Bageshwar News: उत्तराखंड के पहाड़ों की पहचान रहा ‘शुद्ध ऊन’ का कारोबार आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. 50 सालों से उत्तरायणी मेले की रौनक बढ़ाने वाले व्यापारी किशन सिंह निर्खुपा का दर्द सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे. कभी 5 दिन में बिकने वाला माल अब 15 दिन में भी नहीं बिक पाता. सस्ते और नकली विकल्पों ने कैसे पारंपरिक कारीगरी की कमर तोड़ दी है और क्यों सरकार की योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गई हैं?
कभी 5 दिन में बिक जाता था सारा माल, आज आधे के भी लाले! आखिर क्यों दम तोड़ रहा है उत्तराखंड का पहाड़ी ऊन उद्योग?
