ग्वालियर के डबरा स्टेडियम में मंगलवार सुबह 10.30 बजे हजारों की संख्या में महिलाएं इकट्ठा थीं। यहां एशिया के सबसे बड़े नवग्रह मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम था। 25 हजार महिलाओं को साड़ियां पहले ही बांटी जा चुकी थीं, जबकि स्टेडियम से कलश बांटे जाने थे। बताया गया था कि यात्रा के बाद कलश और साड़ी वापस नहीं लिए जाएंगे। इसी कारण महिलाएं जल्द से जल्द कलश पाने की होड़ में आगे बढ़ने लगीं। गेट नंबर-1 के सामने भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट थे, लेकिन एक को छोड़कर बाकी सभी बंद रखे गए थे। हालात ऐसे थे कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मी स्थिति कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे। इसी दौरान अफवाह फैल गई कि कलश वितरण शुरू हो गया है। महिलाओं ने गेट पर दबाव बनाया और गेट खुलते ही भगदड़ मच गई। जो गिर पड़ीं, उन्हें पैरों तले रौंदते हुए हजारों महिलाएं आगे बढ़ गईं। हादसे में 70 वर्षीय रति बाई साहू की मौत हो गई, जबकि एक चार साल की मासूम प्राची समेत आठ महिलाएं घायल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आयोजक भीड़ का सही आकलन नहीं कर पाए थे। यही हादसे का प्रमुख कारण बना। वहीं जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाही भी मानी जा रही है। दैनिक भास्कर ने हादसे के कारण तलाशे। प्रत्यक्षदर्शियों से बात की। जिम्मेदारों से वजह पूछी। पढ़िए रिपोर्ट… 25 हजार महिलाएं आना थीं तो क्यों बंद रखे गेट डबरा के जिस स्टेडियम ग्राउंड से कलश यात्रा निकाली जानी थी और कलश वितरित किए जाने थे, वहां सुबह 9 बजे से ही महिलाओं का जुटना शुरू हो गया था, जबकि कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद निकलनी थी। आयोजनकर्ताओं के अनुसार, करीब 25 हजार पीली साड़ियां बांटी गई थीं और उसी संख्या के अनुसार कलश मंगाए गए थे। यह भी बताया गया था कि कलश यात्रा के बाद साड़ी और कलश संबंधित महिलाओं के पास ही रहेंगे। स्टेडियम में प्रवेश और निकास के लिए कुल चार गेट हैं, लेकिन सुबह 10.30 बजे तक चारों गेट बंद रखे गए थे, जबकि कुछ महिलाएं पहले से ही अंदर मौजूद थीं। अस्पताल के सामने स्थित गेट नंबर-1 पर महिलाओं की भारी भीड़ हो गई थी, लेकिन गेट बंद था। मौके पर न तो आयोजनकर्ता दिखाई दे रहे थे, न ही पर्याप्त पुलिस बल। भीड़ नियंत्रण के लिए केवल दो से तीन पुलिसकर्मी थे। ऐसे में जब हजारों महिलाएं जमा हो गईं तो गेट पर लगी जंजीर टूट गई और महिलाएं अंदर की ओर दौड़ पड़ीं, जिससे भगदड़ मच गई। पीछे से भगदड़ में धक्का लगा फिर उठ नहीं पाए डबरा स्टेडियम में गेट नहीं खुलने पर मची भगदड़ में घायल आरती की बेटी चार साल की प्राची की हालत नाजुक है। वह बांटी गई साड़ी पहनकर कलश लेने के लिए पहुंची थी। गेट पर सबसे आगे थी और अपनी बेटी का हाथ थामे हुए थी। जैसे ही गेट खुला तो महिलाएं कलश के लिए दौड़ पड़ीं। नानी गिरीं, लोग उन्हें रौंदते हुए निकले रति साहू के नाती हेमंत ने बताया कि मेरी नानी रति बाई साहू गेट पर सबसे आगे खड़ी थीं। प्रशासन या आयोजकों को चाहिए कि महिलाओं की पीछे कर व्यवस्थित कर गेट खोलें, लेकिन अचानक गेट खुला और नानी गिर पड़ीं। नानी के गिरते ही उनके ऊपर से कई महिलाएं उनको रौंदते हुए निकल गईं। मेरी नानी वहां पर तड़प रही थीं। हम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे तो वहां 20 मिनट तक डॉक्टर ही