पानीपत की विभिन्न अदालतों ने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने, आदेशों की अवहेलना करने और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामलों में पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की है। अदालतों ने कड़ा संदेश दिया है कि न्याय में देरी या पुलिसिया लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, बीते दिनों कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर तीन पुलिस कर्मियों को कोर्ट सजा भी सुना चुकी है। जिनमें दो महिला पुलिसकर्मी भी शामिल रहीं। तीनों ही मामलों में अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य है, विशेषकर पुलिसकर्मियों के लिए जो कानून के रक्षक हैं। आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पानीपत की अदालतों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर की गई कार्यवाही का विवरण 1. SHO अनिल (थाना सेक्टर-29, पानीपत): कारण: कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए गए एक मामले में शिकायत। कार्रवाई: इस मामले में एसपी पानीपत से रिपोर्ट मांगी गई थी, जिस पर विचार अभी बाकी है। मामले को 7 फरवरी 2026 के लिए स्थगित किया गया है। 2. SHO श्रीनिवास (थाना किला, पानीपत): कारण: अदालत द्वारा पुलिस कार्यप्रणाली पर स्वतः संज्ञान ली गई शिकायत। कार्रवाई: BNSS की धारा 223 के तहत SHO को सुनवाई का अवसर देने के लिए नोटिस जारी किया गया है। साथ ही एसपी पानीपत से इस घटना की रिपोर्ट तलब की गई है। 3. पूर्व SHO राजीव कुमार (थाना तहसील कैंप): कारण: एक मामले में आरोपी को नाबालिग घोषित करने की अर्जी पर रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने में अत्यधिक देरी की। कार्रवाई: अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर देने के बावजूद जवाब पेश नहीं किया गया। अब उनके खिलाफ BNS की धारा 208(b) और 210(b) के तहत आरोप तय कर दिए गए हैं। अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी। 4. हेड कांस्टेबल राजबीर सिंह (समन स्टाफ, पानीपत): कारण: दो गवाहों के खिलाफ जारी जमानती वारंट को तामील करने में लापरवाही बरती और केवल फोन पर सूचना देने की रिपोर्ट लगाकर वापस कर दिया। कार्रवाई: कोर्ट ने इसे वारंट के निष्पादन में जानबूझकर डाली गई बाधा माना. उनके खिलाफ धारा 207 (BNS) के तहत संज्ञान लेते हुए 8 अप्रैल 2026 के लिए समन जारी किए गए हैं। 5. कांस्टेबल अजय: कारण: व्यक्तिगत रूप से समन तामील होने के बावजूद 3 जुलाई 2024 को अदालत में गवाही देने के लिए पेश नहीं हुए। कार्रवाई: कोर्ट ने इसे आदेशों का उल्लंघन और धारा 174 IPC के तहत अपराध माना. उन्हें 19 दिसंबर 2025 के लिए समन किया गया है। 6. कांस्टेबल सिया राम: कारण: न्यायिक आदेशों की अवहेलना से संबंधित मामला। कार्रवाई: आरोपी के खिलाफ धारा 207 BNS के तहत आरोप तय किए गए हैं। उन्हें ₹30,000 के बेल बॉन्ड और बैंक FDR जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होगी। 7. अजय (थाना तहसील कैंप): कारण: नायब कोर्ट के माध्यम से अदालत के संदेश प्राप्त करने के बावजूद संबंधित रिपोर्ट भिजवाने में विफल रहीं। कार्रवाई: एसपी पानीपत द्वारा उनके खिलाफ अलग से विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। गवाही से गैरहाजिर रहने पर इन तीन को हो चुकी सजा न्यायिक आदेशों की अवहेलना और अदालत में गवाही के लिए उपस्थित न होना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ चुका है। पानीपत के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की प्री-लोक अदालत ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में एक उप-निरीक्षक (SI) और दो महिला कांस्टेबलों को दोषी करार देते हुए सजा सुना चुकी है। इन सभी पुलिसकर्मियों ने अदालत के समक्ष अपना जुर्म स्वीकार किया, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी दी है। 1. SI विनोद कुमार (चौकी थर्मल, पानीपत): आरोप: SI विनोद कुमार को ‘स्टेट बनाम गौरव’ नामक एक सत्र मामले में गवाह के रूप में तलब किया गया था। समन की तामील होने के बावजूद वे 29 मई 2024 को अदालत में पेश नहीं हुए। फैसला: अदालत ने इसे धारा 174 आईपीसी के तहत अपराध माना। आरोपी ने प्री-लोक अदालत में अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी और पहली बार अपराध होने के कारण नरम रुख अपनाते हुए उन्हें रिहा कर दिया। 2. महिला कांस्टेबल रोजी (महिला थाना, पानीपत): आरोप: कांस्टेबल रोजी को ‘स्टेट बनाम लकी’ केस में 30 मई 2024 को गवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना था। कानूनी रूप से बाध्य होने के बावजूद वे अनुपस्थित रहीं। फैसला: उनके खिलाफ धारा 174 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया। 26 जुलाई 2024 को लोक अदालत के दौरान उन्होंने बिना किसी दबाव के अपना जुर्म कबूल कर लिया। अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए भविष्य के लिए कड़ी हिदायत देकर मामला निपटा दिया। 3. महिला कांस्टेबल सोनिया (थाना इसराना, पानीपत): आरोप: कांस्टेबल सोनिया को ‘स्टेट बनाम अर्जुन’ मामले में 30 मई 2024 को गवाह के तौर पर बुलाया गया था. वे भी अदालत के आदेशों का उल्लंघन करते हुए पेश नहीं हुईं। फैसला: उनके विरुद्ध धारा 174 आईपीसी के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। अदालत में पेश होकर सोनिया ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार किया। न्यायाधीश ने उन्हें दोषी ठहराया लेकिन पूर्ववृत्त और पहला अपराध देखते हुए चेतावनी देकर रिहा करने के आदेश दिए।
पानीपत कोर्ट का पुलिस पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’:3 SHO समेत 7 कर्मियों पर केस; 3 को सुनाई सजा, आदेशों की अनदेखी की
