अरे… बाबू साहब… लड़कियां चाहिए तो 10 क्या… 50… 100 दिला देंगे… फुल सर्विस (अननेचुरल सेक्स) वाली लड़कियां हैवी बॉडी की आएंगी… जो दुबली-पतली आएंगी… वो फुल सर्विस नहीं देंगी… सिर्फ नेचुरल सेक्स करेंगी… आपको ऐसी लड़कियां देंगे… जिनकी वर्जिनिटी के नाम पर आप कस्टमर से 5 लाख रुपए तक रोज ले सकते हैं… अच्छे-अच्छे पागल हो जाएंगे… एक लड़की पर मुझे 20 हजार इंडियन करेंसी मिलती है…। ये सौदेबाजी कम उम्र की नेपाली लड़कियों की खरीद-फरोख्त के लिए तस्करों से की जा रही है। नेपाली लड़कियों की तस्करी का अब तक सबसे बड़ा खुलासा करने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ की टीम यूपी-नेपाल बॉर्डर से 30 किमी अंदर नेपाल के चंद्रौटा, भैरवा और भुटवल कस्बे पहुंची। यहां पहली बार महिला तस्करों का स्टिंग किया। इन्होंने ऑन-कैमरा बताया कि कैसे नेपाल के छोटे से गांव से लड़कियों को निकालकर यूपी के रास्ते देश के बड़े शहरों और खाड़ी देशों तक पहुंचाते हैं। पिछले साल सितंबर में महज 4 दिन के Gen-Z आंदोलन ने नेपाल का तख्ता पलट दिया। प्रधानमंत्री ओली देश छोड़कर भाग गए। इधर, साल 2025 में यूपी-नेपाल बॉर्डर की 2 चेकपोस्ट से 7,920 लड़कियों को वापस लौटाया, ये देह व्यापार के लिए इंडिया लाई जा रही थीं। इनमें 50% लड़कियां 18 से 28 साल यानी Gen-Z जेनरेशन की थीं। जिस नेपाल में दुनिया का सबसे प्रभावशाली Gen-Z आंदोलन हुआ, वहां की Gen-Z लड़कियों को सेक्स के जाल में कैसे फंसाया जा रहा है? भारत-नेपाल की खुली बॉर्डर से इनकी तस्करी कैसे होती है? दोनों देशों में मानव तस्करी को अंजाम देने वाले लोग कौन हैं? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने सिद्धार्थनगर और महराजगंज जिले से सटी नेपाल बॉर्डर और नेपाल के भीतर के शहरों में जाकर इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… यूपी की राजधानी लखनऊ से 250 किमी दूर सिद्धार्थनगर जिले से सटे नेपाल बॉर्डर पर बढ़नी कस्बा है। इस बॉर्डर पर सुरक्षा की कमान SSB (सशस्त्र सीमा बल) के हाथों में है। हमें सोर्स से पता चला कि इस बॉर्डर से नेपाली लड़कियों की तस्करी होती है। हमने यहां 3 दिन तस्करों और दलालों की सर्चिंग की। हमें यहां एक व्यक्ति मिला। ये बढ़नी में होटल चलाता है और तस्करों के संपर्क में है। हमने उससे मेलजोल बढ़ाया। 3 दिन बाद, जब उसे विश्वास हो गया कि हम होटल खोलने के लिए नेपाली लड़कियां चाहते हैं तो उसने दलाल वरुण सिंह से मिलवाया। वरुण ने हमें नेपाली लड़कियों के रेट, उनके माध्यम से सेक्स रैकेट चलाने का तरीका बताया। रिपोर्टर: हमें कम से कम 10 नेपाली लड़कियों का स्टाफ चाहिए…। वरुण: अरे… बाबू साहब… 10 क्या… 50… 100 दिला दें… लेकिन थाम पाएंगे क्या…? रिपोर्टर: क्या ये लड़कियां सब सर्विस देंगी…? वरुण: मेरी बात सुनिए… जो फुल सर्विस (अननेचुरल सेक्स) की