स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक ने शनिवार को बताया कि जांच में पता चला कि हरसिमरन ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से राजेश सिंह की पहचान से फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। इसी पासपोर्ट के आधार पर वह लखनऊ से बैंकॉक भागा। विदेश पहुंचने के बाद उसने अपने खिलाफ गवाही देने वाले एक गवाह को धमकी दी और 50 लाख रुपये की रंगदारी भी मांगी।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के संपर्क में था। उसके कहने पर वह दुबई, अजरबैजान, रूस और बेलारूस के रास्ते यूरोप जाने की कोशिश करता रहा, लेकिन हर बार पकड़ा गया या वापस भेज दिया गया। उसकी लोकेशन ट्रेस होने पर दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों से संपर्क किया और विदेश मंत्रालय ने उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया।
पुलिस अधिकारी के अनुसार 38 वर्षीय हरसिमरन पर साल 2005 से अब तक 23 गंभीर केस दर्ज हैं। जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के कई मामले शामिल हैं। वह शालीमार बाग थाने का घोषित बदमाश है और जेल में रहने के दौरान कई बड़े अपराधियों के संपर्क में आया था।
पुलिस के अनुसार, उत्तरी जिले में उसने अपना गैंग बनाकर रंगदारी व फायरिंग की कई वारदातों को अंजाम दिया। विरोध करने वालों को धमकाना, मारपीट करना और फायरिंग करना उसके लिए आम बात थी। डिपोर्ट होकर दिल्ली लौटने के बाद उसे स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ जारी है। पुलिस अब उसके विदेशी नेटवर्क, सहयोगियों और फर्जी दस्तावेज गैंग की कड़ी की जांच कर रही है।
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