विकास उपाध्याय ने कहा कि नक्सलवाद से निपटने में पुनर्वास नीति का महत्वपूर्ण योगदान है। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को अवसर देना जरूरी है। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार द्वारा पुनर्वास प्रक्रिया को मजबूत करने की पहल सही दिशा में कदम है।
विकास उपाध्याय ने चिंता जताई कि सरकार यदि गंभीर नक्सली अपराधों को वापस लेने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह न्याय व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा। उन्होंने कहा कि ताड़मेटला और झीरम घाटी जैसे बड़े हमलों के बाद ऐसी माफी या रियायतें स्वीकार्य नहीं हो सकती है।
उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सरकार आत्मसमर्पण की आड़ में नक्सलियों को राहत देने का माहौल बना रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के घातक हमलों को देखते हुए उनके अपराधों को हल्के में लेना राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