लड़कियां आएंगी… वह थोड़ी हैवी बॉडी की आएंगी… जो पतली-दुबली लड़कियां आएंगी… वह फुल सर्विस नहीं देंगी… वह सिर्फ नेचुरल सेक्स करेंगी…। रिपोर्टर: क्या ये सारी चीजें हमें मैनेज करके चलना पड़ेगा…? वरुण: बहुत से कस्टमर ऐसे आते हैं… जो आपकी लड़कियां खराब कर देंगे… आपको पैसा ही कमाना है तो हम आपको ऐसी लड़कियां देंगे… जिनकी वर्जिनिटी के नाम पर आप 2 लाख… 5 लाख तक रोज कस्टमर से ले सकते हैं… उन्हें देखकर अच्छे-अच्छे पागल हो जाएंगे…। वरुण की बातों से साफ हो गया कि वह तस्करों के संपर्क में है और जितनी चाहेंगे, उतनी लड़कियां तस्करी करा देगा। होटलों में नेपाली लड़कियों से सेक्स रैकेट कैसे चलाया जाता है? इसके जवाब में वरुण ने पूरा सिस्टम समझाया। एक्स्ट्रा सर्विस का जो चार्ज कस्टमर देगा, उसका 30% लड़कियों को देना वरुण: जिस लड़की को आप रिसेप्शन पर बैठाइएगा… उसे अपनी गर्लफ्रेंड जरूर बनाइएगा… उसे हर सुविधा देनी है… फिर वही आपके पास जो लड़कियां होंगी… उनकी लीडर बनेगी… फिर वही… आप जो चाहेंगे… सबको ब्रीफ करेगी… मैं भी बीच में आकर ब्रीफ कर दूंगा… लेकिन वही आपकी ढाल बनेगी। रिपोर्टर: क्यों न आप हमारे बिजनेस पार्टनर बन जाइए…? वरुण: आप कहेंगे तो मैं 1-2 दिन का समय दे दूंगा… लेकिन मैं वहां परमानेंट नहीं रह सकता…। रिपोर्टर: इन लोगों को सैलरी वगैरह कैसे दी जानी रहेगी…? वरुण: मैंने आपको बताया है कि इन्हें 15 से 16 हजार रुपए बताइए… बाकी यह डिपेंड करता है कि आप कितना दे पाएंगे…? रिपोर्टर: बार्गेनिंग नहीं करेंगे क्या… वे लोग…? वरुण: कोई बार्गेनिंग नहीं होगी… आप सैलरी फिक्स कर दीजिए कि मैं इतना दूंगा… इसके बाद एक्स्ट्रा सर्विस पर जो भी आप कस्टमर से ले रहे हैं… उसका 10%, 20% या 30% देना होगा…। रिपोर्टर: लड़कियों को क्या पता होगा… हमने कितना लिया है कस्टमर से…? वरुण: नहीं… जो कस्टमर आएगा… वह लड़कियों को बताएगा ही कि हम इतना देकर आए हैं… लड़कियां बहुत चालाक होती हैं… मान लीजिए आप 5 हजार रुपए में बुकिंग ले रहे हैं… कस्टमर से वह लड़कियां पूछेंगी… कस्टमर बताएगा… उसे आप छुपा नहीं सकते हैं… इससे क्या होगा कि आपका विश्वास खत्म हो जाएगा… आप पहले ही उसे क्लियर कर दो… मान लीजिए आपने 15 हजार रुपए सैलरी फिक्स कर दी… इसके बाद लड़की सारे काम कर रही है… यह नहीं है कि वह सिर्फ वही काम करेगी… वह पोछा भी लगाएगी… रूम सर्विस भी करेगी… किचन में भी काम करेगी… बर्तन भी धो देगी… सारी लड़कियां सारा काम करेंगी…। वरुण की इस बातों से साफ हो गया कि नेपाली लड़कियों का होटलों में सेक्स रैकेट चलाया जाता है। इन नेपाली लड़कियों के कस्टमर के साथ जाने के रेट क्या हैं? इसके जवाब में वरुण ने अलग-अलग रेट कार्ड बताया। रिपोर्टर: लड़कियों का होटल में सर्विस देने का रेट क्या रखना होगा… यहां क्या चलता है…? वरुण: यहां (नेपाल) 2 हजार रुपए शॉट