आप तो बस रजिस्ट्री करवाइए, नामांतरण और डायवर्शन सब मैं करवा दूंगा…आपका प्रॉफिट होगा तो ही आपको अच्छा लगेगा। हम भी आपके साथ काम करेंगे…हमारी कॉलोनी में से एक प्लॉट ले लेना और उसे डेवलप करा देना। बड़ी ही बेशर्मी से ये बात कहने वाले भोपाल के नीलबड़ क्षेत्र के पटवारी तरुण श्रीवास्तव हैं, जो ये डील करते हुए भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हुए हैं। रातीबड़ के ही पटवारी भंवर सिंह सोलंकी ने तो भास्कर रिपोर्टर को ऑफर दिया कि मुझे एक फार्म हाउस देना और विधायक जी को प्लॉट। एक तरफ भोपाल जिला प्रशासन अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है तो दूसरी तरफ प्रशासन की अहम कड़ी पटवारी ही अवैध कॉलोनी के इस खेल में शामिल हैं। ब्रोकर, बिल्डर और पटवारी का ये गठजोड़ राजधानी के आसपास की हजारों एकड़ कृषि भूमि को अवैध कॉलोनियों में बदल रहा है। भास्कर टीम ने एक हफ्ते तक विदिशा रोड, रातीबड़ में अवैध कॉलोनियों का सौदा करने वाले एजेंट्स पर नजर रखी। अवैध कॉलोनी बेचने वाले ऐसे 4 एजेंट्स और उनके बिल्डर्स से बात की। सभी ने खुफिया कैमरे में कहा कि एनओसी नहीं मिलेगी, लेकिन रजिस्ट्री और डायवर्शन हो जाएगा। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर ने पटवारियों से मुलाकात की तो उन्होंने पूरे सिस्टम को मैनेज करने का तरीका बताया। पढ़िए रिपोर्ट… भोपाल-विदिशा रोड पर अवैध कॉलोनियों की ‘सब्जी मंडी’
हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम जब एक आम ग्राहक बनकर भोपाल से विदिशा रोड पर निकली, तो अवैध कॉलोनियों का सच परत-दर-परत खुलता चला गया। हर 100-200 मीटर पर आकर्षक नामों वाली कॉलोनियों के बोर्ड लगे थे और उनके नीचे एजेंट ग्राहकों की तलाश में खड़े थे। 10 किलोमीटर के दायरे में ही ऐसे सैकड़ों एजेंट मिले जो एक ही तरीके से काम कर रहे थे – झूठे वादे और फर्जी सपने। इनके पास न NoC थी न ही TCP की मंजूरी। इसके फिर भी रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्शन का भरोसा दे रहे थे। विदिशा रोड पर हमारी पहली मुलाकात ‘वैष्णो धाम फेज-2’ के ब्रोकर शुभम माली से हुई। भास्कर रिपोर्टर ने बायर बनकर ब्रोकर से बात की… रिपोर्टर: मैं भोपाल से हूं, रेसिडेंशियल प्लॉट लेना चाहता हूं।
शुभम: मिल जाएगा साहब! 675 से लेकर 1125 स्क्वायर फीट तक के प्लॉट हैं। रेट 1500 रुपए प्रति स्क्वायर फीट है। शुभम हमें कॉलोनी के अंदर ले गया, जहां कुछ मकान बन चुके थे और सीमेंट-कांक्रीट की सड़कें बनी थीं। उसने एक प्लॉट दिखाते हुए कहा, ‘ये प्लॉट ले लो, इसके आगे 10 फीट जगह और 10×12 फीट की कार पार्किंग फ्री मिलेगी।’ जब हमने उस ‘फ्री पार्किंग’ वाली जगह को ध्यान से देखा तो वह एक 60 फीट चौड़ी सड़क थी। रिपोर्टर: यह तो पूरी सड़क है, इसे पार्किंग कैसे बता रहे हो?
