हरियाणा में साइबर ठगों ने अब आम जनता को डराने के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खौफनाक हथकंडे अपनाना शुरू कर दिए हैं। जींद जिले के नरवाना के बीरबल नगर की रहने वाली नीतू (ट्रेडमार्क फाइलिंग एजेंट) इस शातिर ठगी का शिकार बनीं। हैरानी की बात यह है कि उसको इंसाफ के लिए एक पुलिस थाने से दूसरे थाने तक एक साल तक धक्के खाने पड़े। आखिरकार, ASP सोनाक्षी सिंह के हस्तक्षेप के बाद अब साइबर क्राइम थाना जींद में मुकदमा दर्ज हुआ है। जेट एयरवेज और मनी लॉन्ड्रिंग का डर नीतू ने अपनी शिकायत में बताया कि 15 व 16 जुलाई 2024 में उनके पास अलग-अलग नंबरों से कॉल आए। ठगों ने खुद को TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) का अधिकारी बताया। ठगों ने कहा कि उसके आधार कार्ड पर एक फर्जी सिम चल रही है, जिसका इस्तेमाल जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुआ है। ऐसे किया गया डिजिटल अरेस्ट नीतू के अनुसार “मुझे फोन पर डराया गया कि पुलिस मेरा नंबर बंद करने वाली है, क्योंकि मेरा नाम जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल से जुड़े 538 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। जालसाजों ने खुद को मुंबई पुलिस और CBI का ऑफिसर बताकर मुझसे बात की। उन्होंने मुझे डराया कि मुझे मुंबई के अंधेरी ईस्ट पुलिस स्टेशन आना होगा। जब मैंने अपनी बीमारी का हवाला दिया, तो उन्होंने मुझे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया, यानी मुझे दो दिनों तक स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर रहने और किसी को न बताने के लिए मजबूर किया। उन्होंने मुझे सुप्रीम कोर्ट, CBI और TRAI के फर्जी दस्तावेज दिखाए। इसके बाद, उन्होंने मेरे बैंक खातों की जांच (Verification) करने के नाम पर मेरी निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की और मुझे लगातार धमकाया।” वेरिफिकेशन के नाम पर ऐंठे 81 हजार रुपए ठगों ने नीतू को भरोसा दिलाया कि उनके बैंक ट्रांजैक्शन वेरिफाई करने के बाद ही उनका नाम इस 538 करोड़ के केस से हटेगा। डर के साये में नीतू ने 50 हजार रुपए एक UPI ID पर ट्रांसफर किए। इसके बाद ₹31,000 एक अन्य बैंक खाते में भेजे। जब ठगों ने ₹1.50 लाख की और मांग की, तब नीतू को दोस्तों की मदद से अहसास हुआ कि उनके साथ ‘डिजिटल फ्रॉड’ हुआ है। साल भर थाने-दर-थाने भटकती रही नीतू नीतू का संघर्ष ठगी के बाद शुरू हुआ। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं… साइबर थाना जींद ने यह कहकर केस नरवाना भेज दिया कि राशि 1 लाख से कम है। नरवाना शहर थाना ने कहा कि उनके पास साइबर उपकरण नहीं हैं। नीतू ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जांच अधिकारी (IO) नियुक्त नहीं किया गया और पुलिस अधिकारियों का व्यवहार उनके प्रति अपमानजनक रहा। अंत में नीतू को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी, जिसके बाद उनके होल्ड किए गए ₹5,000 वापस मिल सके। अब जाकर हुई कार्रवाई (FIR दर्ज) 17 दिसंबर 2025 को एडिशनल एसपी सोनाक्षी सिंह ने खुद नीतू के बयान दर्ज किए। मामले की जांच में पाया गया कि यह वाकई ‘डिजिटल अरेस्ट’ का गंभीर मामला है। अब धारा 318(4), 319 और 61(2) BNS के तहत मुकदमा नंबर 13 दर्ज किया गया है। पुलिस पर भी एक्शन की मांग नीतू ने मानवाधिकार आयोग को भी शिकायत दी है कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों (तत्कालीन प्रभारी व IO) के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जींद की युवती को ठगों ने किया ‘डिजिटल अरेस्ट’:पुलिस ने एक साल तक कटवाए चक्कर; CBI अधिकारी बन 2 दिन तक धमकाया-डराया
