अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि गरीबी केवल आर्थिक कमी नहीं, बल्कि अवसरों की असमानता का परिणाम है। उन्होंने अपने शोध-आधारित व्याख्यान में बताया कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक न्याय का संयुक्त प्रयास आवश्यक है। उन्होंने विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से गरीबी उन्मूलन की गति कई गुना बढ़ सकती है।
डॉ. जीछू पासवान ने कहा कि दलित समाज से गरीबी हटाने के लिए सामाजिक समानता, शिक्षा और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। वहीं डॉ. संत साह ने मानसिक गरीबी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब व्यक्ति आत्मविश्वास खो देता है, वही वास्तविक गरीबी है। प्रोफेसर प्रेम प्रकाश, एनएसएस पदाधिकारी, ने कहा कि आज गरीबी केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का मुख्य विषय बन चुकी है।
