भू-विशेषज्ञों का कहना है कि इस इलाके में अवैज्ञानिक तरीके से की जा रही सड़क कटिंग अब गंभीर खतरा बनती जा रही है। बिना भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के सड़क चौड़ीकरण के चलते पहाड़ों की स्थिरता कमजोर हो गई है, जिससे लगातार भूस्खलन हो रहे हैं।
इस मार्ग के बार-बार बंद होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। किसानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि वे प्रतिदिन ₹10,000 से अधिक का नुकसान उठा रहे हैं। वहीं, दिल्ली की मंडियों में सब्जियां और टमाटर पहुंचाने वाले किसान माल सड़ने की चिंता में हैं।
भूस्खलन के चलते कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। एसडीएम शिलाई ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि जब तक मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित न हो जाए, तब तक अनावश्यक रूप से यात्रा न करें।
