स्कूल काउंसलर नियुक्ति की जनहित याचिका पर राज्य सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस

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याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए एडवोकेट मोहित सिंह चौधरी ने विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक दबाव, सामाजिक परिवर्तन और स्कूलों में उपलब्ध सहयोगी प्रणालियों की कमी के कारण यह संकट और गंभीर होता जा रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलरों की अनुपस्थिति विद्यार्थियों के समग्र विकास में एक गंभीर बाधा है और यह उनके सुरक्षित, सहयोगी और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है।

द्रोणा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के सचिव उमेद सिंह इंदा ने कहा, यह राजस्थान के बच्चों के लिए ऐतिहासिक दिन है। मानसिक स्वास्थ्य समर्थन को लेकर हमारी वर्षों की पहल को आज न्यायालय की मान्यता मिली है। इस मुद्दे को ले कर संस्थान ने सभी जिला कलेक्टरों, विधायकों एवं सांसदों को ज्ञापन दिए तथा इसी सन्दर्भ में पंद्रह सौ से अधिक पोस्टकार्ड भी मुख्यमंत्री भजनलाल को भेजे गये।

हाईकोर्ट का यह आदेश राजस्थान के स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार द्वारा की जाने वाली आगामी जांच और मूल्यांकन से नीतिगत बदलावों एवं बजट प्रावधानों का रास्ता खुलेगा, जिसके आधार पर स्कूलों में प्रभावी काउंसलिंग सिस्टम विकसित किया जा सकेगा।