इस अवसर पर छात्राओं को महिलाओं के अधिकार, आर्थिक स्वावलंबन, शिक्षा के महत्व. मानसिक स्वास्थ्य तथा आत्म-जागरूकता की आवश्यकता के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ता द्वारा छात्रों को बताया गया कि, महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना क्यों आवश्यक है और वे किस प्रकार विभिन्न कानूनी प्रावधानों का लाभ उठाकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं। शिविर में विशेष रूप से महिला संरक्षण से संबंधित प्रमुख कानूनों जैसे- घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम आदि के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
कॉलेज परिसर में आयोजित साक्षरता शिविर में छात्रों को Mental Healthcare Act, 2017 की मुख्य बातें सरल भाषा में बताई गई। उक्त शिविर में यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है जितना शारीरिक स्वास्थ्य, और हमें अपने साथियों की भावनात्मक सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कु. अंकिता कश्यप, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि इस आयोजित शिविर का उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ और संवेदनशीलता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में छात्रों ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील समाज निर्माण का संकल्प लिया, इसके साथ हीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में विधिक साक्षरता बढ़ाना, समानता एवं आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें एक सजग नागरिक के रूप में समाज में योगदान के लिए प्रेरित करना था। कॉलेज के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के इस पहल की सराहना की।