शुभम: भैया, यही तो खासियत है। यह पुरानी विदिशा रोड है। सरकारी नक्शे में कटी हुई है। सरकार ने आगे से सीधा बायपास निकाल दिया तो अब यह रोड कभी नहीं बनेगी। हमने इसे डेवलप करके कॉलोनी के लिए पार्किंग बना दी। सरकार फालतू में डबल रोड पर पैसे क्यों खर्च करेगी? सरपंच और बिजली वालों को रिश्वत दो सबकुछ हो जाता है
ब्रोकर शुभम हमें पास ही अपनी दूसरी कॉलोनी ‘वैष्णो धाम फेस-1’ में ले गया। उसने बताया कि यहां लगभग सारे प्लॉट बिक चुके हैं और यहां भी वही 1200 रुपए का भाव है। रिपोर्टर: यह आपकी ही कॉलोनी है?
शुभम: यह हमारी ही कॉलोनी है फेस वन है। इस कॉलोनी में टोटल पांच प्लॉट खाली है। जिसमें से चार प्लॉट 20x 50 के हैं। लास्ट वाला 1081 स्क्वायर फीट का है। कुल मिलाकर के लगभग 6 हजार 500 स्क्वायर फीट है। रिपोर्टर: इसका क्या रेट है?
शुभम: इसमें आप एक प्लॉट लो या 2 प्लॉट अगर आप पूरा लेना चाहते हो तो हम पूरा भी आपको दे देंगे। अभी इसकी रेट 1200 रुपए है ,बाकी आप टेबल पर बैठेंगे तो बातचीत में रेट ऊपर नीचे हो जाएगा। हम तो बैठे हैं, इसे बेचने के बाद दूसरा खरीदेंगे। बगल में इतने सारे खेत हैं, सब जगह प्लॉटिंग ही प्लॉटिंग हो रही है। हम भी नई जगह खरीदेंगे और प्लॉटिंग करेंगे। कॉलोनी न तो टीएंडसीपी अप्रूव्ड न ही एनओसी
जब हमने कॉलोनी के कानूनी दस्तावेजों के बारे में पूछा, तो शुभम ने तुरंत अपने मालिक दीपक मैथिल को फोन लगा दिया। दीपक ने हमें मिलने के लिए ऑफिस बुलाया। जब हम उसके भानपुर स्थिति ऑफिस में पहुंचे तो उसने बिना किसी लाग-लपेट के अवैध कॉलोनियों के बिजनेस का पूरा सच उगल दिया। रिपोर्टर: प्लॉट चाहिए था, हम लोकेशन देख कर आए
दीपक:आपने हमारी दोनों लोकेशन देखी है, फेस वन में चार प्लॉट खाली है। रिपोर्टर:टीएनसी अप्रूव्ड मिलेगा?
दीपक: विदिशा रोड पर एक भी सोसाइटी आपको टीएनसी अप्रूव्ड नहीं मिलेगी, सुखी सेवनिया पर कुछ कॉलोनियां है जो टीएनसी अप्रूव्ड है। हमारे सारे प्रोजेक्ट में रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्शन है NoC किसी में नहीं मिलेगी, अगर आपको NoC चाहिए तो पंचायत वाली मिल सकती है। रिपोर्टर: वैष्णो धाम -2 में पीछे प्लॉट लेने हो तो.. क्या रेट में मिलेंगे?
दीपक: इस कॉलोनी में पीछे 60 फीट पुराना विदिशा रोड है। यह शासकीय भूमि है रोड के लिए, इसलिए हमने भी कॉलोनी में रोड डेवलप करके छोड़ दिया है ताकि हमारे काम आए। हमने इस पार्किंग के लिए छोड़ दिया है। भविष्य में सड़क बने या नहीं बने,लेकिन हमने जगह उसको बना दिया है ताकि काम आ सके। रिपोर्टर: भविष्य में अगर सड़क चौड़ी होती है तो दिक्कत नहीं होगी ?
दीपक: भविष्य में यह कभी भी चौड़ा नहीं होगी, क्योंकि यह रोड आगे जाकर इसी में रोड में मिल रही है। भविष्य में अगर यह रोड बनेगी तो भी कोई दिक्कत नहीं है हमने पहले ही उसको रोड बनाकर डेवलप कर दिया है। इस पर पक्का मकान नहीं बना रहे हैं। रिपोर्टर: मुझे कृषि भूमि चाहिए प्लॉटिंग के लिए सस्ती..।
दीपक: खेती वाली जमीन मिलेगी 500 से 1 हजार रुपए स्क्वायर फीट के हिसाब से। फार्म हाउस के हिसाब से बड़ी जमीन मिलेगी। रिपोर्टर: इस टाइप की कॉलोनी में कितने रिस्क है?
