किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ने कहा- ममता को समझाया:वो मानी नहीं; शंकराचार्य पर सवाल उठाना बर्दाश्त नहीं, इसलिए निकाला

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ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा ने निष्कासित कर दिया। 1 साल 3 दिन वो महामंडलेश्वर की भूमिका में दिखीं। इस दौरान उन्होंने 3 बार विवादित बयान दिए। पहला- डॉन दाऊद इब्राहिम। दूसरा- म्यूजिक डायरेक्टर एआर रहमान। तीसरा- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद। 27 जनवरी को किन्नर अखाड़ा आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ऐलान किया- अब ममता कुलकर्णी से अखाड़े का कोई संबंध नहीं है। वह अखाड़े की अधिकारी या सदस्य नहीं हैं। उनके दिए किसी बयान से हमारा कोई सरोकार नहीं है। इसके बाद मीडिया को दिए बयान में ममता कुलकर्णी ने कहा- मैंने महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दिया है। मैंने देखा है कि सच्चा महंत या महामंडलेश्वर बनने के लिए कई साल तक ध्यान, तपस्या और आध्यात्मिक अनुशासन से गुजरना पड़ता है। इस पूरे मामले की हकीकत क्या है? क्या अचानक ही ममता को अखाड़े से बाहर करने का निर्णय हुआ था? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल : ममता कुलकर्णी को निकालने का निर्णय अचानक क्यों लेना पड़ा?
जवाब : महाकुंभ में हमने उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी दी थी, ताकि वह सनातन को आगे बढ़ाने का काम करें, लेकिन ऐसा होता दिखा नहीं। वह लगातार उल्टे-सीधे बयान जारी कर रही थीं। यह अखाड़ा सबके लिए है, इसमें महिलाएं, पुरूष और किन्नर सब शामिल हैं, लेकिन किसी को हमने गलत बयान देने का अधिकार नहीं दिया है, ये स्वीकार नहीं है। सवाल : ममता जब लगातार बयानबाजी कर रही थीं, क्या आपने रोका?
जवाब : मैं अखाड़े की प्रमुख हूं, मैंने खुद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन ममता कुलकर्णी ने उल-जलूल बयान दिए। इसके पहले भी कई बार वो ऐसा कर चुकी थीं। हमने कई बार रोका, समझाया…लेकिन वो नहीं समझ सकीं। सवाल : अखाड़े से महामंडलेश्वर को बाहर निकालने की क्या प्रक्रिया होती है?
जवाब : हमारे अखाड़े में सभी को अपनी बात रखने का मौका मिलता है, लेकिन किसी संवेदनशील मामले में कुछ अहम बात करने से बचना होता है। ममता कभी डॉन दाऊद को लेकर तो कभी अपनी निजी जिंदगी को लेकर कुछ न कुछ कह रही थीं। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और अन्य शंकराचार्यों को लेकर उन्होंने विवादित बयान दिया था। इसके बाद अखाड़ा के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की गई। सबकी सहमति बनी कि ममता को अखाड़ा से बाहर करने का निर्णय लिया। सवाल : ममता ने दाऊद, एआर रहमान, फिर शंकराचार्य पर बयान दिया?
जवाब : किसी को एक या दो बार समझाया जाता है, न कि बार-बार। गोरखपुर में कुछ दिन पहले ही दाऊद को लेकर उन्होंने कहा कि दाऊद इब्राहिम कोई आतंकवादी नहीं है और उसने कोई बम ब्लास्ट नहीं करवाया। इसके बाद भी हमने समझाया था कि ऐसा बोलना गलत है। इसके बावजूद 26 जनवरी को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए कहा कि उन्हें नियुक्त किसने किया? हम ऐसा नहीं पूछ सकते। यही उन्हें समझना चाहिए। सवाल : क्या उन्हें बाहर करने से पहले आपकी ममता से कोई बात हुई थी?
जवाब : नहीं, क्योंकि इसके पहले ही हमने उन्हें आगाह किया था, मुझे लगा कि शायद अब ऐसा न हो। इस बार हमने कोई बात नहीं की। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर लगता है कि उन्होंने भी इस निर्णय को स्वीकार किया। सवाल : अविमुक्तेश्वरानंद पर दिए बयान पर बाहर किया, दाउद को सही ठहराने पर क्यों नहीं?
