बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत पानीपत जिला प्रशासन ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। प्रशासन ने सतर्कता दिखाते हुए दो सगी बहनों को बाल विवाह की बेड़ियों में जकड़ने से बचा लिया। यह कार्रवाई बरसात रोड स्थित सचदेवा गार्डन में की गई, जहां विवाह की रस्में शुरू होने वाली थीं। संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने समाज को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है। कोई भी सामाजिक या आर्थिक मजबूरी कानून से ऊपर नहीं है। प्रशासन ऐसी कुरीतियों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपना रहा है गोपनीय सूचना पर हुई छापेमारी जानकारी के अनुसार, 18 फरवरी को संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता को एक सूचना मिली थी कि सचदेवा गार्डन में कुछ नाबालिग लड़कियों की शादी करवाई जा रही है। सूचना मिलते ही उन्होंने टीम के साथ गार्डन का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान पता चला कि 19 से 22 फरवरी के बीच वहां कुल 6 शादियों की बुकिंग थी। दस्तावेजों में खुला उम्र का राज जब टीम ने शादी वाले परिवारों के दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की, तो होश उड़ाने वाला खुलासा हुआ। एक ही परिवार की दो सगी बहनें, जिनकी शादी की तैयारी चल रही थी, नाबालिग पाई गईं। बड़ी बहन की उम्र 17 वर्ष और छोटी बहन की उम्र मात्र 15 वर्ष मिली। कानूनी रूप से लड़की की शादी के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, जिसके चलते प्रशासन ने तुरंत शादी रुकवा दी। अदालत ने परिजनों से लिया लिखित आश्वासन मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हिमानी गिल की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए परिजनों को कानूनी परिणामों से अवगत कराया। इसके बाद, बेटियों के माता-पिता ने कोर्ट में लिखित हलफनामा दिया कि वे भविष्य में कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे और अपनी बेटियों की शादी 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ही करेंगे। अधिकारियों की सख्त चेतावनी इसके साथ ही, गार्डन संचालकों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में किसी भी विवाह समारोह की बुकिंग से पहले दूल्हा और दुल्हन के आयु प्रमाण पत्र (जैसे आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र) की अनिवार्य रूप से जांच की जाए। नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के विरुद्ध भी कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पानीपत प्रशासन ने सगी बहनों का रुकवाया बाल विवाह:15 और 17 साल की है लड़कियां, कोर्ट ने परिजनों से लिया लिखित आश्वासन
