Bhitauli Uttarakhand: शादी के बाद भले ही एक बेटी का घर बदल जाता है, लेकिन मायके से उसका भावनात्मक रिश्ता कभी कम नहीं होता. देवभूमि उत्तराखंड की सदियों पुरानी परंपरा ‘भिटौली’ इसी पवित्र रिश्ते का उत्सव है. चैत्र के महीने में जब पहाड़ों में घुघुती पक्षी की आवाज गूंजती है, तो बेटियों की आंखें अपने मायके की पगडंडियों को निहारने लगती हैं. हाथ से बने खजूर, अरसे और नए कपड़ों की टोकरी लेकर जब भाई या पिता बेटी के आंगन में कदम रखते हैं, तो वह केवल उपहार नहीं बल्कि बचपन की यादों का एक खूबसूरत एहसास होता है.
ना बासा घुघुती…जब पगडंडियों पर भाई को देख झूम उठती है लाडली बहन, जानें क्या है उत्तराखंड की भिटौली परंपरा
