जनता दल यूनाइटेड के सीनियर नेता केसी त्यागी के राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) में शामिल होने की चर्चा तेज है। सूत्रों के मुताबिक, वह 22 मार्च को दिल्ली में जयंत चौधरी की मौजूदगी में रालोद की सदस्यता ले सकते हैं। नाम न छापने की शर्त पर रालोद के एक सीनियर नेता ने दैनिक भास्कर को यह जानकारी दी है। केसी त्यागी के अगले राजनीतिक कदम को लेकर दैनिक भास्कर ने उनसे बात की। उन्होंने कहा- वह अपने आगामी राजनीतिक सफर को लेकर विचार कर रहे हैं। टिकट और चुनाव से जुड़े फैसले बाद में लिए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 17 मार्च को हुई। केसी त्यागी ने एक पत्र जारी कर बताया था- वह 22 मार्च को दिल्ली के मालवांकर हॉल में अपनी आगे की राजनीतिक दिशा का खुलासा करेंगे। पत्र के नीचे उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, बाबा भीमराव आंबेडकर और कर्पूरी ठाकुर के नाम लिखे थे। इसके साथ ही केसी त्यागी ने जदयू की सदस्यता भी आगे नहीं बढ़ाई है, जिससे उनके पार्टी से अलग होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केसी त्यागी अक्सर जयंत चौधरी की तारीफ करते रहे हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भाजपा की मजबूती के लिए जयंत चौधरी उपयोगी हैं और यूपी में आगे बढ़ने के लिए हर दल को रालोद की जरूरत है। इसी वजह से माना जा रहा है कि केसी त्यागी रालोद में शामिल हो सकते हैं। साथ ही, वह अपने बेटे के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहते हैं। रालोद में जाने के 3 बड़े संकेत पढ़िए- 1.) जदयू में मेंबरशिप रिन्यूवल नहीं कराया
केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री नीतीश के बेहद करीबी रहे हैं। एक समय ऐसा था कि उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखा था। केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। एक सितंबर 2024 को जदयू के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटाए जाने के बाद जदयू में हाशिए पर चल रहे केसी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखा था। उनके इस बयान के बाद से जदयू ने उनसे किनारा कर लिया था।
2.) त्यागी ने जयंत चौधरी से कराया किताब का विमोचन
11 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में केसी त्यागी की लिखी किताब ‘संकट में खेती’ का विमोचन भारत मंडपम के पुस्तक मेले में हुआ था। किताब का विमोचन रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने किया था। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि त्यागी रालोद का रुख कर सकते हैं। ये किताब चौधरी चरण सिंह और स्वामी सहजानंद सरस्वती को समर्पित है, जो किसानों के संघर्ष और समस्याओं पर प्रकाश डालती है। इस समारोह में जयंत का आना और जयंत चौधरी का केसी त्यागी की तारीफ में कही बातों के बाद से त्यागी के रालोद के साथ जुड़ने का संकेत और प्रबल हो गया था। 3.) जयंत ने कहा था- हर दल में एक केसी त्यागी होना चाहिए
जयंत ने केसी त्यागी द्वारा चौधरी चरण सिंह पर लिखी किताब का विमोचन करते हुए न सिर्फ उन्हें चौधरी साहब का सच्चा शिष्य बताया, बल्कि यह भी कहा कि मैं त्यागीजी को मनाने आया हूं। आगे कहा- हर दल में एक केसी त्यागी होना चाहिए। केसी त्यागी का वेस्ट यूपी में जनाधार जानिए… चौधरी चरण सिंह की छत्रछाया में केसी त्यागी आगे बढ़े
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि चौधरी चरण सिंह केसी त्यागी को अपना विचारपुत्र मानते थे, इस बात को वे कहते भी थे। अक्सर केसी त्यागी भी इसी बात को सार्वजनिक रूप से कहते रहे हैं। उन्होंने अजीत सिंह के सामने भी इस बात को कई बार कहा कि चौधरी साहब के जैविक पुत्र आप हैं, लेकिन मैं उनका वैचारिक पुत्र हूं। इस बात को भारत रत्न चौधरी चरण सिंह खुद कहते रहे। केसी त्यागी चौधरी चरण सिंह के पसंदीदा रहे हैं, उन्हीं की छत्रछाया में आगे बढ़े हैं। अगर रालोद उनको अपने साथ जोड़ती है तो उनके जरिए रालोद एक बड़ा मैसेज वेस्ट यूपी में त्यागी बिरादरी में देगी। इसका इंपैक्ट 2027 के चुनाव में भी नजर आएगा। गाजियाबाद में किसान परिवार में जन्मे केसी त्यागी
केसी त्यागी का जन्म यूपी के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर विधानसभा के मोरटा गांव में एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता जगराम सिंह त्यागी और माता रोहताश त्यागी थीं। उन्होंने मुरादनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। मेरठ विश्वविद्यालय से B.Sc. की डिग्री ली थी। गाजियाबाद और मेरठ सीट से लड़ा सांसदी का चुनाव
