सोनीपत जिले में नगर निगम में 15 हजार रुपए रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुए क्लर्क हरिओम को 6 महीने बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जहां रिश्वत लेने के आरोपों में सच्चाई मिली। रिश्वत मामले में नगर निगम कमिश्नर ने जांच के बाद सस्पेंड कर दिया था। वहीं आरोपी को सिविल लाइन पुलिस आरोपी को कोर्ट में पेश कर आगे की कार्रवाई शुरू करेगी। नगर निगम सोनीपत क्लर्क रहे हरिओम के रिश्वत लेने के वीडियो सामने आने के बाद से ही हरिओम कार्यालय से गैर हाजिर हो गया था और इसके बाद लगातार नोटिस भी निगम द्वारा भेजे गए थे। सोनीपत नगर निगम के क्लर्क हरिओम ने एक व्यक्ति से प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के बदले 15 हजार रुपए की रिश्वत ली थी। व्यक्ति दो महीने से निगम के चक्कर काट रहा था, लेकिन रिश्वत लेने के अगले ही दिन उसकी प्रॉपर्टी आईडी में सुधार कर दिया गया। तीन नोटिसों का नहीं दिया जवाब क्लर्क हरिओम को नगर निगम की ओर से तीन बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उसने पेश होने के बजाय यह कहकर टालमटोल की, कि उसे वह वीडियो नहीं मिली है, जिसमें उसे रिश्वत लेते हुए दिखाया गया है। निगम अधिकारियों के अनुसार वीडियो उसको वॉट्सऐप पर भेजी जा चुकी थी। प्रॉपर्टी आईडी में पड़ोसी की जमीन दर्शाई सोनीपत के मोहन नगर के रहने वाले विनोद और रोहित ने बताया कि मोहन नगर में ही उनके 211 गज के प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी पड़ोसी की जमीन में दर्शाई गई है। इसे लेकर वह और उसका भतीजा रोहित 2 महीने से अफसरों के दरवाजे पर धक्के खाता रहा। चपरासी के कहने पर उन्होंने निगम के क्लर्क हरिओम से बातचीत की। हरिओम डिप्टी मेयर मंजीत गहलावत के कार्यालय में कमरा नंबर 8 में कार्यरत रहा है। 7 मई को उनसे डिप्टी मेयर के कमरे में बुलाकर 15 हजार की रिश्वत ली गई। उसने इसकी चोरी छुपे कैमरे से वीडियो बना ली। दो महीने काटे चक्कर, रिश्वत देने पर एक दिन में ठीक प्रॉपर्टी आईडी की समस्या को 1 दिन में ही ठीक कर दिया। इससे पहले पीड़ित व्यक्ति को कागजात में कमियां बताकर 2 माह से चक्कर कटवाए जा रहे थे। सीधे रुपए तो नहीं मांगे जा रहे थे, लेकिन कभी यह कागज लेकर आओ और कभी यहां साइन नहीं है, इस तरह से परेशान किया जा रहा था। इससे व्यक्ति परेशान हो गया था। उसने क्लर्क हरिओम से संपर्क किया, तो उसे कहा गया। लालच छोड़ अपना काम करवा लो भाई हरिओम ने डिप्टी मेयर मंजीत गहलावत के कमरे में बैठकर यह रिश्वत ली गई। पीड़ित व्यक्ति ने क्लर्क के रिश्वत लेते की वीडियो बना ली और निगम कमिश्नर को भेज दी। डिप्टी मेयर के कार्यालय में ली राशि शिकायतकर्ता विनोद के मुताबिक निर्धारित किए समय पर वह और उसका भतीजा रोहित डिप्टी मेयर के कार्यालय में बैठे क्लर्क हरिओम के पास पहुंचे। यहां उसने जेब से 15 हजार रुपए निकाल कर गिने और फिर क्लर्क को दे दिए। क्लर्क ने भी रुपए गिनने के बाद अपनी अपनी जेब में डाल लिए। आपसे ज्यादा कोशिश करूंगा विनोद के मुताबिक उसने क्लर्क से पूछा कि किस टाइम तक आईडी निकल जाएगी। इस पर क्लर्क ने जवाब दिया कि करीबन 4:30 बजे तक मिल जाएगी। इसके बाद एनओसी के लिए भी पूछा तो क्लर्क ने कहा कि अब आपसे ज्यादा कोशिश मैं करूंगा। रुपए देते ही ठीक कर दी समस्या विनोद ने बताया कि उसने क्लर्क से कहा कि मेरा नंबर लिख लीजिए और जब तैयार हो जाए, तो मुझे बता देना। इसके बाद क्लर्क ने उसका मोबाइल नंबर कागज पर लिख लिया। इस प्रकार पेंडिंग पड़ी हुई प्रॉपर्टी आईडी को रिश्वत का पैसा देते ही एक दिन में ठीक कर दिया गया। निगम ने बना रखा हेल्प डेस्क सोनीपत नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी में किसी प्रकार की कोई समस्या या परेशानी आती है तो उसको ठीक करने के लिए ऑनलाइन ऑब्जेक्शन लगवाने होते हैं। इसके लिए निगम में हेल्प डेस्क बनाई गई है, जहां सारे काम फ्री होते हैं। प्रॉपर्टी आईडी में अलग-अलग प्रकार के विकार को ठीक कराने को लेकर प्रशासन की ओर से 2 दिन से लेकर 15 दिन के भीतर ठीक होने का नियम बनाया गया है। यह पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया रहती है। इस पर अधिकारियों की भी निगरानी रहती है। इस तरह किया जाता है परेशान लोगों की प्रॉपर्टी आईडी पर बार-बार अलग-अलग कारण बताकर रिजेक्ट किया जाता है, क्योंकि व्यक्ति अपना काम का छोड़कर निगम के जब चक्कर काटेगा, तो परेशान होगा। परेशान व्यक्ति पैसे देकर अपना काम करवाने के लिए मजबूर होगा। कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी पुलिस वहीं नगर निगम कमिश्नर द्वारा जांच के बाद हरिओम क्लर्क पर कार्रवाई कर दी, लेकिन पूरे मामले में केवल हरिओम ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों के भी संदिग्ध होने पर सवाल खड़े करता है। अभी तक के अन्य किसी भी व्यक्ति कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं दूसरी तरफ हरिओम क्लार्क को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा और उससे पूछताछ के लिए रिमांड लिया जा सकता है, क्योंकि प्रॉपर्टी आईडी को ठीक करने के काम में कई लोगों का योगदान होता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि और कौन-कौन इस पूरे नेटवर्क में शामिल थे। पुलिस भी पूरे मामले को लेकर जांच कर रही है।
सोनीपत में नगर निगम क्लर्क गिरफ्तार:रिश्वत केस में 6 महीने से था फरार; वीडियो आया सामने, कोर्ट में पेशी
