किसानों ने कहा कि भारतीय किसान एकता के प्रयासों से 2022 में नेस्ले कंपनी ने दोबारा दूध खरीदना शुरू किया किसानों ने राहत की सांस ली और नेस्ले कंपनी के कहने पर दोबारा से रूट वालों ने नई गाडिय़ां ली, लोगों ने फिर पशु खरीदे, चिलिंग सेंटर व दूध इक्कठा करने के लिए ड्रम, फैट की मशीनों इत्यादि पर लाखों रुपए खर्च किए, लेकिन नेस्ले के अधिकारियों की गलत मंशा के चलते बिना किसी पूर्व सूचना के फिर से 17 मई 2024 को सिरसा जिले से दूध लेना बंद कर दिया गया, जिससे दूसरी बार पशुपालक किसानों के साथ ठगी हुई।
कंपनी ने मोगा में अपना कारोबार शुरू करते समय बताया था कि कंपनी की प्राथमिकता छोटे किसानों व बड़े किसानों से सीधा दूध खरीदने की है, बड़े व्यापारियों से दूध नहीं लिया जाएगा, लेकिन अब बड़े अधिकारियों द्वारा दूध के बड़े कारोबारियों के साथ सांठगांठ करके उनसे लाखों लीटर दूध लिया जा रहा है। कमीशन के चक्कर में बड़े व्यापारियों का निम्न क्वालिटी का दूध भी पास हो जाता है, लेकिन किसानों से सीधे जुड़े हुए छोटे व्यापारियों को बंद करने के लिए उनके दूध के टैंकर रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। यह खेल मोगा व समालखा फैक्ट्रियों में लंबे समय से चल रहा है। दूसरी कंपनियों ने जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें बाहर निकाला था वह अब नेस्ले में मालोमाल हो रहे हैं।
कंपनी के अधिकारियों की बातचीत से यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कंपनी कभी भी बंद हो सकती है, जिससे पशुपालक किसानों का मोटा पैसा नेस्ले कंपनी में फंसने की की संभावना हो सकती है। पहले भी हरियाणा व राजस्थान में किसानों के पैसे फंसे हुए हैं। हम जत्थेबंदी की ओर से तथ्यों के साथ नेस्ले कंपनी के स्विट्जरलैंड हेड ऑफिस को भी अपना शिकायत पत्र भेजेंगे, जिसमें किसानों के साथ हो रही धोखाधड़ी और भ्रष्ट अधिकारियों की पोल खोली जाएंगी।