चलता है… एक शॉट मतलब… 10 से 20 मिनट तक होता है… नाइट चार्ज 1 आदमी के साथ 1 लड़की 5500 रुपए… ये नहीं कि 2 आदमी हैं… और 1 लड़की हो… इसके बाद लड़की सुबह-सुबह ही कमरे से निकल जाती है… रातभर आपके साथ रहेगी… कभी-कभी लड़की रात में कमरे से भाग भी लेती है… क्योंकि कोई ऐसा आ गया जो जबरदस्ती कर रहा है… तो ऐसे में आपको उस लड़की का सपोर्ट करना होगा… कस्टमर आएगा… कंप्लेंट करेगा कि लड़की भाग गई… तो आपको लड़की के साथ खड़ा होना पड़ेगा…। अब चलिए नेपाली तस्करों का स्टिंग करते हैं… दलाल वरुण ने हमें नेपाली तस्कर राजेंद्र चौधरी से मिलवाया। राजेंद्र उस समय बढ़नी में था। इसलिए वरुण के फोन करने पर वह आ गया, लेकिन उसके साथ काफी लोग थे, इसलिए हम तस्करी की डील नहीं कर सके। राजेंद्र बढ़नी से 30 किमी दूर नेपाल के चंद्रौटा कस्बे में शिवराज होटल और डांस बार चलाता है। इस काम में वह सालों से है। 3 दिन बाद हमें इंफर्मेशन मिली कि राजेंद्र नेपाल में अपने होटल में है। हमने बाॅर्डर क्रॉस किया और नेपाल के चंद्रौटा पहुंच गए। यहां राजेंद्र से हमारी डील हुई। राजेंद्र ने बताया- इंडिया के कई शहरों में लड़कियां पहुंचाई हैं। राजेंद्र: वैसे ताे बहुत लड़कियां हैं… आपके गुड़गांव साइड में… दिल्ली में भी बहुत नेपाली लड़कियां हैं… लखनऊ में भी हैं… ऐसा है कि अगर 2-4 लड़कियां चली गईं… तो फिर उनके ही कांटेक्ट से लड़कियां आगे भी आती-जाती रहेंगी… फिर कोई दिक्कत नहीं होगी… शुरू में भेजने में दिक्कत आती है…। रिपोर्टर: दरअसल… हमें 10 लड़कियां… कम से कम चाहिए… जॉब की जरूरत तो होगी ही… ठीक-ठाक सैलरी भी है…। राजेंद्र: आप लोगों का स्पा है… या डांस बार? रिपोर्टर: हमारा होटल है…। राजेंद्र: लखनऊ में एक लड़का था… उसके पास बहुत-सी लड़कियां थीं… नवाब नाम है…। रिपोर्टर: हमको किस एज ग्रुप की लड़कियां मिल जाएंगी…? राजेंद्र: आपको 18 से ऊपर की लड़कियां आसानी से मिल जाएंगी…। रिपोर्टर: माइनर (नाबालिग) लड़कियां क्यों नहीं आ सकती हैं…? राजेंद्र: माइनर लड़कियों को बॉर्डर पर रोक लिया जाता है… वहां कई संस्था काम कर रही हैं…। रिपोर्टर: तब कैसे होगा…? राजेंद्र: बॉर्डर पर दाएं-बाएं (अन्य ऑप्शनल रास्ते) से निकलती हैं… या तो उनके परिवार के लोग हों…। रिपोर्टर: मान लीजिए… सब तैयार हो गईं… तो हमें लखनऊ में लड़कियां मिलेंगी… या कहां मुलाकात होगी उनसे…? राजेंद्र: लखनऊ नहीं मिलेंगी… लेकिन आप अंदर (बॉर्डर पार) या स्टेशन पर रिसीव कर लीजिए…। इसके बाद राजेंद्र ने नेपाली लड़कियों की तस्करी रोकने वाली संस्थाओं के लोगों को चकमा देकर बॉर्डर क्रॉस कराने की पूरी प्रोसेस समझाई। इन लड़कियों को इंडिया लाने में खर्च कितना होगा और इनके रेट क्या हैं? इसके जवाब में राजेंद्र ने बताया- खर्च ज्यादा नहीं होगा, बस परिवार वालों को देना होता है। लड़कियों के परिवार वालों को रुपए