नैनो यूरिया व नैनो डीएपी, आधुनिक कृषि की दिशा में एक सशक्त कदम

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कृषि विशेषज्ञों ने बताया है कि दूसरी ओर डीएपी एक बहुप्रचलित फॉस्फेट आधारित उर्वरक है, जो पौधों को नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों तत्व प्रदान करता है। यह विशेष रूप से फसल की शुरुआती अवस्था में अत्यंत लाभकारी होता है, क्योंकि यह बीज अंकुरण को तेज करता है, जड़ प्रणाली को मजबूत बनाता है और पौधों को ऊर्जा प्रदान करता है। डीएपी के प्रयोग से फूल और फल की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे बाजार में फसल की माग और मूल्य दोनो बढ़ते हैं। जब नैनो यूरिया और डीएपी का संतुलित रूप से प्रयोग किया जाता है, तो यह किसानों को एक समग्र पोषण प्रणाली प्रदान करता है, जिससे उत्पादन में स्थायित्व आता है और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है। यह संयोजन न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी सुरक्षित है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को इन आधुनिक उर्वरकों के प्रयोग हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें और देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बना सके। बस्तर जिले के सहकारी समितियों से 19508 बोतल नैनो यूरिया व 15056 बोतल नैनो डीएपी का उठाव किसानो द्वारा किया गया है।

कैसे करें प्रयोग- नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को एक साथ मिलाकर फसलों पर छिड़काव किया जा सकता है। 100 लीटर पानी में इनका घोल बनाकर प्रति एकड़ स्प्रे किया जाता है। ड्रोन से छिड़काव करने पर सिर्फ 10 लीटर पानी की जरूरत होती है। धान के लिए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कार्यक्रम (प्रति एकड़) प्रारंभिक वृद्धि अवस्था (20-25 दिन बाद) नैनो यूरिया: 2-4 ml, नैनो डीएपी: 2-4 ml, पानीः 1 लीटर, टिलरिंग अवस्था (35-40 दिन बाद) नैनो यूरिया: 4 ml, पानी, 1 लीटर, पैनिकल आरंभ अवस्था (55-60 दिन बाद) नैनो डीएपी: 4 ml, पानी, 1 लीटर, दाना भरने की अवस्था (75-80 दिन बाद) नैनो यूरिया 4 ml, नैनो डीएपी 4 ml, पानी: 1 लीटर (यदि आवश्यक हो) उप संचालक कृषि ने किसानों से अपील है कि वे इन आधुनिक उर्वरको का प्रयोग करें और वैज्ञानिक खेती की ओर अग्रसर हो। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था भी अधिक सशक्त और पर्यावरण-संवेदनशील बनेगी।