दीपक: रिस्क तो कुछ नहीं है, लेकिन कुछ डेवलपर्स ने इमेज खराब रखी है। हम 1100 से 1200 रुपए स्क्वायर फीट के हिसाब से प्लॉट दे रहे हैं, तो भी लोगों को महंगा लगता है। अगर इसकी परमिशन लेकर हम 4000 रुपए में बेचेंगे तो कोई भी लेने के लिए तैयार नहीं होगा। लोग बोलेंगे यहां लेकर करेंगे क्या? रिपोर्टर: इमेज कैसे खराब की है?
दीपक: एक-एक प्लॉट की चार-चार बार रजिस्ट्री कराना, कॉलोनी को डेवलप किए बिना ही प्लॉट बेचकर भाग जाना। जब एक प्लॉट रहेगा और चार लोग लड़ाई करेंगे तो गवर्नमेंट परेशान होगी। लेकिन हमारा तो साफ सुथरा काम है। प्राइवेट जमीन हमने भी पैसा देकर खरीदी है, ऐसा तो है नहीं कि हमने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। आपको गलत प्लॉट बेचकर मैं जाऊंगा कहां? आज जो भी समस्या है, उसे सॉल्व कर दूंगा। सारे प्लॉट बिक गए, लेना हो तो जल्दी ले लो
विदिशा रोड पर एक और अवैध कॉलोनी में प्लॉट बेचने वाले सौरभ मीना से हुई। सौरभ ने ब्रोशर देते हुए बताया कि मेन रोड से कॉलोनी आधार किमी अंदर है। पूरा कवर्ड कैंपस है। बिजली-पानी की सारी सुविधा मिलेगी। रिपोर्टर: क्या रेट है ?
सौरभ: 1000 हजार रुपए स्क्वायर फीट। 600 से 700 स्क्वायर फीट के प्लॉट हैं। भास्कर रिपोर्टर ने जब खसरा नंबर मांगा तो सौरभ ने बिल्डर गौरव मीणा से बात करवाई… रिपोर्टर: कॉलोनी का डायवर्शन और NoC है क्या ?
गौरव: रजिस्ट्री नामांतरण डायवर्शन सब है, पर NOC नहीं मिलेगी। ऐसी सोसाइटी के रेट हाई होते हैं। हम अस्थाई बिजली कनेक्शन देंगे, पानी के लिए बोरवेल करके देंगे। सीसी रोड और कवर्ड कैंपस मिलेगा। रिपोर्टर: आपकी सोसाइटी में लोग रहने लग गए?
गौरव: हां, कॉलोनी भर गई है। लोग भी रहने लगे हैं, आप भी जल्दी ले लो। पटवारी और पुलिस वालों ने इन्वेस्टमेंट के हिसाब से खरीदे
भास्कर रिपोर्टर रातीबड़ में पटेल कॉलेज के सामने ओरछा धाम कॉलोनी में पहुंचा। जहां पर रियल स्टेट ब्रोकर शुभम मारग से बातचीत हुई। उसने बताया कि प्लॉट का रेट 1300 रुपए स्क्वायर फीट है और अब केवल 15 प्लॉट बचे हैं। रिपोर्टर: जमीन के पीछे तो खेती हो रही है?
शुभम: हां यह भी खेती वाली जमीन है। रिपोर्टर: बिजली कनेक्शन कैसे मिलेगा?
शुभम: डीपी तो हम लगा देंगे और फिर आपको प्राइवेट कनेक्शन लेना पडेगा। बीच में आपको प्लॉट नहीं मिलेंगे यह सारे प्लॉट ट्रिपल आईआईटी वालों ने खरीद रखे हैं। लास्ट में कुछ प्लॉट बचे हैं, वो आप ले सकते हैं। रिपोर्टर: कॉलोनी में किन लोगों ने प्लॉट खरीदे हैं?
