेंडिंग
इस वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह तक करीब 2.43 लाख इंतकाल लंबित थे। इसलिए राजस्व विभाग ने जनवरी के प्रत्येक शनिवार को विशेष कैंप लगाकर करीब 98 हजार से अधिक लंबित मामलों को निपटा दिया। क्या है म्यूटेशन और क्यों है जरूरी? म्यूटेशन, जिसे स्थानीय भाषा में इंतकाल, दाखिल-खारिज या नामांतरण भी कहते हैं, वह आधिकारिक प्रक्रिया है जिसके जरिए राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में पुराने मालिक की जगह नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। स्वामित्व का प्रमाण: यह कानूनी रूप से मालिकाना हक साबित करने के लिए अनिवार्य है। विवाद से बचाव: भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचने के लिए रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन कराना जरूरी है। राजस्व वसूली: सरकारी करों (जैसे संपत्तिकर) की वसूली के लिए विभाग इसी रिकॉर्ड का उपयोग करते हैं। इसलिए जरूरी है म्यूटेशन पंजीकरण (रजिस्ट्री) के बाद ही पटवारी या तहसीलदार के माध्यम से इंतकाल की प्रक्रिया को पूरा कराया जाता है। कानूनी रूप से स्वामित्व भी साबित करने और किसी भी विवाद से बचाव के लिए भी इंतकाल अनिवार्य होता है। जल्द शुरू होगा ‘ऑटो-म्यूटेशन’ पोर्टल भू-अभिलेख विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल ने संकेत दिए हैं कि अगले एक-डेढ़ महीने में पेपरलेस रजिस्ट्री पोर्टल को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा। उन्होंने कहा कि … हमारा लक्ष्य है कि रजिस्ट्री होते ही इंतकाल अपने आप (Autometically) हो जाए। लेकिन इसके लिए पहले पुराने पेंडिंग मामलों का निपटारा करना अनिवार्य है। अपग्रेडेशन के बाद पोर्टल स्वतः ही म्यूटेशन प्रक्रिया को पूरा कर देगा, जिससे जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।