देहरादून के श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज (SGRR) में एमएस कर रही लेडी डॉक्टर तनवी (26) ने जहरीला इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या कर ली। वह हरियाणा के अंबाला की रहने वाली थी और अपनी मां के साथ देहरादून में किराए के कमरे में रहती थी। उसका शव इंद्रेश अस्पताल के पास कार के अंदर मिला। घटना के बाद मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। एक तरफ मृतका के पिता ने पटेल नगर थाने में शिकायत देकर कॉलेज की HOD पर धमकी देने और परेशान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि टीचर जानबूझकर 0 नंबर देती थी, जिससे उनकी बेटी मानसिक रूप से परेशान थी। दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रा पहले से ही मानसिक रूप से बीमार थी और दो साल पहले भी सुसाइड की कोशिश कर चुकी थी। वहीं, सीओ देहरादून अंकित कंडारी के अनुसार, परिजनों की शिकायत पर टीचर पर FIR कर ली गई है, साथ ही कॉलेज के दावे को भी जांच में शामिल कर लिया गया है। मामले की हर पहलू से पड़ताल की जा रही है। पहले जानिए पिता के अनुसार क्यों तनवी ने किया सुसाइड… पढ़ाई ठीक चल रही थी, HOD बदलते ही बदले हालात तनवी के पिता ललित मोहन के अनुसार, वह सितंबर 2023 से श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज में आंखों के रोग की पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई कर रही थी। दिसंबर 2025 तक सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन इसके बाद HOD बदल गया और डॉ. प्रियंका गुप्ता को नया HOD बना दिया गया। पिता का आरोप है कि यहीं से बेटी के साथ व्यवहार बदल गया और उसे परेशान किया जाने लगा। डराना-धमकाना और नंबर काटने के आरोप पिता के मुताबिक, नई HOD ने शुरुआत से ही तनवी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसे पहले वाले HOD से बात न करने के लिए कहा गया। जहां पहले उसे काम के हिसाब से अच्छे नंबर मिलते थे, वहीं बाद में उसकी लॉग बुक में कम या जीरो नंबर दिए जाने लगे। साथ ही बार-बार यह कहा जाता था कि अगर उनकी बात नहीं मानी तो उसे फाइनल परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा। पैसों की मांग का आरोप, परिवार ने कई बार लगाई गुहार शिकायत में यह भी कहा गया है कि तनवी से पैसों की मांग की गई, जबकि उसकी पूरी फीस पहले ही जमा थी। इससे वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगी थी और घर पर भी यह बात बताई थी। परिवार के अनुसार, पिछले चार महीनों में वे कई बार कॉलेज जाकर HOD से मिले और बेटी को परेशान न करने की बात कही, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। रात को कॉल नहीं उठाया, कार में मृत हालत में मिली पिता के अनुसार, 24 मार्च रात 9 बजे तनवी ने मां से बात कर खुद के परेशान होने की बात कही थी। रात 11:15 बजे उसने एक मैसेज भी किया, लेकिन इसके बाद फोन उठाना बंद कर दिया। चिंतित पिता अंबाला से देहरादून पहुंचे। तलाशी के दौरान इंद्रेश अस्पताल के पास उसकी ग्रे रंग की ‘किया’ (HR01AX8947) सड़क किनारे अंदर से लॉक मिली। अंदर वह ड्राइविंग सीट पर थी, हाथ में कैनुला लगा था और पास में इंजेक्शन व बोतल पड़ी थी। पिता ने पिछली सीट का शीशा तोड़कर लॉक खोला और फिर बेटी को बाहर निकाला। वह उसे पास के ही इंद्रेश अस्पताल में ले गए, जहां 25 मार्च तड़के 3 बजे ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों का सीधा आरोप- मौत के लिए HOD जिम्मेदार शिकायत में पिता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी बेटी मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक शोषण के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के लिए संबंधित HOD पूरी तरह जिम्मेदार हैं। वहीं, परिवार की शिकायत के बाद डॉ. प्रियंका गुप्ता पर पटेल नगर थाने में बीएनएस की धारा 108 के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। मामले में आगे की जांच की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि क्या सच में तनवी ने टीचर से परेशान होकर ये कदम उठाया। अब 6 पॉइंट्स में जानिए कॉलेज ने इस मामले पर क्या कहा… 1. लंबे समय से मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा था
कॉलेज प्रशासन ने SSP को लिखे पत्र में कहा है कि तनवी काफी समय से मानसिक बीमारी से जूझ रही थी और उसका इलाज चल रहा था। पढ़ाई के दौरान भी वह कई बार खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें करती थी। 2. पहले भी आत्महत्या की कोशिश कर चुकी थी
कॉलेज के अनुसार, करीब दो साल पहले तनवी ने आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके अलावा 31 दिसंबर 2025 की रात भी उसने दोबारा ऐसा प्रयास किया था, जिसकी जानकारी रिकॉर्ड में होने की बात कही गई है। 3. परिवार को थी पूरी जानकारी, लिखित कंसेंट भी दिया गया था
पत्र में कहा गया है कि तनवी की मानसिक स्थिति के बारे में उसके माता-पिता को पूरी जानकारी थी। साथ ही पैरेंट्स की ओर से उसके इलाज और स्थिति को लेकर एमएस ऑफिस में पहले ही लिखित सहमति (कंसेंट) भी जमा कराई गई थी। 4. इलाज के लिए कैंपस के पास रह रहा था परिवार
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि तनवी की स्थिति को देखते हुए उसका परिवार देहरादून में कॉलेज कैंपस के पास किराए के मकान में रह रहा था। ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज और देखभाल मिल सके। 5. घटना के बाद अस्पताल लाया गया, इमरजेंसी में मृत घोषित
प्रशासन के मुताबिक, घटना के बाद छात्रा को 25 मार्च की सुबह करीब 3:15 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया और आगे की प्रक्रिया पूरी की गई। 6. कार्रवाई की मांग से डॉक्टरों का मनोबल गिरने की चिंता
पत्र में यह भी कहा गया है कि कुछ लोग इस मामले में डॉक्टरों और अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं, जिससे डॉक्टरों का मनोबल गिर सकता है। प्रशासन ने अपील की है कि मामले को गलत तरीके से पेश न किया जाए और तथ्यों के आधार पर जांच की जाए। —————– ये खबर भी पढ़ें… हल्द्वानी में लेफ्टिनेंट कर्नल के बेटे ने सुसाइड किया: पहले हाथ की नस काटी, फिर नीले ड्रम पर रस्सी फंसाकर लटका हल्द्वानी में आम्रपाली कॉलेज के MBA के छात्र ने सुसाइड कर लिया। मृतक के पिता असम राइफल्स में लेफ्टिनेंट कर्नल पद पर तैनात हैं। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है। (पढ़ें पूरी खबर)
लेडी डॉक्टर ने खुद को लगाया जहरीला इंजेक्शन, मौत:देहरादून में कार के अंदर मिली; पिता बोले- टीचर 0 नंबर देती थी जिससे बेटी परेशान थी