शुभम: बहुत सारे लोगों ने लिए हैं। एक पटवारी मैडम और पुलिस वाले समेत बहुत सारे लोगों ने लिए हैं। पटवारी और पुलिस वाले इन्वेस्टमेंट के लिए लेकर खरीद लेते हैं। इस पूरे खेल की सबसे अहम कड़ी सरकारी कर्मचारी, यानी पटवारी हैं। इनके बिना कृषि भूमि का नामांतरण और डायवर्सन संभव नहीं है। भास्कर टीम ने डमी रियल एस्टेट कारोबारी बनकर नीलबड़ और रातीबड़ के पटवारियों से संपर्क साधा। हमने नीलबड़ के पटवारी तरुण श्रीवास्तव से एक कॉलोनी काटने के लिए मदद मांगी। तीन मुलाकातों में उसने पूरे सिस्टम को ‘मैनेज’ करने का तरीका बता दिया। पहली मुलाकात: एनओसी नहीं मिलेगी, डायवर्शन करवा देंगे
भास्कर रिपोर्टर की पटवारी तरुण श्रीवास्तव से पहली मुलाकात नीलबड़ स्कूल में हुई। यहां बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ… रिपोर्टर: नीलबड़ में हमने कुछ जमीन देखी है जहां पर कॉलोनी काटना चाहते हैं ? तो सोचा पहले आपसे बात कर लेता हूं, यहां अभी क्या रेट चल रहे हैं?
तरुण: अभी तो नीलबड़ में कलेक्टर गाइडलाइन और रेट सेम ही चल रहे है 1500 के आसपास का। अंदर रेट अलग है। आप खसरा नंबर दे दो, मैं पता कर लेता हूं। यहां एक ऐसी जमीन है जहां सीलिंग का बोर्ड लगा हुआ है। वो सब देखना पड़ेगा, बाकी कोई दिक्कत नहीं है। रिपोर्टर: डायवर्शन और एनओसी का काम आपको ही करवाना है?
तरुण: NoC तो यहां नहीं मिलेगी। डायवर्शन करवा देंगे। ले-आउट उस हिसाब से बनाना पड़ेगा। दूसरी मुलाकात: प्रॉपर चैनल से काम करोगे तो दिक्कत नहीं
भास्कर रिपोर्टर ने नीलबड़ की एक जमीन जिसका खसरा नंबर 63/2/1 65/1 64/2 है वो तरुण श्रीवास्तव को भेज दी। साथ ही लोकेशन भी शेयर की। तरुण ने रिपोर्टर को लोकेशन पर बुलाया। जमीन देखकर तरुण ने कहा कि जमीन का बटान हुआ है या नहीं इसका पता करना पड़ेगा। रिपोर्टर: आपके स्तर पर तो कोई दिक्कत नहीं आएगी?
तरुण: हमारे स्तर पर तो कोई दिक्कत नहीं आएगी, एक बार कागज देख लेते हैं। जो कुछ भी होगा सब क्लियर कर लेंगे। रिपोर्टर: एनओसी और डायवर्शन सब आपको करवाना है।
तरुण: करवा देंगे, एक बार आप रजिस्ट्री ले लीजिए बाकी सब करवा देंगे। रिपोर्टर: कुछ बिल्डर्स ने कहा कि एनओसी और डायवर्शन में दिक्कत आती है।
तरुण: दिक्कत तो तब आती है। जब व्यक्ति सोचता है कि सब कुछ हम ही कर लेंगे। प्रॉपर चैनल के साथ काम करोगे तो कोई दिक्कत नहीं आएगी। तीसरी मुलाकात: मेरा भी एक प्लॉट निकाल देना
नीलबड़ स्कूल के बाहर हुई इस मुलाकात में तरुण श्रीवास्तव ने अपनी मंशा जाहिर कर दी। रिपोर्टर से कहा कि मुझे एक प्लॉट दे देना, बाकी सब करवा दूंगा। पढ़िए बातचीत… तरुण: आपको आगे तक हमारे साथ काम करना है। आप पता कर लें कि जमीन का बटान हुआ है या नहीं। बाद में मत बोलना कि पटवारी जी आपने फंसा दिया।
रिपोर्टर: कॉलोनी का ले-आउट कैसे बनेगा? तरुण: अरे 5 या 10 हजार रुपए देकर ऑनलाइन वाले से कॉलोनी का ले-आउट बनवा लेंगे। 15 से 20 हजार लगाकर पूरी प्लानिंग कर लेते हैं उसके बाद ही जमीन की डील करते हैं।