जवाब : देखिए, शंकराचार्य पर इतना घटिया बयान देना, यह हमारे संतों का अपमान है। जो इतने सालों से संन्यास लेकर शंकराचार्य बना हो, उस पर भला हम कोई कमेंट कैसे कर सकते हैं? दाऊद को लेकर जब उन्होंने बयान दिया था तब हमने समझाया था लगा कि अब ऐसा नहीं होगा, इसलिए एक्शन नहीं लिया था। अब जानिए ममता कुलकर्णी ने कब और क्या विवादित कहा… ममता महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में रही थीं ममता कुलकर्णी 23 जनवरी, 2025 को अचानक प्रयागराज महाकुंभ पहुंचीं। दोपहर में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मिलीं। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। फिर दोनों अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र पुरी से मिलीं। इसके बाद ममता को महामंडलेश्वर बना दिया गया। उनका नाम यामाई ममता नंद गिरि रखा गया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, योग गुरु बाबा रामदेव समेत कई संतों ने इसका विरोध किया था। रामदेव ने कहा था- कोई एक दिन में संतत्व को प्राप्त नहीं कर सकता। इसके बाद 10 फरवरी को ममता ने किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर पद छोड़ दिया था। हालांकि 2 दिन बाद यानी 12 फरवरी को उन्होंने इस्तीफा वापस भी ले लिया था। अब ममता को फिल्मी करियर भी जानिए विवादों में रहीं ममता, मैगजीन के लिए टॉपलेस फोटोशूट कराया
शाहरुख खान, सलमान खान, अजय देवगन, अनिल कपूर जैसे बड़े स्टार्स से साथ स्क्रीन शेयर करने वाली ममता उस वक्त विवादों में आईं जब उन्होंने साल 1993 में स्टारडस्ट मैगजीन के लिए टॉपलेस फोटोशूट कराया था। वहीं, डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने ममता को फिल्म ‘चाइना गेट’ में बतौर लीड एक्ट्रेस लिया था। शुरुआती अनबन के बाद संतोषी, ममता को फिल्म से बाहर निकालना चाहते थे। खबरों के मुताबिक, अंडरवर्ल्ड से प्रेशर बढ़ने के बाद उन्हें फिल्म में रखा गया। हालांकि, फिल्म फ्लॉप साबित हुई और बाद में ममता ने संतोषी पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप भी लगाया। फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बाद ममता विक्की गोस्वामी के साथ दुबई, केन्या जाकर रहने लगी थीं। ड्रग माफिया से रचाई शादी, साध्वी बनीं
ममता पर आरोप लगा कि उन्होंने दुबई के रहने वाले अंडरवर्ल्ड ड्रग माफिया विक्की गोस्वामी से शादी की थी। हालांकि ममता ने अपनी शादी की खबरों को हमेशा ही अफवाह बताया। ममता का कहना था कि मैंने कभी किसी से शादी नहीं की। यह सही है कि मैं विक्‍की से प्‍यार करती हूं, लेकिन उसे भी पता होगा कि अब मेरा पहला प्‍यार ईश्‍वर हैं। ममता ने 2013 में अपनी किताब ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगिनी’ रिलीज की थी। इस दौरान फिल्‍मी दुनिया को अलविदा कहने की वजह बताते हुए कहा था, ‘कुछ लोग दुनिया के कामों के लिए पैदा होते हैं, जबकि कुछ ईश्‍वर के लिए पैदा होते हैं। मैं भी ईश्‍वर के लिए पैदा हुई हूं।’ फिल्म करण अर्जुन के सेट पर शाहरुख खान, राकेश रोशन और सलमान खान के साथ ममता कुलकर्णी। तमिल फिल्म से शुरू किया था करियर
ममता कुलकर्णी का जन्म 20 अप्रैल, 1972 को मुंबई में हुआ था। ममता ने 1991 में अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्म ‘ननबरगल’ से की। साल 1991 में ही उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘मेरा दिल तेरे लिए’ रिलीज हुई। वेबसाइट आईएमडीबी के मुताबिक, एक्ट्रेस ने अपने करियर में कुल 34 फिल्में कीं। ममता को साल 1993 में फिल्म ‘आशिक आवारा’ के लिए बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। इसके बाद वह ‘वक्त हमारा है’, ‘क्रांतिवीर’, ‘करण अर्जुन’, ‘बाजी’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। उनकी लास्ट फिल्म ‘कभी तुम कभी हम’ साल 2002 में रिलीज हुई थी। ———————– ये भी पढ़ें – अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेला छोड़कर गए:कहा- बिना स्नान दुखी मन से लौट रहा हूं; जिन्होंने अपमान किया, उन्हें औकात दिखानी होगी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। इस दुख की भरपाई पता नहीं कौन सा नेता आएगा कौन सी पार्टी आएगी जो करेगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। पढ़िए पूरी खबर…