नहीं मिले। इतना बड़ा आयोजन हुआ और अस्पताल में डॉक्टर नहीं थे। मैं कहता रहा कि नानी को ऑक्सीजन लगाइए, लेकिन डॉक्टर सुन नहीं रहे थे। मेरी आंखों के सामने तड़पते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। भीड़ का आकलन नहीं कर सका प्रशासन आयोजकों ने कलश यात्रा के लिए 25 हजार साड़ियां बांटी थीं। अनुमान था कि करीब 20 हजार महिलाएं कार्यक्रम में पहुंचेंगी, लेकिन आयोजकों, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित नहीं हो सका। प्रशासन भीड़ का सही आकलन नहीं कर पाया। यही कारण था कि सुबह 9 बजे से ही स्टेडियम ग्राउंड में महिलाएं पहुंचने लगी थीं, लेकिन मौके पर प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। आयोजक भी नदारद रहे। पुलिस व्यवस्था के नाम पर गेट नंबर-1 पर केवल दो से तीन पुलिसकर्मी तैनात थे। इस हादसे के लिए आयोजक, प्रशासन और पुलिस तीनों की जिम्मेदारी बनती है। अफवाह के बाद मची भगदड़ जानकारी के अनुसार, जब गेट के बाहर महिलाओं की भीड़ हो गई थी, तभी अफवाह फैल गई कि कलश वितरण शुरू हो चुका है और केवल वही महिलाएं कलश प्राप्त करेंगी, जो सबसे पहले पहुंचेंगी और वितरित की गई साड़ी पहने होंगी। इस अफवाह के बाद महिलाओं ने गेट पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। जैसे ही गेट खोला गया, महिलाएं तेजी से अंदर की ओर दौड़ पड़ीं। इसी दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें कुछ लोग गिर पड़े और भीड़ उन्हें पैरों तले रौंदते हुए कलश लेने आगे बढ़ गई। बिखरी पड़ी चप्पलें, कड़े और चूड़ियां जब दैनिक भास्कर की टीम डबरा स्टेडियम पहुंची तो वहां खामोशी छाई हुई थी। चारों ओर बिखरा पड़ा सामान हादसे को साफ बयां कर रहा था। गेट नंबर-1, जहां हादसा हुआ था, वहां चप्पलें पड़ी थीं तो कुछ दूरी पर पर्स, चूड़ियां और कड़े बिखरे नजर आए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि भगदड़ के दौरान पैरों तले कुचले गए लोगों की स्थिति कितनी भयावह रही होगी। हादसे में 20 से अधिक घायल, 9 अस्पताल पहुंचे हादसे में सरोज साहू पत्नी लालाराम साहू (निवासी दर्शन कॉलोनी), सुमन पत्नी कमल किशोर, विनीत पिता बाबूलाल कोरी, विमला देवी, पुष्पा, दुर्गेश, उम्मेद सिंह रावत (निवासी अशोक नगर), अनिता अहिरवार, चार वर्षीय प्राची जाटव और आरती अहिरवार घायल हुईं। वहीं 70 वर्षीय रति बाई साहू निवासी हनुमान कॉलोनी, डबरा की मौत हो गई।
अस्पताल तक 9 घायल पहुंचे, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायलों की संख्या 20 से अधिक थी। कई घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद मौके से ही रवाना कर दिया गया। 2 हजार पुलिसकर्मी की तैनाती का दावा फेल एशिया के सबसे बड़े और अद्भुत नवग्रह मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 11 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ मंगलवार को कलश यात्रा के साथ होना था। इससे एक दिन पहले ग्वालियर रेंज के आईजी अरविंद सक्सेना ने निरीक्षण कर दो हजार से अधिक जवानों और अधिकारियों की तैनाती का दावा किया था। हालांकि, यह सुरक्षा व्यवस्था मंदिर परिसर और कलश यात्रा मार्ग तक ही सीमित रही। जिस स्थान पर कलश वितरण किया जा रहा था, वहां न तो पुलिस बल नजर आया, न ही प्रशासन का कोई कर्मचारी मौजूद था। आयोजकों की ओर से भी कोई प्रभावी प्रबंधन दिखाई नहीं दिया। सुबह 9 बजे से कलश की चाह में जुटी भीड़ वैसे