पानीपत की शाहीन मलिक एसिड अटैक के सभी आरोपी बरी:रोहिणी कोर्ट का फैसला, पुलिस जांच में खामियां; ऑफिस के बाहर फेंका था तेजाब

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हरियाणा के पानीपत की शाहीन मलिक पर हुए एसिड अटैक मामले में कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। बुधवार को दिल्ली की रोहिणी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एडिशनल सेशन जज जगमोहन सिंह ने कहा कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां रहीं, जिसके चलते आरोप साबित नहीं हो सके। 19 नवंबर 2009 की शाम करीब 6 बजे जब वह घर के लिए निकलीं, तभी करनाल जीटी रोड पर उनके ऑफिस के बाहर एक युवक ने उनके ऊपर एसिड फेंका था। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था। इसी केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की खुलेआम बिक्री पर रोक लगा दी थी। पढ़िए कैसे हुआ था एसिड अटैक… हमले के पीछे की साजिश
जांच में सामने आया था कि शाहीन के तत्कालीन बॉस, जो शादीशुदा थे, उन्होंने उन्हें लगातार परेशान किया था। कई हफ्तों तक चली इस प्रताड़ना के बाद मामला इतना बढ़ा कि आरोपी की पत्नी ने कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के एक छात्र के साथ मिलकर शाहीन पर एसिड अटैक की साजिश रची। पानीपत से दिल्ली शिफ्ट हुआ केस
इस घटना के बाद देशभर में जबरदस्त आक्रोश फैला। एसिड अटैक जैसे जघन्य अपराध पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हुई। 2013 में केस की सुनवाई पानीपत से दिल्ली ट्रांसफर की गई। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की बिक्री पर रोक लगाते हुए राज्यों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इसके बाद फिर केस निचली अदालत में आया। शुरू किया खुद का NGO
साल 2021 में शाहीन ने खुद की संस्था शुरू की। इस संस्था का नाम मैंने ‘ब्रेव सोल्स फाउंडेशन’ रखा। एनजीओ और उसके शेल्टर होम, यानी ‘अपना घर’ के जरिए 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स को उनकी सर्जरी करवाने में मदद की है। ‘ब्रेव सोल्स फाउंडेशन’ के जरिए एसिड अटैक सर्वाइवर को सभी प्रकार की मदद दी जाती है। उनकी पढ़ाई के साथ ही उनका इलाज भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि हमारा एक शेल्टर होम है, जिसमें एसिड अटैक सर्वाइवर्स रहती हैं। यहां अलग- अलग राज्यों यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, मुंबई और पश्चिम बंगाल की लड़कियां यहां आ चुकी हैं। हम सिर्फ उनका इलाज ही नहीं बल्कि उनकी कानूनी लड़ाई भी लड़ते हैं। साथ ही, हम उन्हें साइकोलॉजिकल थेरेपी भी देते हैं। अब तक हमने अपने NGO की तरफ से कई लड़कियों की मदद की हैं।