केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुड़िया दरबार में मांझी-मुखियाओं से रुबरू होकर उनकी समस्याएं सुनेंगे

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अमित शाह दोपहर 12 बजे जगदलपुर पहुँचेंगे और सीधे मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगे और सेवा पखवाड़ा प्रदर्शनी में भी भाग लेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दौरे की तैयारियों की निगरानी की और सुरक्षा व कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया।

अमित शाह का बीते 22 महीनों में यह छठा बस्तर दौरा होगा। इससे पहले 5 अप्रैल 2025 को वे दंतेवाड़ा में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ (मेला) में शामिल हुए थे और मंच से आदिवासी अस्मिता व संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प लिया था। इस बार वे उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सनातन आस्था और आदिवासी परंपरा के अद्वितीय संगम बस्तर दशहरा का हिस्सा बनेंगे।

ज्ञात हो कि 1876 से पहले बस्तर दशहरे के दौरान मांझी-मुखिया और ग्रामीण राजमहल में ठहरते थे और राजा का दरबार लगता था। उसी दौरान अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और जंगल पर जनजातीय अधिकारों पर अंकुश के विरोध में झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में मुरिया जनजाति ने ऐतिहासिक विद्रोह छेड़ा। 8 मार्च 1876 को सिरोंचा के डिप्टी कमिश्नर मैक जॉर्ज को आंदोलनकारियों के सामने झुकना पड़ा और राजस्व-प्रशासनिक सुधार लागू करने पड़े।

यही विद्रोह जनजातीय एकता और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बना। इसके बाद से दशहरे के अवसर पर राजमहल के राजा दरबार की जगह झाड़ा सिरहा की गुड़ी में ‘मुरिया दरबार‘ लगने लगा। 1965 तक महाराजा स्व. प्रवीरचंद्र भंजदेव स्वयं इसकी अध्यक्षता करते रहे। बाद में यह परंपरा शासन-प्रशासन की उपस्थिति में जारी रही।