कर्नाटक सरकार की स्टडी में दावा:91% लोग मानते हैं चुनाव निष्पक्ष; वोट चोरी के आरोपों पर भाजपा बोली- यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा

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कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी की स्टडी में दावा किया गया है कि राज्य के 91% लोगों मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और ईवीएम सटीक नतीजे देती हैं। यह रिपोर्ट कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) ने प्रकाशित की है। यह सर्वे ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भाजपा पर कई राज्यों में ‘वोट चोरी’ का लगातार आरोप लगा रहे हैं। वे कर्नाटक के कलबुर्गी में भी वोट चोरी का दावा कर चुके हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में भाजपा ने सर्वे रिपोर्ट को लेकर राहुल पर पलटवार किया है। भाजपा नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘लोग चुनावों पर, ईवीएम पर और लोग भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। यह सर्वे कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा है। क्योंकि जहां नागरिक भरोसा दिखा रहे हैं, वहीं कांग्रेस शक जता रही है।’ कर्नाटक के 102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया सर्वे सूत्रों के अनुसार, चुनाव को लेकर KMEA की रिपोर्ट अगस्त 2025 में तैयार हुई थी, जो हाल में सार्वजनिक की गई है। इसका टाइटल है ‘लोकसभा इलेक्शन 2024: इवैल्यूएशन ऑफ एंडलाइन सर्वे ऑफ नॉलेज, एप्टीट्यूड एंड प्रैक्टिस (KAP) ऑफ सिटीजन्स।’ यह स्टडी कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की तरफ से लागू सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (SVEEP) कार्यक्रम के नतीजों का आकलन करने के लिए कराया गया था।यह सर्वे कर्नाटक के 34 निर्वाचन जिलों के 102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। कलबुर्गी में लोगों को चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा भरोसा इसमें ग्रामीण, शहरी और आरक्षित सीटों के कुल 5,100 मतदाता शामिल हुए। सर्वे में राज्य के चारों संभागों- बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु को कवर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी डिवीजनों में सर्वे में शामिल 91.31% लोगों ने माना कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं। कुल मिलाकर 69.39% ने सहमति और 14.22% ने पूरी सहमति दी कि ईवीएम सही नतीजे देती हैं। इसमें 6.76% ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने न्यूट्रल राय दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा भरोसा कलबुर्गी डिवीजन में दिखा। यहां 84.67% लोगों ने निष्पक्ष चुनाव पर सहमति जताई और 10.19% ने पूरी तरह सहमति दी। इसके बाद बेलगावी दूसरे, मैसूरु तीसरे और ​​​​​​बेंगलुरु डिवीजन चौथे नंबर पर रहा। बेंगलुरु में न्यूट्रल राय देने वालों का अनुपात सबसे ज्यादा 12.50% रहा, जो अन्य डिवीजनों से अधिक है। असहमति भी बेंगलुरु डिवीजन में तुलनात्मक रूप से ज्यादा रही। यहां 9.67% ने असहमति और 3.56% ने पूरी असहमति जताई। ईवीएम को लेकर वोटरों में भरोसा मजबूत स्टडी के अनुसार, सभी डिवीजनों में बड़ी संख्या में लोग ईवीएम पर भरोसा जताते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईवीएम पर सबसे ज्यादा भरोसा कलबुर्गी डिवीजन में दिखा, जहां 83.24% लोग इस बात से सहमत थे कि यह सही नतीजे देता है। 11.24% पूरी तरह सहमत थे। इसके बाद मैसूरु डिवीजन रहा, जहां 70.67% सहमत और 17.92% पूरी तरह सहमत थे। बेलगावी डिवीजन में भी भरोसा मजबूत रहा, जहां 63.90% सहमत और 21.43% पूरी तरह सहमत थे। बेंगलुरु डिवीजन में ईवीएम को लेकर पूरी सहमति सबसे कम 9.28% रही, हालांकि 63.67% ने सहमति जताई। यहां भी न्यूट्रल राय देने वालों का अनुपात सबसे ज्यादा 15.67% रहा, जो अन्य डिवीजनों की तुलना में काफी अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल असहमति 8.75% रही। यह अनुपात बेलगावी और बेंगलुरु डिवीजनों में कलबुर्गी और मैसूरु की तुलना में थोड़ा ज्यादा पाया गया। 44.90% लोगों ने माना- चुनावों में पैसे का इस्तेमाल बढ़ रहा स्टडी में शामिल करीब 50% महिलाएं थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इस सवाल पर कि क्या महिलाओं को मतदान से पहले पुरुष सदस्यों या बुजुर्गों से सलाह लेनी चाहिए, डिवीजनों में राय अलग-अलग रही। कुल मिलाकर 34.57% ने इस विचार से सहमति और 3.14% ने पूरी सहमति जताई। वहीं, इससे बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं ने असहमति (37.86%) या पूरी असहमति (13.78%) जताई। स्टडी में चुनावों में पैसे के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई। कुल 44.90% उत्तरदाताओं ने माना कि चुनावों में पैसे का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जबकि 4.65% ने इससे पूरी तरह सहमति जताई। मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए लालच दिए जाने के सवाल पर 16.33% उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने ऐसी कोशिशों का अनुभव किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे 833 उत्तरदाताओं में सबसे आम प्रलोभन सरकारी योजनाओं के लाभ रहे, जो कुल मामलों का 42.26% थे। इसके बाद नौकरी दिलाने के वादे रहे, जिनका हिस्सा 34.09% रहा। 18 सितंबर: राहुल ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी के लगाए थे आरोप कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 18 सितंबर को 31 मिनट का प्रजेंटेशन दिया था। इसमें उन्होंने कहा- मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को नष्ट करने वालों और वोट चोरों को बचा रहे हैं। राहुल ने कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की आलंद विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां कांग्रेस समर्थकों के वोट योजनाबद्ध तरीके से हटाए गए। राहुल ने दावा किया कि आलंद में जिन वोटर्स के नाम डिलीट किए गए उनको हटाने के लिए दूसरे राज्यों में ऑपरेट हो रहे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया। राहुल ने प्रजेंटेशन में उनके नंबर भी बताए। गोदावाई के 12 पड़ोसी के नाम भी हैं, जिन्हें इन मोबाइल नंबर्स से डिलीट किया गया। पढें पूरी खबर चुनाव आयोग ने कहा- ऑनलाइन वोट डिलीट करना संभव नहीं चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों पर 19 सितंबर को लेटर जारी करते हुए कहा था- कोई भी आम नागरिक ऑनलाइन वोट डिलीट नहीं कर सकता। वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया केवल कानूनी नियम और सुनवाई के बाद ही होती है। आयोग के मुताबिक, कर्नाटक के आलंद में 2023 में 6,018 आवेदन आए थे, जिनमें से सिर्फ 24 सही और 5,994 गलत पाए गए। संदिग्ध गतिविधि पर आलंद पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर जांच कलबुर्गी पुलिस को सौंपी गई। वहीं, महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की राजुरा सीट पर 7,792 नए वोटर रजिस्ट्रेशन में से 6,861 गलत निकले और मामला पुलिस तक पहुंचा। ……………………………………………… राहुल गांधी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… CRPF बोली- राहुल गांधी सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं मानते: कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को लेटर लिखा- बिना बताए विदेश जाते हैं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया है। CRPF ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर कहा है कि राहुल गांधी पिछले 9 महीने में बिना सूचना दिए 6 बार विदेश गए। इस दौरान वे इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया की यात्रा कर चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…