सिर्फ गंगा स्नान और पूजा ही भक्ति नहीं,समाज व मानवता की सेवा भी भक्ति : जीयर स्वामी

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सिर्फ गंगा स्नान और पूजा ही भक्ति नहीं,समाज व मानवता की सेवा भी भक्ति : जीयर स्वामी

महाकुम्भ नगर, 15 फरवरी (हि.स.)। भक्ति सिर्फ गंगा स्नान और मंदिर में पूजा करना ही नहीं है, बल्कि ईश्वर का भजन करना, सत्कर्म करना, पुत्र, पति, स्वामी, समाज एवं मानवता की सेवा करना भी भक्ति है। यह बात शनिवार को महाकुंभ के सेक्टर नंबर- 8 में स्वामी जियर महाराज ने कही।

उन्होंने बताया कि काफी संख्या में महिला तथा पुरुषों ने सनातन धर्म को अपनाया। सनातन धर्म दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धर्म है,इसके सिवा कोई धर्म नहीं है। सनातन धर्म का प्रचार प्रचार करना ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ भक्ति है। जो ईश्वर की भक्ति करता है, उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं आती। वैसे तो सुख-दुख जीवन का दोनों अंग है। सुख और दुख आते रहते हैं, लेकिन विषम परिस्थितियों में भी ईश्वर का साथ नहीं छोड़ना चाहिए, तभी व्यक्ति महान बनता है। भक्ति सिर्फ गंगा स्नान और मंदिर में पूजा करना ही नहीं है, बल्कि ईश्वर का भजन करना, सत्कर्म करना, पुत्र, पति, स्वामी, समाज एवं मानवता की सेवा करना भी भक्ति है। श्री जीयर स्वामी ने श्रीमद्भागवत कथा के तहत नैमिषारण्य प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि करीब छ: हजार वर्ष पूर्व वहाँ धर्म सम्मेलन हुआ था।

उन्होंने कहा कि भक्ति और भगवान के आश्रय में रहकर सुकर्म करते हुए अपने अपराधों के प्रभाव को कम किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। बारिश में छाता या बरसाती से आँधी में दिये को शीशा से बचाव किया जा सकता है, लेकिन बारिश एवं आँधी को रोका नहीं जा सकता है। भक्ति और सत्कर्म का प्रभाव यही होता है। प्रारब्ध या होनी का समूल नाश नहीं होता। प्रारब्ध का भोग भोगना ही पड़ता है। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रारब्ध अवश्यमेव भोक्तव्यम्। ईश्वर की भक्ति अथवा संत-सद्गुरू प्रारब्ध की तीक्ष्णता को कम किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति के भाग्य में उसके पिछले जन्मों के कुकर्मो के कारण शूली पर चढ़ना लिखा है, तो इस जन्म के ईश्वर-भक्ति या गुरू की कृपा से प्रारब्ध की शूली शूल का रूप ले सकती है। प्रारब्ध को मिटाया नहीं जा सकता, उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। प्रभारी अखिलेश बाबा ने बताया कि स्वामी महाराज प्रयाग से बिहार के लिए 16 फरवरी को प्रस्थान करेंगे। उसके बाद पूरे भारत के सभी राज्यों का भ्रमण करके सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करेंगे, जिसके लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है।

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