मणिपुर- 3 साल पहले गैंगरेप की शिकार युवती की मौत:सदमे में थी; 2023 हिंसा में किडनैपिंग, फिर दरिंदगी हुई, अबतक एक भी गिरफ्तारी नहीं

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मणिपुर में 3 मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के तुरंत बाद गैंगरेप का शिकार हुई 20 साल की युवती की मौत हो गई है। गैंगरेप के समय वह सिर्फ 18 साल की थी। NDTV के अनुसार, महिला लगभग तीन साल पहले किडनैपिंग और गैंगरेप के सदमे से अब तक उबर नहीं पाई थी। महिला की मां ने बताया कि वह गंभीर रूप से जख्मी हुई थी। गंभीर चोटों के कारण उनकी बेटी को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। आखिरकार, 10 जनवरी को वह जिंदगी से जंग हार गई। महिला कुकी समुदाय से थी। उसने मणिपुर के सिंगहाट में अंतिम सांस ली। पीड़ित ने 21 जुलाई, 2023 को FIR दर्ज कराई थी। इसमें उसने आरोप लगाया था कि 15 मई, 2023 को काले रंग की टी-शर्ट पहने चार हथियारबंद लोग उसे सफेद बोलेरो में किडनैप कर पहाड़ी इलाके में ले गए। ड्राइवर को छोड़कर उनमें से तीन ने बारी-बारी से उसके साथ रेप किया था। 22 जुलाई, 2023 को पीड़ित का मामला CBI को सौंप दिया गया। हालांकि, इस अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित के लिए न्याय की मांग को लेकर 17 जनवरी को कुकी समुदाय के लोगों ने चुराचंदपुर में कैंडललाइट मार्च निकाला। पीड़ित ने बताया था, कैसे आरोपियों के चंगुल से निकली पीड़ित ने बताया था कि आरोपियों ने उसके साथ वो सभी घिनौनी हरकतें कीं, जो वे कर सकते थे। पूरी रात उसे कुछ भी खाने को नहीं दिया गया। पानी तक नहीं दिया गया। उसके आंखों पर पट्टी बंधी थी। सुबह शौचालय जाने के बहाने उसने आंखों पर बंधी पट्टी हटवाई और वहां से भाग निकली। FIR के मुताबिक, सुबह होते ही वह पहाड़ी इलाके से भागकर नीचे पहुंची। वहां सब्जियां ले जा रहे एक ऑटो-रिक्शा चालक ने उसकी मदद की। वह उसे बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन ले गया। हालांकि, वहां मैतेई पुलिसकर्मियों को देखकर उसने मदद लेने से इनकार कर दिया। पीड़ित की विनती पर रिक्शा चालक ने ही उसे इम्फाल के न्यू लम्बुलने इलाके में उसके घर तक पहुंचाया। फिर उसे कांगपोकपी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में आगे के इलाज के लिए नगालैंड के कोहिमा के एक अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। मणिपुर में एक साल से राष्ट्रपति शासन लगा मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। इसे फरवरी, 2026 तक बढ़ा दिया गया है। मणिपुर में फिर हिंसा, मिलिटेंट्स ने गांव जलाने की धमकी दी इधर, मणिपुर में शांति के दावे के बीच फिर से हिंसा हुई है। कुकी मिलिटेंट न सेनापति जिले के नगा बहुल इरेंग गांव में ‘कुकी लैंड’ और ‘दूर रहो’ लिखकर केंद्र और राज्य सरकारों को खुली चुनौती दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बीते दिनों रात के समय अज्ञात हथियारबंद लोग गांव में दाखिल हुए और तोड़-फोड़ करते हुए मेमोरियल स्टोन पर नारा लिख दिया। गांव वालों ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके चलते क्षेत्र में नए सिरे से अशांति फैलने की आशंका गहरा गई है। खुद को टाइगर किप्गेन उर्फ थांग्बोई/हाउगेंथांग किप्गेन बताने वाले केएनएफ-पी के कमांडर ने गांव के चेयरमैन को फोन कर हत्या और पूरे गांव को जला देने की धमकी दी। घटना के बाद नगा ग्रामीणों ने शनिवार को कंग्पोक्पी-चुराचांदपुर रोड को ब्लॉक कर दिया। लियांग्माई नगा काउंसिल और नगा पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (NPO) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। कई नगा संगठनों ने जॉइंट ट्राइबल बॉडीज के साथ मिलकर ट्रैफिक और ट्रेड ब्लॉकेड की धमकी दी है। 4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह… मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।