1989 में गाजियाबाद से सांसदी का चुनाव जनता दल के टिकट पर लड़कर जीते। तब उन्होंने कांग्रेस के प्रेममोहन जो मोहन मिकिंस कंपनी के मालिक थे और कांग्रेस के सिटिंग एमपी थे, उनको हराया। हालांकि, बाद में 1991 के चुनाव में रामलहर में त्यागी भाजपा के रमेशचंद तोमर से हार गए। इसके बाद जनता दल टूट गया। तब मुलायम सिंह ने जनता दल से निकलकर सपा बनाई। उस वक्त केसी त्यागी सपा में गए, लेकिन सपा में उनको वो जगह कभी नहीं मिली। वो आखिरी में समता पार्टी में नीतिश कुमार के साथ चले गए। फिर 2004 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जदयू को मेरठ सीट लड़ने के लिए दी। तब केसी त्यागी ने जदयू से मेरठ सीट से सांसदी का चुनाव लड़ा। लेकिन, इस चुनाव में बसपा के शाहिद अखलाक जो मेयर रहे, वो चुनाव जीत गए। पांच बार लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव रखने के साथ ही बिहार से 2013 से 2016 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे। मेरठ सीट से केसी त्यागी चुनाव हार गए। कुछ समय बाद वो बिहार चले गए। बिहार में नीतिश कुमार ने इनको बायइलेक्शन में 2 साल के लिए राज्यसभा भेज दिया। मुख्य रूप से त्यागी जदयू के अध्यक्ष रहे शरद यादव के साथ रहे। बाद में ये नीतिश के साथ आगे बढ़ते रहे, नीतिश ने ही इनको प्रधान महासचिव बनाया। वहीं, केसी त्यागी के राजनाथ सिंह से भी अच्छे संबंध रहे हैं। भाजपा में उपेक्षित बेटे के लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे
वेस्ट यूपी में त्यागी बिरादरी से जुड़े भाजपा के एक बड़े नेता कहते हैं कि केसी त्यागी के रालोद जॉइनिंग के पीछे बड़ा रीजन बेटे अमरीश त्यागी को राजनीति की मुख्यधारा में शामिल करना है। यूपी के 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान अमरीश त्यागी ने भाजपा जॉइन की थी। अमरीश त्यागी भाजपा में पहले दिन से साइडलाइन और उपेक्षा का शिकार रहे हैं। ऐसे में त्यागी अपने बेटे के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि केसी त्यागी खुद रालोद के नीतिगत और राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम करेंगे। बेटे को वेस्ट यूपी से 2027 के चुनाव में टिकट की दावेदारी कराएंगे। किठौर या गाजियाबाद से बेटे के लिए टिकट मांग सकते हैं
सीनियर जर्नलिस्ट अनिल बंसल कहते हैं, मेरठ की किठौर सीट पर भाजपा से सतवीर त्यागी 2017 में विधायक रह चुके हैं। गाजियाबाद का मुरादनगर भी त्यागियों की जीती सीट है। भाजपा से अजीत पाल त्यागी यहां मौजूदा विधायक हैं। 2017, 2022 का चुनाव जीते हैं। इससे पहले उनके पिता स्व. राजपाल त्यागी इस सीट से 7 बार चुनाव जीते और केंद्र में मंत्री रहे हैं। ऐसे में केसी त्यागी रालोद के जरिए NDA में इन सीटों से बेटे अमरीश के लिए टिकट का दावा करेंगे। बिहार में रहे, लेकिन वेस्ट यूपी में सक्रिय रहे
पॉलिटिकल एक्सपर्ट राजेश शर्मा कहते हैं- बिहार में अस्तित्व वाली पार्टी जदयू में रहने के बावजूद भी केसी त्यागी की सक्रियता हमेशा वेस्ट यूपी में रही। केसी त्यागी और उनके बेटे अमरीश दोनों ही शुरू से वेस्ट यूपी में सक्रिय रहे हैं। राजनीति में केसी त्यागी काफी कुछ हासिल कर चुके हैं। अब बेटे को स्टेबल करने के लिए वो ये कदम उठा रहे हैं। केसी त्यागी और रालोद को क्या फायदा मिलेगा? रालोद नेताओं ने क्या कहा, पढ़िए… —————————— यह खबर भी पढ़िए- मोदी से मिलकर क्या वरुण को नई जिम्मेदारी मिलेगी: यूपी की सियासत में 2 साल से ‘गायब’; 2024 के बाद पीलीभीत नहीं गए साल 2009- वरुण गांधी राजनीति में आए और पीलीभीत से सांसद बन गए। 2014 में वह सुल्तानपुर सीट से लड़े, पौने दो लाख वोटों से फिर जीत गए। इस चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पीलीभीत में एक भाषण दिया था। कहा था- अगर कोई हिंदुओं की तरफ हाथ बढ़ाता है या सोचता है कि हिंदू नेतृत्वविहीन है, तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि उसका हाथ काट डालूंगा। ऐसे बयानों की वजह से वरुण गांधी यूपी में मशहूर होते चले गए। हिंदुत्व का बड़ा चेहरा बन गए। पढ़ें पूरी खबर…
रालोद से नई पारी शुरू करेंगे केसी त्यागी:भाजपा में उपेक्षित बेटे के लिए जमीन तैयार कर रहे, जानिए वेस्ट यूपी में क्या इंपैक्ट पड़ेगा