देने होंगे रिपोर्टर: अगर लड़कियां तैयार हो गईं तो लेनदेन पर कितना खर्च आ जाएगा…? राजेंद्र: अब लड़कियां तैयार तो हो जाएं… तैयार हो जाएंगी… तब बताया जाएगा…। रिपोर्टर: एडवांस वगैरह करना होता है क्या…? राजेंद्र: एडवांस करना होता है… लेकिन जब जाने का समय होता है… तब करना होता है…। रिपोर्टर: हमें और क्या व्यवस्था करनी होगी…? राजेंद्र: अभी थोड़ा-सा… ये लड़के लोग उत्पात मचा रहे हैं… लोकल वाले… ये लोग सबसे ज्यादा आते हैं… एंजॉय सबसे ज्यादा करेंगे… फिर कुछ कहो तो Gen Z बन जाते हैं… हम लोग ये हैं… वो हैं…। रिपोर्टर: …तो भैया कुछ खर्चा वगैरह बता दीजिए… ताकि तैयारी रहे हमारी…। राजेंद्र: देखिए… ज्यादा खर्चा वगैरह नहीं लगेगा… हल्का-फुल्का रहेगा… कुछ परिवार वगैरह को देना पड़ेगा… बाकी कुछ नहीं रहेगा…। अब चलिए, दूसरे नेपाली तस्कर से मिलते हैं… हम नेपाल में चंद्रौटा के ही दूसरे होटल ब्लू स्काई पहुंचे, जहां हमें इशारे से एक टेबल पर बैठा दिया और हमारे सामने लड़कियाें को भेजा। 2 लड़कियां हमारे सामने बैठी थीं। जिनमें एक सिगरेट पी रही थी। बाकी 2 लड़कियां हमारे पीछे खड़ी थीं। हम काउंटर पर मैनेजर के पास पहुंचे। मैनेजर आदित्य कम उम्र का लड़का था, जो नेपाल के कृष्णानगर का रहने वाला था। जब हमने 10 लड़कियों की तस्करी कराकर इंडिया भेजने की डिमांड की तो आदित्य ने पहले इनकार किया, फिर बोला- दुनिया में हर चीज का सॉल्यूशन है, आप मुझे वॉट्सऐप कॉल कीजिए, सब हो जाएगा। अब नेपाल की महिला तस्करों का खुलासा… हमारे सामने 2 सवाल थे… इन सवालों के जवाब के लिए हम यूपी के महराजगंज जिले के सोनौली बॉर्डर पहुंचे। सोर्स ने हमें 2 नाम बताए- सागर और संजय। ये दोनों तस्करी के नेटवर्क से जुड़े हैं। सागर, नेपाल के भुटवल में होटल चलाता है। हमने उससे वॉट्सऐप पर बात की। उसने लड़कियों की तस्वीरें भेजीं। हमने लड़कियां इंडिया भेजने को कहा तो वह बोला- हो जाएगा… लेकिन पहले आप नेपाल आइए…। इससे साफ हो गया कि सोनौली बॉर्डर से भी नेपाली लड़कियों की तस्करी हो रही है। इसकी पुष्टि के लिए हम दूसरे व्यक्ति संजय से मिले। तस्कर संजय यूपी-नेपाल की सोनौली बॉर्डर से काठमांडू तक बस चलाता है। संजय ने बताया कि फुल सर्विस वाली लड़कियां मिल जाएंगी। ये नौकरी नहीं करेंगी, आप कस्टमर से जो रुपए लेंगे, उसमें से कमीशन लेंगी। नेपाल में खूबसूरती के हिसाब से लड़कियों की कीमत चुकानी होगी। रिपोर्टर: क्या लड़कियां मिल जाएंगी…? संजय: आराम से…। रिपोर्टर: फुल सर्विस वाली मिल जाएगी…? संजय: हां, मिल जाएगी…। रिपोर्टर: कैसे उनको पैसे देने होंगे… क्या-क्या करेंगी…? संजय: महीने का उनको देने की जरूरत नहीं है… वह प्रति आदमी पैसे लेती हैं…। रिपोर्टर: कितना पैसा लेगी…? संजय: अगर सुंदर लड़की होगी तो बहुत चार्ज करेगी… अगर ठीक-ठाक लड़की है… तो कम चार्ज करेेगी…। ड्राइवर