हरियाणा में करनाल के असंध में बुजुर्ग दपंती हरि सिंह और लीला के मर्डर केस में पुलिस एक छोटे से सुराग से हत्यारोपी पोते तक पहुंची। पोते रविंद्र की उंगली पर पट्टी बंधी थी। पुलिस ने उसके बारे में पूछा तो बताया कि लकड़ी काटते वक्त चोट लगी। जबकि, जिस स्थान पर उसने लड़की फाड़ने की बात कही, वहां पुलिस को कोई निशान नहीं मिले। इससे पुलिस के शक की सुई उस पर गई। असल में यह वही जख्म था जो उसकी दादी लीला ने मरने से पहले दिया था। जब वह दम घोंटने के लिए मुंह पर टेप लगा रहा था, तब दादी ने बचने के लिए संघर्ष किया। इसी दौरान रविंद्र की उंगली पर जबड़े से काट लिया था। पुलिस का कहना है कि 11 जनवरी की रात दादा-दादी की हत्या के बाद सुबह रविंद्र बिल्कुल भी नहीं घबराया। नॉर्मल व्यवहार करता रहा। यहां तक कि मीडिया के कैमरे के सामने भी आया और वारदात को लूटपाट के चलते होने का दावा किया। परिवार ने बताया कि पोता अक्सर दादा-दादी से लड़ता था
रविंद्र की ताजा चोट के कारण वह पुलिस के शक के दायरे में आ गया। फिर पुलिस ने परिवार के अन्य सदस्यों से भी बातचीत की, जिसमें सामने आया कि दादा के साथ अक्सर रविंद्र का झगड़ा होता रहता था। शाम होते-होते पुलिस को इस बात की तसल्ली हो गई थी कि रविंद्र का कोई बड़ा हाथ है, लेकिन पुलिस दाह संस्कार होने का इंतजार करती रही। 7 बजे दाह संस्कार हुआ और पुलिस ने रात को 8 बजे ही रविंद्र को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। पुलिस ने सख्त लहजे में पूछताछ की तो रविंद्र ज्यादा देर टिक नहीं पाया और उसने पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया। उसने प्रदीप और गुलशन के नामों का भी खुलासा कर दिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन दोनों को भी हिरासत में ले लिया। तीनों को पुलिस ने दो दिन के रिमांड पर लिया है। दादा-दादी को मारने की प्लानिंग की कहानी… बेटे का 15 लाख का कर्ज चुकाया था
रविंद्र के पिता बंसी के सिर पर करीब 15 लाख का कर्ज था, जो दादा हरि सिंह ने चुका दिया। डेढ़ साल पहले यह कर्ज चुकाया गया था। अब दादा अपने पैसे की डिमांड कर रहा था, लेकिन रविंद्र पैसे नहीं देना चाहता था। उसे पैसे भी न देने पड़े और दादा का घर और घर में पड़ा लाखों का माल भी उसका हो जाए, उसके लिए लिए उसने दादा-दादी की हत्या की साजिश रची। गुलशन और प्रदीप संपर्क में आए: जयसिंहपुरा गांव का 45 वर्षीय प्रदीप कुमार कबाड़ी है। वह कबाड़ बेचने हरि सिंह के पास आया करता था। पुलिस के मुताबिक, प्रदीप पर चोरी के भी केस हैं। रविंद्र ऐसे लोगों की तलाश में था, जो चोरी कर सकते हों। लिहाजा उसने प्रदीप से संपर्क किया और उसे प्लानिंग बताते हुए कहा कि दादा की दुकान में लाखों का तांबा पड़ा है, इसे चोरी करना है। इसके लिए कम से कम दो लोगों की जरूरत है। इसके बाद प्रदीप ने अपने भतीजे गुलशन को इस प्लानिंग में शामिल कर लिया। रात को 11.47 से 1.15 बजे तक चला मौत का खेल