रिपोर्टर: ठीक है, मुझे आप पर भरोसा है। तरुण: सबकुछ देखने के बाद फाइनल करेंगे। अभी कुछ लोगों ने 3 एकड़ सरकारी जमीन पर मंदिर बना दिया और दोनों तरफ से प्लॉट काट दिए। मैंने कॉलोनी के लोगों से बोला कि ये क्या किया? (हंसते हुए).. किया है तो एक प्लॉट मेरा भी काट दो। वो बोले कि आपके राजस्व के एक अधिकारी ने पहले ही प्लॉट लिया है। फिर भी उन्होंने कहा कि हम आपके लिए कुछ करेंगे। तरुण ने कहा कि आपका प्रॉफिट होगा तो ही आपको अच्छा लगेगा। हम भी आपके साथ काम करेंगे। रिपोर्टर ने ऑफर दिया कि आप काम करो- हम भी आपको प्लॉट देंगे, तो तरुण ने हामी भर दी। रातीबड़ के पटवारी भंवर सिंह सोलंकी से मुलाकात उसकी कार में हुई। उसने और भी बड़े ‘मैनेजमेंट’ का रास्ता दिखाया। भंवर सिंह: आप जब काम शुरू करो तो लोकल वालों को मैनेज कर लेना। विधायक जी को खुश कर देना। बाकी तो मैनेज कर लेंगे। आप तो प्लॉटिंग से ज्यादा फार्म हाउस पर जोर दो। 5-10 हजार स्क्वायर फीट के फार्म हाउस बड़े अधिकारी भी खरीद लेंगे। रिपोर्टर: डायवर्शन, नामांतरण हो जाएगा? भंवर सिंह: वो मैं करवा दूंगा। इस इलाके में NoC और TCP नहीं मिलेगी क्योंकि यह कैचमेंट एरिया है। यह सब कच्चे में ही बिकता है। आप तो काम शुरू करो, मैं तो एक फार्म हाउस छांट लूंगा। कलेक्टर बोले- सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे
भोपाल में कट रही अवैध कॉलोनियों को लेकर के भास्कर ने भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से बात की। कलेक्टर ने बताया कि हमने 102 कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के साथ मिलकर के हम जल्द ही इन कॉलोनियों को तोड़ने का काम करेंगे। पीड़ितों का दर्द – ‘हम मिडिल क्लास वालों के साथ धोखा हुआ है’
इस गोरखधंधे का सबसे दुखद पहलू उन हजारों परिवारों की कहानियां हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की पूंजी लगाकर एक घर का सपना देखा था, लेकिन उन्हें मिला सिर्फ धोखा। केस-1: बैरसिया के करारिया क्षेत्र में 130 लोगों को ठगा
आशा पाठक और नामदेव साहू समेत 130 लोगों को करारिया क्षेत्र में होर्डिंग लगाकर प्लॉट बेचे गए। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी हुए। बाद में पता चला कि जमीन किसी और के नाम पर है। अब वे अपनी रकम वापस पाने के लिए कलेक्टर ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं।
केस-2: ब्रोशर में दिखाए सपने से हकीकत बेहद जुदा
कोलार रोड स्थित यूबी सिटी के सुनीत शर्मा कहते हैं, “बिल्डर ने ब्रोशर में गार्डन, क्लब हाउस, CC रोड के सपने दिखाए थे, लेकिन कुछ नहीं दिया। मेंटेनेंस के नाम पर 80 हजार रुपए भी ले लिए। मैं मिडिल क्लास से हूं, दोबारा घर नहीं बना सकता। आज खुद को ठगा हुआ महसूस करता हूं।
केस-3: बारिश में घरों में भरता है पानी
भोजपुर रोड के रिदम पार्क में रहने वाले मुकेश भार्गव बताते हैं, “बिल्डर ने हमें 420 करके प्लॉट बेचे। जो रास्ता दिया था, वह दूसरे की जमीन पर था। वह कोर्ट से केस जीत गया और अब रास्ता बंद है। इस खबर पर आप अपनी राय दे सकते हैं…
पटवारी बोला- एक प्लॉट मुझे और विधायक को देना:अवैध कॉलोनी काटने में सिस्टम की मिलीभगत, भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद एजेंट-बिल्डर