संजय के जवाबों से क्लियर हो गया कि वह नेपाली लड़कियों की तस्करी में पूरी तरह इन्वाल्व है। क्या यहां से नेपाली लड़कियां तस्करी हुई है? इसके जवाब ने संजय ने बताया कि उसने नेपाली लड़की को इंडिया भेजा है। हां, हमने नेपाली लड़की को इंडिया भेजा है रिपोर्टर: ये पक्का है कि लड़की मिल जाएगी… तुम्हारा कमीशन कितना होगा…? संजय: (सिर हिलाते हुए) लड़की मिल जाएगी… कमीशन दाई (नेपाल में भैया को दाई कहते हैं) बताएंगे…। रिपोर्टर: कभी लड़कियों को इंडिया भेजा है तुमने…? संजय: (हां में सिर हिलाते हुए) एक बार नेपाली लड़की को भेजा था… दाई ने हमें रुपए दिए थे…। रिपोर्टर: दाई का नाम क्या है…? संजय: सुभाष नाम है…। रिपोर्टर: तुम परेशान मत होना… तुम्हें कमीशन मिलेगा…। संजय: मेरे नंबर पर कॉल करना… दाई हमसे आदमी (आप जैसे कस्टमर) मांगता है… वह तुम्हें खुद कॉल कर लेगा…। रिपोर्टर: वह लड़कियां दिखाएगा क्या…? संजय: हां, वह लड़कियां दिखाएगा…। संजय ने यह भी बताया कि उसे लड़कियों की तस्करी कराने पर कमीशन मिलता है। उसे कितना कमीशन मिलता है? यह जानने के लिए हमने संजय से आगे बात की। उसने बताया कि वह क्लाइंट लाकर तस्करों को देता है। एक लड़की पर 20 हजार रुपए मिलते हैं रिपोर्टर: अगर लड़कियां पसंद आ गईं तो बॉर्डर कैसे पार होगा…? संजय: उधर तो ‘काम करने जा रहीं’ बोल के भेजा जाता है… यह बोल दिया जाता है कि इंडिया में हमारा फैमिली है… होटल छोड़कर कोई भी काम बता दिया जाता है… कोई संस्था नहीं रोकेगा…। रिपोर्टर: एक लड़की पर कितना खर्च आ जाता है…? संजय: मेरा काम दाई को क्लाइंट ढूंढ कर देना होता है… एक लड़की पर मुझे 20 हजार इंडियन करेंसी कमीशन मिलता है… क्लाइंट को दाई कितने में देता है… यह मुझे जानकारी नहीं है…। अब तक के इन्वेस्टिगेशन में यह साफ हो गया कि यूपी-नेपाल बॉर्डर पर किसी एक हिस्से से नहीं, बल्कि कई जगह से लड़कियों की तस्करी की जा रही है। अब हमारे सामने सवाल था कि क्या महिलाएं भी दूसरी लड़कियाें को इस धंधे में ला रही हैं? इसके लिए हम एक बार फिर नेपाल के अंदर गए। यहां भैरवा शहर के कई डांस बार पहुंचे। जहां कई लड़कियां सामने आईं। उनमें से एक महिला तस्कर बेबी से हमारी मुलाकात हुई। उसने बताया कि लड़कियां अरेंज हो जाएंगी, जो लड़कियां इस धंधे में पहले से हैं, वे खुद ही बॉर्डर क्रॉस कर आपके पास आ जाएंगी। नई लड़कियां अभी उनके पास नहीं है। रिपोर्टर: हमें लखनऊ में होटल खोलना है… उसके लिए लड़कियां चाहिए… मिल जाएंगी क्या…? बेबी: ठीक है… मिल जाएंगी…। रिपोर्टर: लड़कियां देखने को मिल जाएंगी क्या…? बेबी: लड़कियां देखनी है… तो यहां भी देख सकते हो…। रिपोर्टर: ये लड़कियां बॉर्डर क्रॉस कर इंडिया चली जाएंगी क्या…? बेबी: हां, यहां से लड़की लोग चली जाएंगी…। रिपोर्टर: हम लोग होटल में नेपाली लड़कियों का स्टाफ चाह रहे हैं… जो रिसेप्शन, वेटर