प्लानिंग के मुताबिक, रविंद्र ने 11 जनवरी की दरमियानी रात करीब 11.47 पर दीवार फांद दी। वह अपने घर से दादा के घर में कूद गया। पहले वह घर के अंदर गया और देखा कि उसके दादा-दादी सो रहे हैं। इसके बाद उसने दबे पांव मेन गेट खोला। इसके बाद प्रदीप व गुलशन भी अंदर आ गए। मंकी कैप पहने रविंद्र दादा-दादी के पास पहुंच गया और इन्होंने दोनों के हाथ-पैर को बांध दिया। सबसे पहले रविंद्र ने दादी के मुंह पर टेप लगाई, क्योंकि वह शोर मचा रही थी। इसी दौरान दादी ने रविंद्र को उंगली पर काट लिया। यही जख्म रविंद्र के फंसने में सबसे बड़ा सबूत बना। दादी चिल्ला रहीं थी- रविंद्र बचा ले
हत्यारों से बचने के लिए संघर्ष कर रहीं दादी चिल्ला रही थी कि रविंद्र बचा ले, रविंद्र बचा ले। वह नहीं जानती थी कि गला घोंटने वाला ही रविंद्र है। दोनों को ठिकाने लगाने के बाद वहां का सामान भी उथल-पुथल कर दिया, ताकि ऐसा लगे कि यहां पर लूटपाट हुई है। इसके बाद वह दोनों को घसीटकर अंदर वाले कमरे में डाल गए। करीब सवा 1 बजे तीनों वहां से फरार हो गए और अगले दिन कटी हुई उंगली ने रविंद्र को फंसवा दिया। रविंद्र पूजा पाठ करता था और लोगों को बहकाता था
पुलिस के मुताबिक, 25 वर्षीय रविंद्र घर में बड़ा था। उसका एक छोटा भाई और बहन भी है। तीनों अविवाहित हैं। वह कुछ सालों से भगवा वेश धारण किए हुए था और लोगों को कोई दवाई भी बांटता था। इसके बहकावे में लोग आ भी जाते थे। बाबा बनने के बाद वह थोड़ा बहुत नशा भी करता था। वह अपना एक मंदिर बनाना चाहता था, जिसके लिए उसे एक जगह की जरूरत थी। उसकी नजर अपने दादा के घर पर पड़ी। वह इस हत्याकांड से 3 निशाने साधना चाहता था। पहला, दादा को 15 लाख रुपए लौटाने नहीं पड़ेंगे। दूसरा, दादा की प्रॉपर्टी पर उनका कब्जा हो जाएगा। तीसरा वह यहीं पर मंदिर बना लेगा। हालांकि, उसकी प्लानिंग फेल हो गई और अब वह सलाखों के पीछे है। चाचा-भतीजे हैं प्रदीप और गुलशन
आरोपी प्रदीप शादीशुदा है, जिसकी दो बेटियां हैं। वहीं, गुलशन 19 साल का है और अविवाहित है। दोनों को तांबा चोरी करने के लालच में शामिल किया गया था। वे सिर्फ चोरी करने के लिए आए थे, लेकिन जब रविंद्र दादा-दादी के साथ संघर्ष करता दिखा तो दोनों इस हत्याकांड में भी शामिल हो गए। दो दिन के रिमांड पर आरोपी, पूछताछ कर रही पुलिस
अब पुलिस दो दिन के रिमांड के दौरान तीनों से गहनता से पूछताछ कर रही है। इसमें यह पता करने का प्रयास किया जाएगा कि रविंद्र के परिवार का कोई और व्यक्ति तो इस साजिश में शामिल नहीं था? क्या रविंद्र के पिता को इस पूरे घटनाक्रम के बारे में कोई जानकारी थी? या फिर रविंद्र ने किसी और व्यक्ति से भी संपर्क किया था? ————————– ये खबर भी पढ़ें :- मंदिर बनाने के नाम पर दादा-दादी को मारा:नशेड़ी पोता खुद को बाबा बताता है; करनाल में ₹15 लाख का उधार चुकाने से बचना चाहता था हरियाणा के करनाल में बुजुर्ग दंपती का हत्यारा पोता ही निकला। आरोपी पोते ने 15 लाख रुपए और जमीन हड़पने के लिए अपने 2 साथियों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए 2 दिन की रिमांड पर लिया है। पढ़ें पूरी खबर…
उंगली की चोट से पकड़ा हत्यारोपी पोता:करनाल में दादी का दम घोंटने के लिए मुंह पर टेप लगाई, तभी दांत से काटा
