पहाड़ों का अनोखा रिवाज! जानें क्यों यहां एक नहीं दो बार किया जाता है जनेऊ संस्कार? बेहद खास है वजह

Spread the love

Janeu Parmpara Uttarakhand: उत्तराखंड के पहाड़ों में ‘जनेऊ संस्कार’ केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि बालक के अनुशासित जीवन की शुरुआत का सबसे बड़ा केंद्र है. पंडित दामोदर जोशी के अनुसार, इस संस्कार के जरिए बालक का ‘दूसरा जन्म’ (द्विज) माना जाता है, जहां से वह ज्ञान और जिम्मेदारी की राह पर कदम रखता है. पहाड़ी संस्कृति में जनेऊ के तीन धागों के गहरे अर्थ और उसके 4 दिन बाद होने वाली ‘दूण बरपंद’ की दुर्लभ परंपरा, जिसमें बालक खुद अपना भोजन बनाता है.