और दूसरे काम कर सके… स्पा वगैरह पर बहुत सख्ती होती है… हम उसे सैलरी भी देंगे…। बेबी: नहीं… वो लड़कियां सैलरी नहीं लेंगी… वे प्रति कस्टमर आपसे चार्ज करेंगी…। बेबी के बाद हमारी मुलाकात तस्कर अंजली से हुई। अंजली ने बताया- वह अभी एक महीने के लिए राजस्थान गई थी, अभी लौटी हैं। लड़कियों को बॉर्डर पार कराने की चिंता आप न करें, हम सब करा देंगे। रिपोर्टर: हमें होटल स्टाफ के लिए नेपाली लड़कियां चाहिए…? अंजली: ठीक है… इन सबके लिए फोन पर बात करेंगे…। रिपोर्टर: नंबर तो बता दो… तुम चलोगी क्या… हमारे साथ…? अंजली: अभी तो हम नहीं चल पाएंगे… लेकिन लड़कियां मिल जाएंगी…। रिपोर्टर: हम अच्छा पैसा देंगे…। अंजली: अब इस काम में अच्छा पैसा तो मिलेगा ही…। रिपोर्टर: बाॅर्डर कैसे पार होंगी लड़कियां…? अंजली: बाॅर्डर पार कराने के लिए परेशान मत होइए… वह तो हम ही करा देंगे… उसकी जिम्मेदारी तुम मत लो… वह एक बार में नहीं जाएंगी… अलग-अलग भेजना पड़ेगा…। सोशलिस्ट ने बताया- नेपाली लड़कियों की तस्करी का रैकेट कितना बड़ा? नेपाल का शांति पुर्नस्थापना गृह, जिसे पीस रिहैबिलिटेशन सेंटर यानी PRC के नाम से जाना जाता है। PRC का उद्देश्य मानव तस्करी रोकना है। हमने PRC के नेशनल रेस्क्यू कोऑर्डिनेटर भूमिराज भट्टाराई से बात की। उन्होंने इस पूरे रैकेट के बारे में विस्तार से बताया – बॉर्डर पार कैसे कराते हैं और लड़कियों को कितने में बेचते हैं? भूमिराज ने बताया- नेपाली लड़कियों की तस्करी में 5 से 6 लोग शामिल होते हैं। इनको पहले पहाड़ी इलाकों से निकालकर काठमांडू लाया जाता है। वहां उन्हें कुछ दिनों तक रखा जाता है। जब तक बॉर्डर से हरी झंडी नहीं मिलती है। अगर काठमांडू नहीं ले जाते हैं तो बॉर्डर के 100 से 50 किमी की रेंज में किसी कस्बे या गांव में रखा जाता है। फिर तस्कर से हरी झंडी मिलती है तो उन्हें बॉर्डर पार कराया जाता है। कई बार यह झुंड में होते हैं तो कई बार एक-एक कर बॉर्डर पार कराया जाता है। इन्हें इंडिया लाकर पहले किसी घर में रखा जाता है, फिर इनके फोटो-वीडियो देश-विदेश में तमाम खरीदारों को भेजे जाते हैं। जिसके बाद लड़कियों की मुंहमांगी कीमत मिलने के बाद बेच दिया जाता है। यह कीमत 2 लाख से 25 लाख तक होती है। ये लड़कियां तस्करों के जाल में कैसे फंस जाती हैं? 3 तरीकों से तस्कर लड़कियों को राजी करते हैं। पहला- नेपाली लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाकर बॉडर पार करा देते हैं। ज्यादातर मामले प्यार-मोहब्बत के आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर 18 से 25 साल की लड़कियां हैं। यह सभी सोशल मीडिया के माध्यम से लड़कों से जुड़ती हैं। ये गांव की भोलीभाली लड़कियां हैं। इन्हें शहर की चकाचौंध दिखाकर बॉर्डर पार कराया जाता है। दूसरा- नौकरी दिलाने के बहाने लड़कियाें को फंसाते हैं। नेपाल