कुछ दिन पहले रेहलू, दरगेला और ठम्बा क्षेत्र में हानिकारक घास की समस्या को देखते हुए विधायक पठानिया ने कृषि विभाग को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देश पर कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और किसानों को जागरूक किया कि धान के खेतों में इस घास को 24-डी ईथायल दवा से तथा खाली क्षेत्रों में ग्लाइफोसेट या पैराक्वायर दवाओं से समाप्त किया जा सकता है। इस घास को स्थानीय भाषा में एलिगेटर, नाली घास या दूधली घास कहा जाता है।
विधायक केवल पठानिया ने खुद अपने खेतों में बैंगन, भिंडी और तोरी जैसी सब्जियां उगाकर यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि थोड़ी सी मेहनत और प्राकृतिक खेती के जरिए आम आदमी भी आत्मनिर्भर बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हर किसान अपने आंगन या खेत में मौसमी फल और सब्जियां उगाए तो न केवल उसकी आय बढ़ेगी, बल्कि परिवार का स्वास्थ्य भी सुधरेगा।
