आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है मंडी जिला, करीब 1500 करोड़ के नुक्सान का आकलन : कौल सिंह ठाकुर

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उन्होंने कहा कि ऐसी भयंकर बरसात अब तक नहीं देखी। लोगों का भारी नुक्सान हुआ है, जिसके जख्म भरने में समय लगेगा। लोगों की जमीनें धंस गई, कई गांवों को खतरा हो गया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रदेश के मंत्रियों ने मौके पर जाकर लोगों के दुखदर्द को साझा किया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई भ्रमण कर इस तबाही का मंजर देख और धर्मशाला में आपदा प्रभावितों से बात करने के बाद पंद्रह सौ करोड़ का पैकेज जारी किया। जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है, पूर्व की सरकार वित्तीय सेहत बिगाड़ कर रख दी है। केंद्र सरकार की मदद के बिना यह सब संभव नहीं है।

कौल सिंह ने कहा कि धर्मपुर बस अड्डा तीसरी बार बाढ़ की चपेट में आ गया है। उन्होंने कहा कि जब इस जगह का चयन हुआ था तो मैंने विरोध किया था। लेकिन महेंद्र सिंह ने जिद्द करके इसे बनाया है। हर बार सोन खड्ड में बाढ़ आने की वजह से पानी बस अड्डे में घुस जाता है। कौल सिंह ने कहा कि इस आपदा के पीछे पर्यावरण से छेड़छाड़ होना भी एक कारण रहा है। सीमेंट कारखाने प्रदेश में प्रदूषण फैला रहे हैं। इसके अलावा चुपचाप सीमेंट के दाम बढ़ा देते हैं।

कौल सिंह ने आपदा की इस घड़ी में प्रशासनिक अधिकारियों उपायुक्त से लेकर तहसीलदार तक की भूमिका की सराहना की है। जिन्होंने आपदा की घड़ी में लोगाें के बीच जाकर उनकी हर संभव मदद की है। उसी प्रकार लोकनिर्माण, जलशक्ति विभाग और बिजली बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारियों ने दिनरात काम कर सड़क, बिजली और पेयजल सुविधाएं मुहैया करवाई। कौल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द राहत प्रदान करे। जितना नुक्सान मंडी जिला में हुआ है, उतना प्रदेश के किसी भी जिला में नहीं हुआ है और मंडी में भी सराज में सबसे अधिक नुक्सान हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आने वाले समय में खडडों और नालों से दूर घर बनाने और पर्यावरण से छेड़छाड़ को लेकर सख्त नीति बनाए। उन्होंने कहा कि हिमालय के पहाड़ों की मिट्टी कमजोर है, जिससे भू-धंसाव के मामले ज्यादा बढ़ रहे हैं। कौल सिंह ने कहा कि मंडी-मनाली फोरलेन की डीपीआर ही गलत बनी है, पहाड़ों को काटने के बजाय सुरंगें बनाकर इस तबाही से बचा जा सकता है।