तो कलश यात्रा दोपहर 12.40 बजे शुरू होनी थी। आयोजकों ने घर-घर जाकर साड़ियां बांटी थीं और कहा गया था कि जो महिला यह साड़ी पहनकर स्टेडियम आएगी, उसे कलश दिया जाएगा। बाद में वह कलश और साड़ी उसी महिला की हो जाएगी। इसी कारण कलश पाने की होड़ में सुबह 9 बजे से ही महिलाएं स्टेडियम पहुंचने लगी थीं। भीड़ प्रबंधन फेल कैसे हुआ? स्टेडियम में चार गेट हैं, लेकिन आयोजकों और प्रशासन ने शुरुआत से ही क्राउड मैनेजमेंट पर ध्यान नहीं दिया। चार में से तीन गेट बंद रखे गए थे। गेट नंबर-1 से ही महिलाओं को प्रवेश देने और कलश वितरण की व्यवस्था की गई थी। आयोजनकर्ताओं की ओर से पर्याप्त वॉलेंटियर तैनात नहीं किए गए थे। गिने-चुने कार्यकर्ताओं के भरोसे पूरा आयोजन किया जा रहा था। जब तक पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ग्राउंड में मौजूद रहे, तब तक भारी पुलिस बल तैनात था, लेकिन उनके जाने के बाद पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके से नदारद नजर आए। 15 हजार की क्षमता, पहुंच गए 25 हजार डबरा के जिस स्टेडियम में कलश वितरण होना था, उसकी क्षमता 10 से 15 हजार लोगों की है, जबकि वहां 20 से 25 हजार लोगों की भीड़ पहुंच गई। क्षमता से अधिक भीड़ होने के बावजूद उचित प्रबंधन नहीं किया गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ। ग्वालियर आईजी बोले- फोर्स बढ़ा दिया गया
घटना के बाद ग्वालियर आईजी अरविंद सक्सेना, आईजी अमित सांघी और कलेक्टर रुचिका चौहान पुलिस बल के साथ डबरा पहुंचीं। अधिकारियों ने घटना स्थल का निरीक्षण किया और आधे घंटे से अधिक समय तक स्टेडियम ग्राउंड में रहकर घटना के कारणों की समीक्षा की। जब आईजी अरविंद सक्सेना से हादसे के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कलश पाने की जल्दबाजी में महिलाओं का उतावलापन इस भगदड़ की मुख्य वजह बना। ये खबरें भी पढ़ें… 25 हजार कलश, 1500 पुलिसकर्मी… फिर भी भगदड़ ग्वालियर के डबरा में बने एशिया का सबसे बड़े नवग्रह मंदिर के स्थापना समारोह के पहले दिन बड़ा हादसा हो गया। एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। सात महिलाएं घायल हैं। ये सभी वे महिलाएं हैं जो कलश यात्रा में शामिल होने आई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… डबरा में कलश बांटते वक्त भगदड़…VIDEO:महिला की मौत, बच्ची समेत 8 घायल मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में नवग्रह मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कलश यात्रा शुरू होने से पहले भगदड़ मच गई। इसमें 70 वर्षीय महिला रति साहू की मौत हो गई। बच्ची समेत 8 लोग घायल हो गए हैं। इनमें से एक की हालत गंभीर है। ग्वालियर रेफर किया गया है। पढ़ें पूरी खबर देश का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर: 12 एकड़ जमीन पर सिर्फ मंदिर बना एशिया का सबसे बड़ा और अद्भुत नवग्रह मंदिर ग्वालियर के डबरा में बना है। वैदिक धर्म ग्रंथों एवं शास्त्रों में बताया गया है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में कुल 27 तारामंडल हैं। इन तारामंडलों की चार दिशाएं हैं। यदि हम 27 को 4 से गुणा करते हैं, तो कुल 108 संख्या आती है।जिसका अर्थ यह है कि संपूर्ण ब्रह्मांड का स्वरूप 108 अंक है। पढ़ें पूरी खबर…
कलश वितरण शुरू…इस अफवाह से मची भगदड़:15 हजार की क्षमता वाले स्टेडियम में 25 हजार महिलाएं जुटीं, 4 में से 3 गेट बंद रखे