में ठीकठाक पढ़ाई के बावजूद लड़कियों को नौकरी नहीं मिलती। इसका फायदा मानव तस्कर उठा रहे हैं। वे नौकरी का लालच देते हैं। नौकरी में नेटवर्क मार्केटिंग का लालच देते हैं। गैंग अपने लोगों से पढ़ी-लिखी लड़कियों की वीडियो कॉल पर बातचीत कराता है। लड़कियों को बताया जाता है कि नेटवर्क मार्केटिंग से वह भी अच्छा पैसा कमा सकती हैं। इसके बाद शहरों की चकाचौंध के वीडियो भेजे जाते हैं। ये सब देख आसानी से लड़कियां झांसे में आ जाती हैं। तीसरा- परिवार को रुपए देकर खरीदी जाती हैं। नेपाल में गरीबी की वजह से कई परिवार ऐसे हैं, जो मजदूरी के नाम पर नाबालिग लड़कियों को बेच देते हैं। इसके एवज में उन्हें रुपए दिए जाते हैं। ये ठेकेदार इन्हें ईंट-भट्टों और ढाबों पर मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। यहां पर इनका शारीरिक शोषण होता है। 1 साल में रेस्क्यू कर कितनी लड़कियों को छुड़वाया है? जनवरी से दिसंबर 2025 तक यूपी-नेपाल की केवल 2 बाॅर्डर से ही 7,920 लड़कियों की काउंसलिंग कर उन्हें घर भेजा। वहीं रेस्क्यू कर 370 लड़कियों को सेक्स रैकेट से मुक्त कराया है। अब जानते हैं… Gen-Z क्या है? Gen-Z यानी जेनरेशन जेड, जो लड़के-लड़कियां साल 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए हैं, उन्हें इस पीढ़ी का माना जाता है। इस पीढ़ी की खासियत यह है कि पैदा होने से लेकर अब तक की इनकी जिंदगी इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, डिजिटल दुनिया और रील्स के बीच ही गुजर रही है। एक रिसर्च के मुताबिक ये पीढ़ी कहीं भी 8 सेकेंड से ज्यादा ध्यान नहीं लगा सकती। इस पीढ़ी के लोगों ने नेपाल में आंदोलन कर सरकार बदल दी है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में पैसे लेकर कागजों में बढ़ा रहे दिव्यांगता:सरकारी नौकरी चाहिए या पेंशन… जैसा यूज, वैसा रेट; देखिए स्टिंग देखिए… दिव्यांगता का परसेंटेज बढ़ाने के 20 हजार रुपए लगेंगे… इसी में डॉक्टर का हिस्सा रहेगा। उन्हें बता देते हैं- ये अपना जानने वाला है तो हो जाता है। वे 10 हजार लेते हैं… डिसेबिलिटी 5% बढ़ा देंगे…।’ ये सौदेबाजी स्वास्थ्य विभाग के सरकारी बाबू कर रहे हैं, ये रुपया लेकर कागजों पर दिव्यांगता (डिसेबिलिटी) का परसेंटेज बढ़ा देते हैं। दिव्यांगता बढ़ाकर लेने वाले सर्टिफिकेट का यूज क्या है? अगर दिव्यांग पेंशन के लिए चाहिए तो रेट कम लगेंगे। लेकिन, सरकारी नौकरी के लिए चाहिए तो रेट ज्यादा लगेंगे। 5% डिसेबिलिटी बढ़ानी है तो 20 हजार रुपए खर्च करने होंगे। इस खेल में डॉक्टर भी शामिल हैं, जो इन बाबुओं और दलालों से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से बढ़ाई दिव्यांगता को वेरिफाई कर देते हैं। पढ़ें पूरी खबर
20 लाख में नेपाल की Gen-Z वर्जिन गर्ल:यूपी बॉर्डर पर महिला तस्करों का स्टिंग; खाड़ी देशों में बेच रहे
